अर्बन नक्सल डफ़ली वाले दोस्तों से कह रहे हो? आशुतोष ने पूछा- कोरोना पर थाली बजाएं या उत्सव मनाएं तो बोले फिल्ममेकर

हर दिन बढ़ते कोरोनावायरस संक्रमण पर वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने जब सरकार पर निशाना साधा तो बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित उनसे उलझ गए। उन्होंने कहा कि यह अपने अर्बन नक्सल दोस्त डफली बजाने वालों से....

ashutosh, ashoke pandit, covid 19अशोक पंडित ने ट्विटर पर पत्रकार आशुतोष पर चुटकी ली है (Photo-Ashoke Pandit/Twitter)

देश में कोरोना महामारी का प्रकोप हर दिन बढ़ता जा रहा है। कोविड- 19 का वैक्सिनेशन प्रोग्राम भी चल रहा है लेकिन भारत की बड़ी आबादी के कारण इसमें भी काफी वक्त लग रहा है। इधर विपक्ष कोविड से सामना करने की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति की जमकर आलोचना कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। हर दिन बढ़ते कोरोनावायरस संक्रमण पर वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने जब सरकार पर निशाना साधा तो बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित उनसे उलझ गए।

पिछले साल कोविड- 19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुटता दिखाने के लिए नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वो एक नियत समय पर कुछ देर के लिए ताली और थाली बजाएं जिसकी कुछ हलकों में आलोचना भी हुई थी। अब जब देश कोरोना के दूसरे लहर से गंभीर रूप से जूझ रहा है तब आशुतोष ने ट्वीट कर पूछा कि अब क्या करना है।

उन्होंने ट्विटर पर किए गए अपने ट्वीट में लिखा, ‘बहुत जल्द 2 लाख प्रतिदिन कोरोना होंगे। ताली बजाएं, थाली बजाएं या उत्सव मनाएं?’ उनके इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए अशोक पंडित ने तंज कसा, ‘यह अपने अर्बन नक्सल दोस्त डफली बजाने वालों से कह रहे हो ना!’ उनके इस ट्वीट पर यूजर्स भी जमकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जयराम पूनिया नाम के यूजर लिखते हैं, ‘पहले लिखने का अभ्यास करो, आपका कुंठित होना स्वाभाविक है।’

 

रघुराम नाम के यूजर लिखते हैं, ‘अशोक जी कभी- कभी दुश्मन के बात में भी दम होता है। कोविड के समय में भी किस तरह से नरेंद्र मोदी भीड़ जमा कर रहे हैं, दोहरापन दिखा रहे हैं उससे मेरी आस्था उनसे हट गई है। आप अंधभक्त मत बनिए।’

 

आशुतोष के ट्वीट पर अशोक पंडित के अलावा और कई लोगों ने ट्वीट कर उनसे अपनी असहमति जताई है। पुलिस ऑफिसर प्रणव महाजन ने उनके ट्वीट के जवाब में लिखा, ‘कम से कम जहर न फैलाएं।’

 

अमन सिद्दीकी नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘अगर बड़े व्यापारी या भाजपाई हैं तो उत्सव और आम जनता हैं तो मातम मना सकते हैं।’ नंदिनी इदनानी नाम की एक यूजर लिखती हैं, ‘हल्का- फुल्का बुखार, चिड़चिड़ाहट और सांस लेने में तकलीफ कोरोना के लक्षण नहीं हैं, कुछ लोगों को यह बीमारी 2014 से है।’

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