बॉलीवुड में प्रेम कहानियों के अलावा दोस्ती के किस्से भी शानदार हैं। अब आप जॉनी वॉकर और गुरू दत्त की दोस्ती को ही ले लीजिए। जॉनी वॉकर के बेटे नासिर खान ने दोनों की दोस्ती को याद करते हुए एक साझा किया और बताया कि गुरू दत्त की मौत के बाद उनके पिता जॉनी वॉकर ने फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ने का फैसला कर लिया था।
हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार और लंबे समय तक याद की जाने वाली स्क्रीन जोड़ियों में दिवंगत दिग्गज अभिनेता-फिल्मकार गुरु दत्त और मशहूर कॉमेडी अभिनेता जॉनी वॉकर की जोड़ी भी शामिल रही है। इन दोनों की दोस्ती एक मिसाल थी।
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गुरू दत्त की मौत के बाद फिल्में छोड़ना चाहते थे जॉनी वॉकर
द प्रिंट के साथ बातचीत के दौरान नासिर खान बताते हैं कि 1964 में गुरु दत्त के निधन के बाद उनके पिता जॉनी वॉकर इस सदमे से गहरे प्रभावित हुए थे। करीब दो साल बाद उन्होंने परिवार से कहा कि अब वह फिल्मों में काम नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्होंने सिर्फ एक सह-कलाकार ही नहीं, बल्कि उससे कहीं बढ़कर एक बेहद करीबी इंसान को खो दिया था। नासिर के मुताबिक, जिंदगी में ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं।
गुरू दत्त की हर फिल्म में जॉनी वॉकर का खास रोल
जॉनी वॉकर और गुरु दत्त का रिश्ता सिर्फ फिल्मों में साथ काम करने तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी गहरी दोस्ती पर आधारित था। नासिर खान के मुताबिक, गुरु दत्त का मानना था कि अगर जॉनी वॉकर उनके दोस्त हैं, तो फिल्म में भी उनका साथ अंत तक बना रहना चाहिए।
कहानी चाहे जैसी भी हो, पर्दे पर उनकी दोस्ती का रिश्ता आखिरी तक कायम रहता था। यही वजह थी कि गुरू दत्त की हर फिल्म में जॉनी वॉकर का एक खास रोल होता था।
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कैसे मिला जॉनी वॉकर नाम
गुरु दत्त ने ही जॉनी वॉकर के टैलेंट को पहचाना और उन्हें फिल्मों में मौका दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने ही उन्हें लोकप्रिय व्हिस्की ब्रांड के नाम पर ‘जॉनी वॉकर’ स्क्रीन नेम दिया, जिससे आगे चलकर वह इसी नाम से देशभर में मशहूर हुए, जबकि उनका असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था।
