मुंबई क्राइम ब्रांच के प्रॉपर्टी सेल ने अभिनेता जावेद जाफरी की पत्नी हबीबा जाफरी के साथ 16.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में सिंधुदुर्ग जिले के मालवन से देवेंद्र पडवाल को गिरफ्तार किया था। हालांकि, छह हफ्ते से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी इस मामले का एक मुख्य आरोपी बीएमसी असिस्टेंट कमिश्नर महेश पाटिल अभी भी फरार है।
महेश पाटिल के खिलाफ एलओसी जारी
पुलिस ने बताया कि पाटिल के देश छोड़ने से रोकने के लिए दो हफ्ते पहले उसके खिलाफ ‘लुक आउट सर्कुलर’ जारी किया गया था और उसे खोजने की कोशिशें जारी हैं। इससे पहले पुलिस ने निशित पटेल और रूपेश मोरे को गिरफ्तार किया था। ये दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि मोरे ने कथित तौर पर धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
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एक अधिकारी ने बताया कि पडवाल, पटेल के साथ ही खार की एक इमारत में रह रहा था। जांचकर्ताओं के अनुसार, पडवाल ने कथित तौर पर एक बड़े डेवलपर के नाम पर फर्जी ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ बनाई थी और दावा किया था कि उसे डेवलपर की तरफ से फैसले लेने और कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का अधिकार है।
सोमवार तक पुलिस हिरासत पडवाल
शुक्रवार को पडवाल को अदालत में पेश किया गया और आगे की जांच के लिए उसे सोमवार तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में मई में खार पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी और बाद में इसे क्राइम ब्रांच के प्रॉपर्टी सेल को सौंप दिया गया। एफआईआर में पाटिल के अलावा निशित पटेल, देवेंद्र पडवाल, रूपेश मोरे और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
ऐसे हुई थी हबीबा और पाटिल की मुलाकात
हबीबा जाफरी की शिकायत के अनुसार, उनकी मुलाकात बीएमसी ऑफिस जाने के दौरान पाटिल से हुई थी। पाटिल ने उन्हें बांद्रा में एक रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट में मुनाफे वाले निवेश के मौके के बारे में बताया था। पाटिल पर आरोप है कि उसने उन्हें पटेल के जरिए निवेश करने के लिए कहा था। पुलिस ने बताया कि हबीबा, उनके पति जावेद जाफरी, रिश्तेदारों और अन्य लोगों से निवेश करवाने के लिए कथित तौर पर सरकारी रजिस्ट्रेशन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और उन्हें असली बताकर पेश किया गया।
पुलिस के मुताबिक, निवेशकों को धोखा देने से पहले आरोपियों ने कथित तौर पर चेक पेमेंट, कैश, विदेशी मुद्रा और महंगी घड़ियों के जरिए लगभग 16.24 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे। इस धोखाधड़ी का पता चलने पर हबीबा खार पुलिस के पास गईं, जिसके बाद मई में एफआईआर दर्ज की गई। बाद में जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
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