भारत कभी तालिबानी देश नहीं बन सकता- बोले जावेद अख़्तर, RSS और विश्व हिंदू परिषद का भी लिया नाम

जावेद अख्तर ने तालिबान का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कभी भी तालिबानी देश नहीं बन सकता है। उन्होंने आरएसएस व वीएचपी का भी जिक्र किया।

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गीतकार जावेद अख्तर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

तालिबान का मुद्दा देश में तूल पकड़ता जा रहा है। चंद दिनों पहले बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो शेयर कर तालिबान का समर्थन करने वाले भारतीय मुस्लिमों पर नाराजगी जाहिर की थी। नसीरुद्दीन शाह के बाद अब मशहूर लेखक जावेद अख्तर का भी तालिबान पर बयान आया है। एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में जावेद अख्तर ने कहा कि भारत कभी भी तालिबान नहीं बन सकता है। साथ ही उन्होंने तालिबान का समर्थन करने वालों की तुलना आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल के समर्थकों से भी की।

जावेद अख्तर ने तालिबान के सिलसिले में इंटरव्यू में कहा, “भारत कभी भी तालिबानी देश नहीं बन सकता है। अफगानिस्तान में तालिबान ने जिस तरह से सत्ता संभाली है, वह पूरी तरह से रचा हुआ लगता है। जब वहां पर भारी मात्रा में सेना थी तो कार और ट्रकों में मौजूद भीड़ आसानी से शहरों पर कब्जा कैसे कर सकती है। अमेरिका, उनकी कठपुतली सरकार व तालिबान के बीच जरूर कुछ हुआ है।”

तालिबान का समर्थन करने वाले भारतीय मुसलमानों पर जावेद अख्तर ने कहा, “वे लोग तो बस मुट्ठी भर हैं, तो बोलने दीजिए जो वह बोलना चाहते हैं। वह कुछ हासिल नहीं कर पाएंगे। पूरी दुनिया में मौजूद दक्षिणपंथी लोग ऐसा ही चाहते हैं। जैसे तालिबान एक इस्लामिक राज्य चाहता है, यहां कुछ लोग हैं जो हिंदू राष्ट्र चाहते हैं। ये सभी एक ही मानसिकता के होते हैं, चाहे ये मुस्लिम हों, ईसाई हो या हिंदू हो।”

जावेद अख्तर ने इंटरव्यू में आरएसएस, बजरंग दल व वीएचपी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “बेशक तालिबान कट्टर है और उनके काम भी निंदा योग्य हैं। लेकिन जो आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करते हैं। वह भी तो वही काम करते हैं। हमारा देश एक पंथनिरपेक्ष देश है। तालिबान का विचार किसी भी भारतीय को आकर्षित नहीं कर सकता है।”

आरएसएस व वीएचपी के बारे में बात करते हुए जावेद अख्तर ने आगे कहा, “भारत की बड़ी आबादी पंथ निरपेक्ष है। लेकिन देश में आरएसएस, वीएचपी और गोलवाल्कर जैसे कुछ संगठन व लोग ऐसे हैं, जिनकी विचारधारा 1930 के नाजियों की विचारधारा जैसी ही है। हथियारों के साथ तालिबान अधिक सशक्त लग रहा है, लेकिन दृष्टिकोण और विचारधारा तो एक-दूसरे का प्रतिबिंग ही दर्शाती हैं।”

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