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अपनों की सेहत को लेकर चिंतित बॉलीवुड

कलाकारों की एसोसिएशन का कहना है कि शूटिंग के दौरान उसके सदस्यों को कैमरे के सामने बिना मुखपट्टी (मास्क) लगाए काम करना होता है, जिसके कारण उनके संक्रमित होने के मौके अपने आप बढ़ जाते हैं। सदस्यों को हवाई या सड़क यात्रा करते हुए लगातार एक से दूसरी जगह पर जाना पड़ता है, जो इन दिनों कम जोखिम भरा नहीं है।

भारत की फिल्म इंडस्ट्री में हजारों लोग लगे हैं। यहां सर्वाधिक मुवी बनती है। ऐसे में कोरोना काल में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।

कोरोना महामारी से फिल्मजगत की गतिविधियों पर रोक लगने के बाद अब बॉलीवुड खुद को संभालने में जुट गया है। जहां एक ओर फिल्म कलाकारों की संस्था, सिंटा, अपने सदस्यों के स्वास्थ्य और सुरक्षा लेकर आगे आई है, वहीं फिल्म निर्माताओं के संगठन, इंपा, ने भी सरकार से अपने सदस्यों के टीकाकरण की विशेष व्यवस्था करने की अपील की है। देश में जहां इस समय में लोग मुखपट्टी (मास्क) लगाकर और सुरक्षित अंतर का पालन करते हुए काम कर रहे हैं, सिनेमा और धारावाहिकों की दुनिया में कैमरे के सामने यह काम कलाकारों को बिना इन सावधानियों के करना पड़ रहा है जिससे कलाकारों के कोरोना संक्रमित होने के मौके बढ़ रहे हैं।

कोरोना महामारी के फैलाव ने फिल्मजगत के सामने समस्याओं का अंबार लगाते हुए तीन क्षेत्रों-निर्माण, वितरण और प्रदर्शन- पर बुरा असर डाला है। महाराष्ट्र में सिनेमाघर और शूटिंग बंद होने के बाद जो निर्माता फिल्मों और धारावाहिकों की शूटिंग प्रदेश से बाहर जाकर कर रहे थे, उनके सामने भी कम समस्याएं नहीं हैं। स्थानीय स्तर पर उन्हें एक ओर विरोध का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी ओर कोरोना नियमों का पालन से करने से उनका बजट बढ़ने लगा है। अब सिंटा (सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट एसोसिएशन) ने शूटिंग के दौरान अपने सदस्य कलाकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है। सिंटा ने पूछा है कि अगर किसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उसके सदस्य संक्रमित होते हैं या उनकी मौत होती है तो उनके इलाज या हर्जाने का खर्च कौन उठाएगा? सिंटा चाहती है कि यह जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

कलाकारों की एसोसिएशन का कहना है कि शूटिंग के दौरान उसके सदस्यों को कैमरे के सामने बिना मुखपट्टी (मास्क) लगाए काम करना होता है, जिसके कारण उनके संक्रमित होने के मौके अपने आप बढ़ जाते हैं। सदस्यों को हवाई या सड़क यात्रा करते हुए लगातार एक से दूसरी जगह पर जाना पड़ता है, जो इन दिनों कम जोखिम भरा नहीं है। आर्थिक तौर पर संपन्न कलाकार तो संक्रमित होने पर अपने इलाज का खर्च वहन कर सकते हैं, मगर तकनीशियनों, जूनियर आर्टिस्टों और छोटी भूमिकाओं में एक दो-दिन की शूटिंग करने वाले कलाकारों के लिए अपने इलाज का खर्च वहन करना आसान नहीं है।

देखने में यह भी आ रहा है कि कोरोना के भय से कई कलाकार शूटिंग करने से इनकार कर रहे हैं और निर्माता उनकी जगह तुरत फुरत दूसरे कलाकार को ले रहे हैं। सिंटा का कहना है कि ऐसी स्थिति में हटाए गए कलाकार को क्षतिपूर्ति राशि मिलनी चाहिए। हालांकि निर्माता कोरोना नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित जैविक वातावरण (बायो बबल) में शूटिंग कर रहे हैं। मगर बायो बबल के बावजूद क्रिकेट खिलाड़ियों के संक्रमित होने और आइपीएल स्थगित होने के बाद सिंटा को अपने सदस्यों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता सता रही है।

दूसरी ओर फिल्म निर्माताओं के संगठन इंपा ( इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूर्स एसोसिएशन) को भी अपने सदस्यों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता सता रही है। इंपा अध्यक्ष टीपी अग्रवाल का कहना है कि कोरोना महामारी का उसके सदस्यों पर बुरा असर पड़ा है। छह हजार सदस्यों वाले संगठन इंपा ने अपने कल्याण कोष से बीते साल मई, जून और जुलाई में प्रभावित सदस्यों के बैंक खाते में पैसे भिजवाए हैं। मगर अब उसके सामने मुश्किलें पेश आ रही हैं। इंपा अध्यक्ष अग्रवाल ने मुंबई मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से अपील की है कि इंपा के सदस्यों के टीकाकरण की व्यवस्था की जाए।

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