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हिंदी समेत पांच भाषाओं में रिलीज होंगी कई फिल्में

नब्बे के दशक में हॉलीवुड के स्टूडियो ने अपनी फिल्मों को बड़े पैमाने पर भारतीय भाषाओं में डब करना शुरू किया। कुछेक लाख रुपए डबिंग पर खर्च करने से उन्हें एक नई फिल्म और नया बाजार मिलने लगा। हिंदी, तमिल, तेलुगू, मराठी, भोजपुरी तक में हॉलीवुड फिल्में डब होने लगीं। कारोबार का यही फॉर्मूला अब भारतीय फिल्म निर्माताओं को भी रास आ रहा है। इन दिनों बहुभाषी फिल्में बन रही हैं। हिंदी और तेलुगू में इनकी शूटिंग होती है और उन्हें तमिल, कन्नड़ और मलयालम में डब किया जा रहा है। ऐसी फिल्में 300 से 500 करोड़ के बजट में बनाई जा रही हैं।

करण जौहर पुरी जगन्नाथ के साथ मिलकर ‘लाइगर’ बना रहे हैं। विजय देवरकोंडा और चंकी पांडे की बेटी अनन्या पांडे इसमें काम कर रहे हैं।अभिनेत्री अनन्या पांडेय।

तेलुगू फिल्म स्टार रामचरन तेजा बतौर निर्माता अपनी नई फिल्म पर काम कर रहे हैं। यह पांच भाषाओं में रिलीज की जाएगी और इसमें हीरोइन होंगी आलिया भट्ट। ‘बाहुबली’ के निर्देशक एसएस राजमौली अपनी निर्माणाधीन फिल्म ‘आरआरआर’ को पांच भाषाओं हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज करेंगे। अजय देवगन और आलिया भट्ट पहली बार ‘आरआरआर’ के जरिए दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम कर रहे हंैं। आजकल आलिया भट्ट दक्षिण के निर्माताओं में खूब पसंद की जा रही हैं।

करण जौहर पुरी जगन्नाथ के साथ मिलकर ‘लाइगर’ बना रहे हैं। विजय देवरकोंडा और चंकी पांडे की बेटी अनन्या पांडे इसमें काम कर रहे हैं। यह हिंदी और तेलुगू में बनाई जा रही है और तमिल, मलयालम व कन्नड़ में डब कर रिलीज की जाएगी। टी सीरीज 500 करोड़ की लागत से जिस ‘आदिपुरुष’ का निर्माण कर रही है, वह तेलुगू और हिंदी में एक साथ बनाई जा रही है और तमिल, कन्नड़ और मलयालम में डब करके कुल पांच भाषाओं में रिलीज की जाएगी। टी सीरीज 350 करोड़ की लागत से ‘बाहुबली’ फेम प्रभास को लेकर जिस ‘राधे श्याम’ का निर्माण कर रही है वह भी तेलुगू और हिंदी में एक साथ फिल्माई जा रही है और तमिल, कन्नड़ व मलयालम में डब कर के कुल पांच भाषाओं में रिलीज की जाएगी। संजय लीला भंसाली की 30 जुलाई, 2021 को रिलीज होने जा रही ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ हिंदी के अलावा तेलुगू में भी रिलीज की जाएगी।

इन दिनों बॉलीवुड बहुभाषी फिल्में बनाने का चलन बढ़ रहा है, जिसे नया चलन कहा जा रहा है। जबकि भारतीय फिल्मजगत में यह चलन शुरूआती दौर से ही चला है जब प्रभात और जैमिनी जैसे स्टूडियो अपनी फिल्में दो भाषाओं में रिलीज कर रहे थे। एसएस वासन के जैमिनी स्टूडियो की ‘चंद्रलेखा’ (1944) हिंदी में 1948 में रिलीज हुई जिसके बाद तमिल फिल्मों को हिंदी का बड़ा बाजार मिला।

यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा या नए बाजार तक पहुंचने का तरीका है, जिसे भारतीय निर्माता भूल गए थे और बीते ढाई-तीन दशकों से हॉलीवुड जमकर इस्तेमाल कर रहा है। अब भारतीय फिल्म निर्माता भी इस तरकीब को समझने लगे और गठबंधन कर बहुभाषी फिल्में बनाने में जुट गए हैं। निवेशक इस क्षेत्र के प्रति आकर्षित हैं क्योंकि इस उद्योग की विकास दर ऊंची है।

इसी कारण हॉलीवुड के स्टूडियो गठबंधन कर हिंदी फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं। लायका जैसी कॉरपोरेट कंपनी तमिल, तेलुगू के बाद अब हिंदी फिल्म ‘रामसेतु’ में निवेश कर रही है। रिलायंस एंटरटेनमेंट बड़े पैमाने पर हिंदी और अंग्रेजी के साथ पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ जैसी भारतीय भाषाओं की फिल्मों में निवेश कर रही हैं। वजह साफ है कि अब फिल्में बनाना जुआ नहीं रहा है। कई कंपनियां मिल कर एक फिल्म बना रही है, जिससे जोखिम कम हो गया है और बहुभाषी फिल्में बन रही हैं।

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