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पिता की दुकान पर टायर में हवा भरते थे इरफान खान, अब दुनिया के बेस्ट एक्टर्स में होती है गिनती

इरफान के अभिनय का सफर शुरु होता है दूरदर्शन के धारावाहिक 'चाणक्य' से। उसके बाद 'भारत एक खोज' और 'चंद्रकांता' जैसे धारावाहिकों से इरफान अपनी अभिनय प्रतिभा से लोगों को परिचित करवाते हैं।
Author नई दिल्ली | July 5, 2017 11:17 am
इरफान खान बॉलीवुड और हॉलीवुड के उन सफलतम अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने एक्टिंग वर्ल्ड में अपनी किस्मत खुद लिखी है

उनके बारे में कहा जाता है कि उनकी आंखें भी अभिनय करती हैं। इरफान खान बॉलीवुड और हॉलीवुड के उन सफलतम अभिनेताओं में शामिल हैं जिन्होंने एक्टिंग वर्ल्ड में अपनी किस्मत खुद लिखी है। राजस्थान के जयपुर में 7 जनवरी 1967 को पैदा हुए साहबजादे इरफान खान एक ऐसे शाही घराने से संबंध रखते हैं जिसके पास कहने को तो शाही प्रतिष्ठा थी लेकिन साथ ही पैसों की भी बड़ी तंगी रही। बचपन के दिनों में जयपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर टोंक नाम की जगह पर उनके पिता साहबजादे यासीन अली खान की छोटी सी दुकान पर इरफान टायरों में हवा भरते थे।

हवा को रबर के टायरों में कैद करने वाला यह टीनेजर आसमान छू लेने के सपने देखता था। मूवीज़ में एक्टिंग की तमन्ना रखने वाले इरफान ने कुछ समय बाद अपने पिता की दुकान पर जाना बंद कर दिया। उनका मानना था कि जब जिंदगी कला के रास्ते में आती है तो आपको अपनी कला की तलाश में जिंदगी छोड़ देना चाहिए। बचपन में इरफान क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन परिवार उनके इस फैसले के खिलाफ था। पोस्ट ग्रेजुएशन करते हुए उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ने के लिए स्कॉलरशिप मिली। जब इरफान नें वहां एडमिशन लिया उसके कुछ ही दिनों बाद उनके वालिद का इंतकाल हो गया। स्कॉलरशिप की वजह से पढ़ाई तो नहीं रुकी लेकिन जिंदगी की मुश्किलें थोड़ी और बढ़ गईं। एनएसडी में पढ़ते हुए ही उनकी मुलाकात सुतपा सिकदर से हुई जो बाद में इरफान की जीवनसंगिनी भी बनीं। दोनों पढ़ाई पूरी कर मुंबई आ गए और यहीं से उनके संघर्ष की कहानी शुरु हुई।

इरफान के अभिनय का सफर शुरु होता है दूरदर्शन के धारावाहिक ‘चाणक्य’ से। उसके बाद ‘भारत एक खोज’ और ‘चंद्रकांता’ जैसे धारावाहिकों से इरफान अपनी अभिनय प्रतिभा से लोगों को परिचित करवाते हैं। 1988 में बॉलीवुड फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ से  उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। उनके सफलता की कहानी शुरु होती है 2003 में आई तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘हासिल’ से। इसके बाद आई उनकी फिल्म ‘मकबूल’ ने उन्हें हिंदी सिनेमा में स्थापित कर दिया। संघर्षों के दिन बीत चुके थे औऱ इरफान बॉलीवुड के सबसे प्रतिभावान और संजीदा अभिनेता के रुप में लोगों के दिलों में बसते जा रहे थे।

‘बिल्लू बारबर’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘दिल्ली 6’, ‘तलवार’, ‘नॉक आउट’, ‘मदारी’, ‘लाइफ ऑफ पाई’, ‘जज्बा’, ‘पीकू’, ‘द लंच बॉक्स’, ‘ये साली जिंदगी’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘जुरासिक वर्ल्ड’ जैसी कई फिल्मों में उनके अभिनय की जमकर तारीफ हुई। इरफान की फिल्म ‘लाइफ ऑफ पाइ’ और ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ ने कई अकादमी पुरस्कार भी जीते। ‘पान सिंह तोमर’ मूवी के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। तीन फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले इरफान को प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है।

 

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