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महाभारत के ‘श्रीकृष्ण’ ने कहा- भारत असहिष्णु देश, हिंदू धर्म की बात करुंगा तो मुझ पर लगा देंगे RSS का लेबल

एक्टर नीतीश भारद्वाज ने कहा, 'अगर मैं हिंदू धर्म की बात करता हूं तो मुझ पर आरएसएस का लेबल लगा दिया जाएगा।'

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इंडियन ऑडियंस में महाभारत फेम भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका में पहचाने जाने वाले एक्टर नीतीश भारद्वाज ने भारत को असहिष्णु देश (intolerant nation) बताया है। इंडियन एक्सप्रेस से एक्सक्लूसिव बातचीत में नीतीश ने अपनी फिल्म ‘मोहनजोदड़ो’ के बारे में बात करते हुए एक सवाल के जवाब में भारत को असहिष्णु देश कहा। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं हिंदू धर्म की बात करता हूं तो मुझ पर आरएसएस का लेबल लगा दिया जाएगा।’

महाभारत में अपने किरदार को लेकर फेमस हुए नीतीश भारद्वाज से जब पूछा गया कि आप अपनी पहचान को नहीं भुना पाए और बहुत कम फिल्में की

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कहना सही नहीं है, कि मैंने अपनी पहचान को इनकैश नहीं किया। यह कहना सही है, ‘मैंने लंदन जाने का फैसला गलत समय पर लिया। नीतीश ने बताया कि उन्होंने माधुरी के साथ नाचे नागीन गली गली नाम की फिल्म की, एक मलयालम फिल्म की, उस समय तक मैं पहचाना जा चुका था। मैं हमेशा जानने की कोशिश करता हूं कि मैने जिंदगी में क्या पाया? उस समय मुझे यूके में थियेटर और रेडियो की अलग दुनिया नजर आई। उस समय भारत एक क्लोस्ड विंडो था, मैं एक ऐसे देश में जाना चाहता जो ओपन हो- खुली सोच, लोकतांत्रिक सोच और सहिष्णु समाज, जो हम आज भी नहीं हैं।

आप कहना चाहते हैं कि भारत आज असहिष्णु है?

इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘इंडिया आज असहिष्णु है। अगर मैं शास्त्रों से एक विचार व्यक्त करता हूं तो मुझे आरएसएस (RSS) का आदमी कहा जाएगा।’ मीडिया और इस देश के लोगों को हर चीज में आरएसएस को लाने की क्या जरुरत है। अगर आप हिंदू धर्म की बात करते हैं तो लोग आपको आरएसएस का आदमी कहेंगे। इस देश में ऐसी पिक्चर बनाई गई है जिसमें दूसरे विचारों और प्वाइंट ऑफ व्यू पर खुली चर्चा नहीं हो सकती है। उदाहरण के तौर पर टीवी पर एनसीआरटी की बुक्स को लेकर बहस होती है। स्कूलों में जो किताबें पढ़ाई जाती हैं वो पिछले 70 सालों में वामपंथियों और प्रो-कांग्रेसी इतिहासकारों ने लिखी है। आपको बच्चों को विभिन्न विचारों से अवगत कराना चाहिए और क्या सही है और क्या गलत है ये उन्हें अपने दिमाग से सोचने देना चाहिए। आपको एक ही तरह के विचारों को उसके गले के नीचे नहीं उतारना चाहिए।

कौन लोग कह सकते हैं RSS का आदमी

उनसे यह सवाल पूछने पर कि वो कौन लोग हैं जो उन पर आरएसएस का आदमी होने का आरोप लगा सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा, ‘मीडिया और समाज में मौजूद तथाकथित उदारवादी और छद्म बुद्धिजीवी।’ गौरतलब है कि देश में असहिष्णुता को लेकर लंबे समय से विवाद और बहस होती आ रही है।

 

 

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