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बॉलीवुड पर भारी पड़ रही हैं प्रादेशिक फिल्में

जब मुंबइया फिल्म निर्माता एक दिन में तीन करोड़ और महीने में 30 करोड़ कमाने वाली ‘रूही’ और इसकी हीरोइन जाह्नवी कपूर की जय जयकार में व्यस्त हैं ...

Bollywoodकोरोना के कारण सिनेमाघर खाली पड़े।

जब मुंबइया फिल्म निर्माता एक दिन में तीन करोड़ और महीने में 30 करोड़ कमाने वाली ‘रूही’ और इसकी हीरोइन जाह्नवी कपूर की जय जयकार में व्यस्त हैं … कंगना रनौत जयललिता पर बनी फिल्म ‘थलैवी’ से बॉलीवुड को बर्बाद होने से बचाने और अपना नाम स्वर्णअक्षरों में लिखवाने का दम भरने के बाद खामोश बैठ गई हैं… जब महाराष्ट्र में 189 थियेटरों की 500 स्क्रीन बंद होने से कसमसाए सुपर सितारे सलमान खान ‘राधे’ को इस ईद के बजाय अगले साल की ईद पर रिलीज करने की बात कर रहे हैं… जब मुंबइया फिल्मों के सारे बड़े सितारे महाराष्ट्र में सिनेमाघर बंद होने के कारण अपनी फिल्मों को रिलीज करने से पीछे हट गए हैं… तेलुगू फिल्म ‘वकील साब’ (जो हिंदी फिल्म ‘पिंक’ की रीमेक है)ने रिलीज के पहले ही दिन 42 करोड़ का धंधा किया है। कोरोना काल में किसी प्रादेशिक फिल्म के लिए यह उल्लेखनीय शुरुआती कारोबार है।

महाराष्ट्र में 500 स्क्रीन (सिनेमा के परदे) यानी 189 सिनेमाघर बंद हैं। मगर देश भर में 6,780 स्क्रीन हैं। मुंबई के किसी स्थापित और बड़े फिल्म निर्माता ने महाराष्ट्र छोड़कर बाकी देश में अपनी फिल्में रिलीज करने की पहल नहीं की है। हां, सीमित प्रभाव के बावजूद यह काम धड़ल्ले से प्रादेशिक फिल्मों के निर्माता कर रहे हैं। इससे पहले तमिल फिल्म ‘मास्टर’ ने पहले दिन 25 करोड़ की ओपनिंग की थी। तेलुगू फिल्म ‘वकील साब’ न सिर्फ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सिनेमाघरों में सफलता के झंडे गाड़ रही है बल्कि न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया में भी कमाई कर रही हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में प्रदर्शित होने वाली हिंदी फिल्मों में 55 करोड़ का एक दिवसीय एकत्रण का रिकॉर्ड सलमान की फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ के नाम है। इस लिहाज से कम स्क्रीनों पर रिलीज ‘वकील साब’ का पहले दिन का एकत्रण चौंकाता है। इसके कारण क्या हैं?

इसके दो कारण हैं। इसी साल अप्रैल की शुरुआत में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने एक निर्णय दिया था कि सिनेमा टिकटों के दाम शुरुआत के तीन दिनों में बढ़ाए जा सकते हैं, जबकि आंध्र प्रदेश की सरकार इसका विरोध कर रही थी। दूसरी वजह है फैन क्लब। ‘वकील साब’ के हीरो हैं पवन कल्याण, जो तेलुगु स्टार चिरंजीवी के छोटे भाई है और जिनकी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अपार लोकप्रियता है। एक अनुमान के मुताबिक पवन कल्याण के 67 फैन क्लब हैं, जो हैदराबाद, पश्चिमी गोदावरी, गुंटुर आदि में फैले हैं। एक फैन क्लब में औसतन 22,000 सदस्य हैं।

किसी फैन क्लब में तो चार हजार से ज्यादा सदस्य भी हैं। ये सदस्य पवन कल्याण की साख मजबूत करने के साथ ही उनकी फिल्मों के प्रमोशन के वक्त भी काम आते हैं। कम-ज्यादा रूप में दक्षिण का हर दूसरा कलाकार ऐसे ही फैन क्लबों के दम पर सुपर स्टार है। रजनीकांत, कमल हासन से लेकर विजय सभी इन्हीं फैन क्लब के दम पर चल रहे हैं। ‘वकील साब’ को इन फैन क्लबों ने सिर-माथे पर उठा लिया। बिलकुल वैसे ही, जैसे 13 जनवरी को रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘मास्टर’ को इसके हीरो विजय के फैन क्लबों ने उठा लिया था।

बॉलीवुड के सितारे और कॉरपोरेट कंपनियां इस मामले में बहुत पीछे हैं। न तो बॉलीवुड सितारों ने अपने वफादार फैन बनाए और न कॉरपोरेट कंपनियों ने दो दशकों में अपने दम पर कोई बड़ा स्टार खड़ा किया। भाई चिरंजीवी की प्रजा राज्यम की तरह पवन कल्याण 2014 में अपनी राजनैतिक पार्टी ‘जन सेवा पार्टी’ खड़ी कर चुके हैं, जो भाजपा को सपोर्ट करती है। इसलिए पवन कल्याण के प्रभाव का दायरा बहुत विस्तृत है। इसी का फायदा ‘वकील साब’ को मिला।

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