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अर्नब की डिबेट में सुधांशु त्रिवेदी और किसान नेता में हुई जबरदस्त बहस, सुधांशु त्रिवेदी बोले – BKU 2008 की अपनी मांग से पलटी

सुधांशु त्रिवेदी बोले,'क्या 2008 में भारतीय किसान यूनियन ने इसी बात को लेकर आंदोलन नहीं किया था कि हमें मंडी के चंगुल से आजादी दिलाई जाए और हमें बाजार में अपनी फसल बेचने का हक दिया जाए।'

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देश के किसान 25 नवंबर से नए कृषि बिलों के विरोध में सड़कों पर हैं। किसान संगठन के नेता और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया। केंद्र सरकार और किसान नेताओं की आज की बातचीत भी बेनतीजा रही। किसान आंदोलन को लेकर टीवी चैनल्स पर खूब डिबेट हो रही हैं। अर्नब गोस्वामी के डिबेट शो ‘पूछता है भारत’ में भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी और भाकियू नेता दिगंबर सिंह में जोरदार बहस हो गई।

डिबेट में सुधांशु त्रिवेदी बोले,’ किसान आंदोलन का नेतृत्व एक दौर में सरदार प्रकाश सिंह बादल ने भी किया है, एक दौर में चौधरी देवीलाल जी ने किया है, एक दौर में चौधरी चरण सिंह जी ने किया है, एक दौर में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जी ने किया है। आज क्यों नहीं है कोई चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत, कोई चौधरी चरण सिंह, कोई चौधरी देवी लाल, कोई सरदार प्रकाश सिंह बादल क्यों नजर नहीं आ रहे। ये विचित्र सी स्थिति है कि कोई एक नेता ही नहीं है जो सामने बैठकर बात कर सके, ये अविश्वास किसके प्रति है।’

सुधांशु त्रिवेदी आगे बोले,’मैं पूछना चाहता हूं दिगंबर जी से हम आपकी बात पर विचार करने के लिए तैयार हैं आप कहते हो कानून वापस ले लीजिए। क्या 2008 में भारतीय किसान यूनियन ने इसी बात को लेकर आंदोलन नहीं किया था कि हमें मंडी के चंगुल से आजादी दिलाई जाए और हमें बाजार में अपनी फसल बेचने का हक दिया जाए।’

सुधांशु त्रिवेदी आगे बोले,’आप माफी मांग लीजिए कि 2008 में जो हमने कहा था वो गलत था। हम उसके लिए माफी मांगते हैं अब हमारी बात एकदम बदल गई। अर्नब अब समस्या हो गई है कि राजनीतिक दलों को तो बयान बदलते हुए देखा है परंतु अब पहली बार ऐसा होने लगा है गैर राजनीतिक क्षेत्र के लोग साल पहले कुछ और अब कुछ और।’

इस पर सुधांशु त्रिवेदी को जवाब देते हुए दिगंबर सिंह बोले,’2008 की आपने बात की, देखिए ये देश कानून से चलता है और जब जबरन बॉर्डर पर किसान को फसल बेचने से रोका जाता था वही भारतीय किसान यूनियन की डिमांड कल भी थी और आज भी है। क्या उसका मंडी से बाहर धान कल नहीं बिकता था आज ही बेचने के लिए आप कानून लाए हो। दूसरी बात कोरोना काल में यही अन्नदाता था, यही किसान था और, यही भारतीय किसान यूनियन के सदस्य थे जिन्होंने मजदूरों को खाना खिलाया।’

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