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लाइव डिबेट में संबित पात्रा ने उठाया पीएम किसान योजना का मुद्दा तो बोले टीएमसी नेता- चाय बेचने वाला देश बेचने लगा

टीएमसी नेता शांतनु सेन बोले,'संबित पात्रा जिस पार्टी से जुड़े हुए हैं उस पार्टी से दुर्भाग्य से एक चाय बेचने वाला अभी देश को बेचने में लगा हुआ है।

sambit patra, aajtak debate, tmcआजतक डिबेट में संबित पात्रा और टीएमसी नेता में हुई जोरदार बहस

इस साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के नेता एक के बाद एक पार्टी छोड़ रहे हैं। कुछ दिन पहले टीएमसी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा का दामन थाम लिया। बंगाल को लेकर टीवी चैनल्स पर खूब डिबेट भी हो रही हैं। आज तक के डिबेट शो हल्ला बोल में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और टीएमसी नेता में जबरदस्त बहस हो गई।

डिबेट में संबित पात्रा डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीम का मुद्दा उठाते हुए बोले,’बंगाल के अंदर 70 लाख किसान हैं, जब 25 दिसंबर को हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 18 हजार करोड़ रुपए एक बटन दबाकर के 9 करोड़ किसानों के घर भेजा, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से। उससे बंगाल के 70 लाख किसानों को वंचित क्यों रखा गया ?’

इसके बाद एंकर अंजना ओम कश्यप टीएमसी के सांसद शांतनु सेन से बोलीं,’भाजपा की खिचड़ी बनाने की तैयारी है पूरी, किसानों के घर जाने का इनका दावा है। जहां से कह रहे हैं कि एक-एक मुट्ठी चावल लेंगे फिर खिचड़ी बनाकर गरीब लोगों को खिलाएंगे। सवाल तो यह है कि आपकी खिचड़ी का स्वाद तो बिगड़ रहा है दूसरी तरफ जो-जो नेता छोड़कर जाता है दो-चार बात सुनाकर जाता है।’

इस पर टीएमसी नेता शांतनु सेन बोले,’संबित पात्रा जिस पार्टी से जुड़े हुए हैं उस पार्टी से दुर्भाग्य से एक चाय बेचने वाला अभी देश को बेचने में लगा हुआ है। उनके प्रतिनिधि से तो ऐसे ही बातें सुनने को मिलेंगीं। जिस एक मुट्ठी चावल के लिए जेपी नड्डा साहब बंगाल में आ रहे हैं, उस एक मुट्ठी चावल से उनका अपना खाना भी पकता है और खाना पकाने वाला किसान दिल्ली में मर रहा है। पूरे देश में अगर किसानों का हाल अच्छा हुआ होता तो ऐसा नहीं हुआ होता। वहां पर 45 से ज्यादा किसान मर चुके हैं वहां पर किसान लोग मर रहे हैं और यह लोग लगे हैं पॉलिटिक्स करने में।’

इसके बाद संबित पात्रा बोले,’देखिए अंजना जी, ममता जी का अब टीआरपी नहीं रह गया। ममता जी का टीटीटी हो गया है मतलब तोलाबाजी, तुष्टीकरण और तानाशाही और ये टीटीटी के माध्यम से जीतने वाले नहीं हैं।’

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