डिग्री कटोरे में रखकर भीख मांगो- बेरोजगारी का आंकड़ा साझा कर बोले पूर्व IAS तो मिलने लगे ऐसे जवाब

पूर्व आईएएस ने सीएमआईई के आंकड़ों को साझा करते हुए बेरोजगारी को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि अब कटोरा लेकर भीख मांगो।

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पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

कोरोना वायरस के बीच इस साल अगस्त में करीब 15 लाख से अधिक लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है, जिसमें फॉर्मल व इन्फॉर्मल दोनों सेक्टर्स के लोग शामिल हैं। बिजनेस इंफॉर्मेशन कंपनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक काम करने वालों की संख्या 399.38 मिलियन से गिरकर अगस्त में 397.78 मिलयिन रह गई है। इस मामले को लेकर पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह भी भड़के नजर आए। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि एमए, बीए की डिग्री कटोरे में रखकर भीख मांगो।

पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह का बेरोजगारी को लेकर किया गया ट्वीट सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “एमए, बीए की डिग्री कटोरे में रखकर भीख मांगो। जुलाई अगस्त 2021 के बीच बेरोजगारी दर 6.95 प्रतिशत से बढ़कर 8.32 प्रतिशत हो गई। अर्थात एक माह में 15 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।”

पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने ट्वीट कर आगे लिखा, “सौजन्य: सीएमआईई के ताजा आंकड़े। दो रुपल्ली फिर भी खुश।” सूर्य प्रताप सिंह के इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया यूजर ने भी खूब कमेंट किये। एक यूजर ने ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “खूब ढिंढोरा पीटा जा रहा है कि निर्यात बढ़ा है। लेकिन यह नहीं बताया जा हा है कि आयात भी बढ़ा है। पिछले साल जो व्यापार 9.12 अरब डॉलर था, वो इस साल 30.75 अरब डॉलर पहुंच गया।”

आशुतोष यादव नाम के यूजर ने पूर्व आईएएस की बातों से सहमति जाहिर करते हुए लिखा, “नौकरी आम जनता की गई है। सरकार में बैठे लोग या उनके परिवार के लोग थोड़ी न नौकरी करते हैं, जो उनको पता चलेगा। जो नौकरी करता है, उसको पता होता है।” एक यूजर ने ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “सर एमए, बीए तो छोड़िये अब, एमबीए का भी कुछ मूल्य बचा है क्या?”

बता दें कि पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह के ट्वीट पर आए कमेंट यहीं नहीं रुके। आरके दोहरे नाम के यूजर ने लिखा, “कहां गया हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा। देश का युवा खुद को ठगा महसूस कर रहा है। बीजेपी का नारा अब हर साल दो करोड़ बेरोजगार हो गया है।” अमित यादव ने लिखा, “जो बोया है, वही काटना पड़ेगा। लोगों ने 2014 में जो बोया था, उसका परिणाम उन्हें बेरोजगारी के रूप में मिल रहा है।”

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