इंस्टाग्राम खोलते ही, फीड को स्क्रॉल करते वक्त अचानक से एक वीडियो दिखाई देता है। वो वर्टिकल वीडियो है, आपकी पूरी फोन की स्रीन उसने घेर ली है। ब्राइटनेस जबरदस्त है, क्वालिटी बेहतरीन है और एक क्लिक करते ही आप प्ले स्टोर पर किसी ऐप पर पहुंच जाते हैं। आप वो ऐप डाउनलोड करते हैं, उस वीडियो के कई छोटे-छोटे हिस्से देखते हैं और फिर मैसेज आता है- आगे देखने के लिए सब्सक्राइब करें। अगर ये सबकुछ आपके साथ भी हुआ है, मानकर चलिए आप एक माइक्रो ड्रामा देख रहे थे।
पिछले कुछ महीनों में इंस्टाग्राम पर हजारों ऐसे माइक्रो ड्रामा देखने को मिल रहे हैं। ये छोटे-छोटे 50 सेकेंड वाले एपिसोड हैं, ड्रामा ऐसा कि चाहकर भी आप स्किप ना कर पाएं। इन माइक्रो ड्रामा की असल उपज चीन से हुई है।
चीन का “दुआनजू” जिसने दुनिया को बनाया दीवाना
चीन में इन माइक्रो ड्रामा को “दुआनजू” कहा जाता है। साल 2018 में पहली बार इस फॉर्मेट की शुरुआत चीन में हुई थी। जब दुनिया के बाकी देश टिकटॉक पर डांस वीडियो और रील बनाने में व्यस्त थे, तब चीन के कंटेंट क्रिएटर एक बड़ा प्रयोग कर रहे थे। यह प्रयोग था वर्टिकल वीडियो के जरिए छोटे-छोटे एपिसोड बनाकर पूरी मिनी सीरीज तैयार करने का।
इन कहानियों में रोमांस था, जबरदस्त ड्रामा था, चौंकाने वाले ट्विस्ट थे और ऐसे इमोशंस थे जो दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखते थे। कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ यह प्रयोग धीरे-धीरे एक बड़े उद्योग में बदल गया। कुछ माइक्रो ड्रामा तो ऐसे बने जो टिकटॉक पर आते ही वायरल हो गए। ReelShort नाम की एक ऐप को अमेरिका के एप्पल ऐप स्टोर पर 3.8 करोड़ बार डाउनलोड किया गया। हैरानी की बात यह है कि एक समय इसका डाउनलोड आंकड़ा नेटफ्लिक्स से भी ज्यादा था। आज चीन की लगभग आधी आबादी और दुनिया की करीब 10 प्रतिशत आबादी माइक्रो ड्रामा देख चुकी है।
हॉलीवुड जिस कन्सेप्ट से डर गया
चीन के इस माइक्रो ड्रामा प्रयोग ने अब हॉलीवुड को भी चुनौती देना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि Fox Entertainment जैसा बड़ा प्रोडक्शन हाउस अगले दो वर्षों में 200 से अधिक माइक्रो ड्रामा सीरीज बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
पूरी दुनिया में माइक्रो ड्रामा के सफल होने की एक बड़ी वजह इनकी कम लागत भी है। एक माइक्रो ड्रामा सीरीज आमतौर पर 1 लाख डॉलर से 3 लाख डॉलर के बीच तैयार हो जाती है। इसकी तुलना नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय सीरीज “स्ट्रेंजर थिंग्स” से की जा सकती है, जिसके अंतिम सीजन के एक एपिसोड पर ही लगभग 6 करोड़ डॉलर तक खर्च किए गए थे। वहीं, कई माइक्रो ड्रामा एक लाख डॉलर के आसपास के बजट में तैयार हो जाते हैं।
इनका बिजनेस मॉडल भी काफी सरल है। शुरुआती कुछ एपिसोड दर्शकों को मुफ्त में दिखाए जाते हैं, लेकिन आगे की कहानी देखने के लिए भुगतान करना पड़ता है।
चीन को ये आइडिया कैसे आया?
चीन के क्रिएटरों को माइक्रो ड्रामा का विचार कैसे आया, इसकी कहानी भी दिलचस्प है। चीन में वेब नॉवेल यानी ऑनलाइन उपन्यासों का बाजार बेहद बड़ा है। इनमें अक्सर कुछ तयशुदा विषय बार-बार दिखाई देते हैं, जैसे अमीर सीईओ की कहानी, अफेयर्स की कहानी या बदले की कहानी। भले ही विषय एक जैसे हों, लेकिन लोग इन्हें बड़े उत्साह से पढ़ते हैं।
माइक्रो ड्रामा बनाने वाली कंपनियां इन्हीं वेब नॉवेल्स पर लोगों की प्रतिक्रिया का अध्ययन करती हैं। पाठकों के फीडबैक के आधार पर कहानियों की रैंकिंग की जाती है और फिर उन्हीं लोकप्रिय कहानियों को फिल्म, माइक्रो ड्रामा और वीडियो गेम के रूप में तैयार किया जाता है।
एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि चीन में पैदा हुआ यह माइक्रो ड्रामा अमेरिका में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि इसकी मुख्य दर्शक महिलाएं हैं। इन माइक्रो ड्रामा में रोमांस, रिश्तों और भावनात्मक कहानियों की भरमार होती है जो महिला दर्शकों को सीधे आकर्षित करती हैं।
चीन अब माइक्रो ड्रामा के क्षेत्र में इतना आगे बढ़ चुका है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा रहा है। COL Group नाम की चीनी कंपनी का FlareFlow नाम से एक ऐप है जिसके दुनिया भर में लगभग 3.3 करोड़ उपयोगकर्ता हैं। कंपनी की योजना है कि चीन में रिलीज होने वाले माइक्रो ड्रामा में करीब 75 प्रतिशत मानव कलाकारों की जगह AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाए।
भारत में कैसे हिट साबित हो रहा माइक्रो ड्रामा?
जिस तरह चीन में माइक्रो ड्रामा ने दर्शकों को अपना दीवाना बनाया है, उसी तरह पिछले कुछ सालों में भारत में भी यह बाजार तेजी से बढ़ा है। Lumikai की “State of India Interactive Media Report” के मुताबिक, सिर्फ एक साल के भीतर भारत में माइक्रो ड्रामा का बाजार 2,500 करोड़ से 2,800 करोड़ रुपये के बीच पहुंच चुका है।
BDO India की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में लोग पहले से ही माइक्रो ड्रामा जैसा कंटेंट देख रहे हैं। वर्तमान में देश में इंस्टाग्राम रील्स देखने वालों की संख्या 40 करोड़ से अधिक है। वहीं, यूट्यूब शॉर्ट्स पर रोजाना अरबों व्यूज आते हैं। अगर बाकी शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म को भी जोड़ लिया जाए तो करीब 15 करोड़ लोग रोज ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं।
यही वजह है कि भारत में ऐसा कंटेंट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जो छोटा हो, तेज गति वाला हो और मोबाइल फोन पर आसानी से देखा जा सके। इसी कारण चीन में जन्मा माइक्रो ड्रामा भारत में भी सफल साबित हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रो ड्रामा भारत में इसलिए भी सफल हो सकते हैं क्योंकि कई ओटीटी प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन महंगे हैं। इसके मुकाबले माइक्रो ड्रामा कम कीमत में ज्यादा मनोरंजन उपलब्ध कराते हैं।
माइक्रो ड्रामा के कितने बिजनेस मॉडल?
वर्तमान में भारत में माइक्रो ड्रामा के चार प्रमुख बिजनेस मॉडल देखने को मिल रहे हैं। पहला है एडवरटाइजिंग मॉडल जिसमें दर्शक मुफ्त में कंटेंट देखते हैं और बीच-बीच में विज्ञापन दिखाए जाते हैं। दूसरा है सब्सक्रिप्शन मॉडल जिसमें मासिक या वार्षिक सदस्यता लेनी पड़ती है। तीसरा है फ्रीमियम मॉडल जिसमें कुछ कंटेंट मुफ्त और बाकी प्रीमियम होता है। चौथा है पे-पर-एपिसोड मॉडल जिसमें आगे की कहानी देखने के लिए हर एपिसोड पर भुगतान करना पड़ता है।
जानकारों का मानना है कि माइक्रो ड्रामा की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसकी “हुक डेंसिटी” है। हुक डेंसिटी का मतलब है कि हर कुछ सेकंड में दर्शक को ऐसा कुछ दिखाया जाए जिससे उसकी दिलचस्पी बनी रहे। यह कोई बड़ा खुलासा हो सकता है, रोमांटिक मोड़ हो सकता है, सस्पेंस हो सकता है या कोई भावनात्मक दृश्य हो सकता है।
मनोरंजन की नई कहानी लिखता माइक्रो ड्रामा
यही वजह है कि माइक्रो ड्रामा पारंपरिक फिल्मों और वेब सीरीज से अलग तरीके से काम करते हैं। भारत में इस समय Disney+ Hotstar पर “Tadka” जैसे माइक्रो ड्रामा फॉर्मेट के प्रयोग किए जा रहे हैं। वहीं, Kuku FM और कई अन्य प्लेटफॉर्म भी इसी तरह की स्टोरीटेलिंग पर काम कर रहे हैं।
ऐसे में कहा जा सकता है कि चाहे बात पूरी दुनिया की हो या भारत की, माइक्रो ड्रामा ने मनोरंजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। अगली बार अगर आपके इंस्टाग्राम या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर अचानक कोई बेहद छोटा लेकिन दिलचस्प एपिसोड दिखाई दे तो याद रखिए कि वह सिर्फ एक वीडियो नहीं है बल्कि अरबों रुपये का एक ऐसा कारोबार है जो मनोरंजन का तरीका हमेशा के लिए बदल रहा है।
