‘रिमझिम गिरे सावन…’ हो या ‘बरसात के मौसम में…’- फिल्मों में दिखाई जाने वाली बारिश पूरे सीन का मूड ही बदल देती है। बारिश में फिल्माया गया रोमांटिक गाना दिल को छू जाता है, वहीं बारिश के बीच शूट किया गया एक्शन सीक्वेंस भी गहरा असर छोड़ता है।

कभी आपने सोचा है कि अगर सीन में बारिश दिखानी हो लेकिन आसमान साफ हो तो क्या किया जाता है? या फिर फिल्ममेकर्स असली बारिश को कैमरे में कैसे कैप्चर करते हैं? हम अक्सर ‘फेक रेन’ के बारे में सुनते हैं, लेकिन इसे शूट कैसे किया जाता है, यह काफी दिलचस्प है।

कैसे बनाई जाती है फेक रेन

जहां शूटिंग होती है, वहां सेट के ऊपर बड़े पाइप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए जाते हैं, जिन्हें रेन-रिग कहा जाता है। इनमें छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिनसे हाई-प्रेशर पंप के जरिए पानी छोड़ा जाता है। तेज दबाव के कारण पानी ऊपर से गिरकर बारिश जैसा प्रभाव देता है।

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असल बारिश कैमरे में कई बार उतनी प्रभावी नहीं दिखती, इसलिए फिल्ममेकर्स अक्सर आर्टिफिशियल बारिश को प्राथमिकता देते हैं। इसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि बूंदें थोड़ी बड़ी और स्पष्ट दिखें, ताकि स्क्रीन पर बारिश का असर बेहतर नजर आए।

बारिश को और ज्यादा विजुअली अपीलिंग बनाने के लिए बैक लाइट का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पानी की बूंदें चमकदार और सिल्वर जैसी दिखाई देती हैं।

इसके अलावा, जरूरत के हिसाब से बारिश की इंटेंसिटी भी कंट्रोल की जाती है- हल्की फुहार, मीडियम बारिश या फिर तेज तूफानी बारिश, सब कुछ मशीनों के जरिए सेट किया जा सकता है।

कई बार पानी में थोड़ा ग्लिसरीन भी मिलाया जाता है, ताकि बूंदें कैमरे पर ज्यादा देर तक टिकी रहें और चेहरे या कपड़ों पर बेहतर तरीके से दिखाई दें।

एक्टर्स को वॉटरप्रूफ मेकअप लगाया जाता है जिससे वो बारिश में भी खूबसूरत और व्यवस्थित दिखे।

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