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हमारी याद आएगीः जब हीरोइन के हाथ में हंटर आया

हिंदी सिनेमा का इतिहास बिना पारसियों के उल्लेख के पूरा नहीं हो सकता। 1931 में बनी पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ पारसी आर्देशीर इरानी ने बनाई थी। इन्हीं के समकालीन थे दो भाई होमी वाडिया और जेबीएच वाडिया। आज होमी वाडिया की 109वीं जयंती है।

होमी वाडिया (22 मई, 1911-10 दिसंबर, 2004)।

होमी वाडिया के पुरखे युद्धपोत से लेकर व्यापारी जहाज बनाते थे। युद्धपोत ईस्ट इंडिया कंपनी युद्ध में इस्तेमाल करती थी और व्यापारी जहाज चीन से रुई, चाय और अफीम के कारोबार में इस्तेमाल होते थे। होमी ने जब फिल्मों में अपने भाई के साथ काम करने की बात की, तो परिवार में खूब विरोध हुआ। बाद में पारसी आर्देशीर ईरानी की ‘आलमआरा’ को सफलता मिली तो परिवार ने भी दोनों बेटों के निर्णय को स्वीकार कर लिया। तब दौर स्टंट फिल्मों का था। होमी ने कुछ अलग तरह से स्टंट फिल्में बनाना तय किया। अलग क्या हो, होमी इसी उधेड़बुन में थे। लैब असिस्टेंट होमी 1931 में दो हजार में ‘दिलेर डाकू’ बना, तीन हजार में बेच चुके थे। इसी बीच 1935 में उनकी मुलाकात हुई नाडिया यानी मेरी इवांस से। आस्ट्रेलिया में पैदा हुई नाडिया जिमनास्ट थीं। उन्होंने एक रूसी महिला से कई तरह के डांस सीखे थे। सर्कस में काम किया। गायिका थीं, अभिनेत्री थीं और बेहतरीन घुड़सवार भी। नाडिया के रूप में होमी को अपना अलग करने का सपना सच होता नजर आया।

होमी ने नाडिया को लेकर 1935 में बनाई ‘हंटरवाली’। दौर स्टंट फिल्मों में मास्टर विट्ठल, भगवान जैसे पहलवानों का था। उन्होंने नाडिया को महिला पहलवान के रूप में पेश किया। पैंट-शर्ट पहनाई। मुंह पर मास्क लगाया। हास्य पैदा करने के लिए पंजाब का बेटा नाम घोड़े की सवारी करवाई और साथ में एक कुत्ता गनबोट भी लगाया। होमी ने हीरोइन के हाथ में एक हंटर भी दे दिया। पूरी फिल्म में नाडिया ने खलनायक के गुर्गों को पहलवान की तरह सिर से ऊपर उठा कर फेंका। हंटर से उनकी पिटाई की। और जब भी वह ऐसा करतीं दर्शक तालियां बजाते थे। तो हुआ यह कि जिस ‘हंटरवाली’ को उनका वितरक उठाने के लिए तैयार नहीं था, उसने लागत से पांच गुना ज्यादा कमाई की।

इसके बाद वाडिया ने अपनी फिल्मों में नाडिया को एक स्टंट क्वीन के रूप में पेश किया। उन्होंने ज्यादातर फिल्मों में ट्रेन सीक्वेंस रखीं। उन दिनों लोगों के लिए परदे पर ट्रेन देखना ही एक रोमांचक अनुभव था। इस अनुभव को होमी ने चलती ट्रेन पर नाडिया के दौड़ने, लड़ने और छलांग लगा कर कूदने के दृश्यों के जरिए और रोमांचक बनाया। लिहाजा ‘मिस फ्रंटियर मेल’, ‘पंजाब मेल’, ‘डायमंड क्वीन’, ‘बंबई वाली’ जैसी फिल्मों से नाडिया स्टंट क्वीन बन गई। सभी सीन वह खुद करती थीं और लोग रोमांचित होते थे। नाडिया का हंटर हिट हो गया। उस दौर की किसी भी हीरोइन में यह खूब नहीं थी। लिहाजा होमी ने खूब कमाई की।

फिर हुआ यह कि होमी और नाडिया के बीच प्रेम पनपने लगा। दोनों ने शादी करना तय किया तो होमी की मां धुनमई ने सख्त विरोध किया। वजह यह थी कि उनके बड़े बेटे ने पारसी समुदाय से अलग एक गुजराती से शादी की थी। अब छोटा बेटा भी परंपरा तोड़ रहा था। होमी ने मां की भावनाओं का आदर करते हुए शादी स्थगित कर दी। आखिर मां के निधन के बाद 1961 में 50 साल के होमी ने 53 साल की नाडिया से शादी की। दोनों ने साथ में 1968 में ‘खिलाड़ी’ नामक फिल्म की। इसके बाद नाडिया ने फिल्मों को अलविदा कह दिया। 2004 में होमी का निधन हो गया, मगर वह हिंदी फिल्मों में हीरोइन को सशक्त रूप से पेश करने के लिए जाने गए।

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