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इस गाने से डर गई थी भारत में अंग्रेजी हुकूमत, फिल्म जारी होने के छह साल पहले ही लगा दिया था बैन

साल 1950 में एक से एक फिल्मों का अगमन हुआ। लेकिन इसी साल एक ऐसी फिल्म आई जिसके गाने से अंग्रेजों को उनकी सत्ता छिन जाने का डर था। इसके चलते अंग्रेजों ने इस गाने को फिल्म बनने से करीब 6 साल पहले ही बैन कर दिया था।

“देश भक्ति गीत कदम कदम बढ़ाएजा” (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)

हिंदी सिनेमा में कई फिल्में ऐसी हैं जो सदाबहार हैं और साथ ही गाने भी। हिंदी सिनेमा के गानों में अगर प्यार-मुहब्बत है, तो विरोध के स्वर भी हैं। वहीं इन गानों में प्रेरणा, देश भक्ति की भावना और प्रोत्साहन देने की शक्ति भी है। ऐसा ही एक गाना था जिसने अंग्रेजी हुकूमत को भी थर्रा दिया था। यह गाना अंग्रेजों ने बैन कर दिया था। जिस फिल्म ‘समाधि’ में यह गाना था, वह अंग्रेजों के जाने के बाद 1950 में रिलीज हुई। यहा  गाना था – कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा….।

यह गीत सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज का मार्च सॉन्ग था। उनकी फौज बड़े जोश और जुनून के साथ यह गीत गाया करती थी। इसके चलते उस वक्त युवाओं में इस गाने को सुनने के बाद देश के प्रति भक्ति की भावना और कुछ कर गुजरने का जोश पैदा होता था। यह गीत अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ था, इसलिए अंग्रेजों को जब इस गाने के बारे में पता चला तो उन्होंने इसे बैन कर दिया। इस गाने पर बैन तब हटा, जब देश को आजादी मिली। बता दें, इस गाने को राम सिंह ठाकुर ने कंपोज किया था और पंडित वंशीधर ने लिखा था। वहीं, फिल्म में इस गाने का मुखड़ा और गाने का टोन इस्तेमाल किया गया। इसके लिए म्यूजिक डायरेक्टर सीराम चंद्र साहब ने गाने के नए अंतरे कंपोज किए। बाकी गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखा। आज भी हमारे देश की आर्मी  मार्च के दौरान इस गीत के धुन को बजाती है।

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