उन्हें हाउस वाइफ चाहिए थी- जब हेमा मालिनी ने किया था खुलासा; शादी को लेकर ये थी संजीव कुमार की डिमांड

उस वक्त हेमा मालिनी भी संजीव कुमार से शादी के लिए राजी थीं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती ने संजीव कुमार को हेमा का हाथ देने से इनकार कर दिया।

एक वक्त था जब संजीव कुमार और हेमा मालिनी एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। बात शादी तक पहुंच गई थी। ऐसा भी हुआ था जब रिश्ता लेकर संजीव कुमार हेमा मालिनी के घर जा पहुंचे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस वक्त हेमा मालिनी भी संजीव कुमार से शादी के लिए राजी थीं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसके बाद हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती ने संजीव कुमार को हेमा का हाथ देने से इनकार कर दिया।

असल में संजीव कुमार के परिवार को एक ऐसी बहू की तलाश थी जो घर गृहस्ती में अपना पूरा ध्यान दे सके। 1991 में भावना सौम्या को दिए इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने खुद इस बारे में रिवील किया था। हेमा मालिनी ने बताया था कि उन्हें एक होमली वाइफ की तलाश थी। हेमा ने ये भी खुलासा किया था कि वह अभिनय पेशे की महिलाओं को नीची नज़र से देखा करते थे।

हेमा मालिनी ने बताया था- ‘संजीव कुमार एक घर में रहने वाली महिला चाहते थे। जो कि अपने करियर का त्याग बलिदान दे सके और जो घर के काम कर सके। माता पिता की सेवा कर सके और उन्हें सपोर्ट कर सके।’ हेमा ने कहा था- जहां उन्होंने दर्शकों को अपनी अदाकारी और काम से मंत्रमुग्ध कर दिया था और वाहवाही बटोरी थी। वहीं वह पुरुष प्रधान सोच रखते थे।‘ (संजीव कुमार से रिश्ता तुड़वाने के लिए हेमा मालिनी की मां ने धर्मेंद्र से बढ़वाई थीं नजदीकियां, उल्टा पड़ गया था पैंतरा!)

हेमा ने आगे ये भी कहा था कि- ‘लेकिन उन्हें कुछ भी कहने से पहले ये जानना भी जरूरी है कि हम किस युग की बात कर रहे हैं। वो वक्त ऐसा था। पुराने जमाने में, शोबिज का हिस्सा बनने वाली महिलाओं को नीचा दिखाना आम बात थी।’

हेमा ने आगे कहा था- ‘ये एक सबसे बड़ा कारण था कि उन्होंने शादी नहीं की। एक “अच्छी महिला” और “अच्छी पत्नी” उस महिला को कहा जाता था जिसने अपने और अपने करियर के बीच परिवार को चुना हो। एक अच्छी गृहिणी जिसने अपने पति को सफलता के शिखर तक पहुंचने में मदद की हो। जो अपनी सास के बालों में तेल रगड़ती हो।’

हेमा ने आगे कहा था- ‘लेकिन अब समय बदल गया है और महिलाएं अब इस पुरानी सोच से ऊपर उठ चुकी हैं। सच तो यह है कि एक ‘आदर्श महिला’ या फिर ‘आदर्श पुरुष’ एक मिथक है और शायद यही वजह है कि संजीव कुमार अपने जीवनकाल में घर बसा नहीं सके। संजीव एक आदर्श महिला की तलाश कर रहे थे – जो स्पष्ट रूप से मौजूद नहीं थी।’

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