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तारिक फतेह से भिड़ गए जावेद अख़्तर, बोले- मैंने कभी नहीं की जिन्ना की तारीफ, दम है तो धर्मसंसद पर बोलिये

जावेद अख्तर और तारिक फतेह के बीच ट्विटर पर तीखी बहस हुई और दोनों ने एक दूसरे पर तमाम आरोप लगाए।

Javed Akhtar, Farhan Akhtar Shibani Dandekar
गीतकार जावेद अख्तर (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

गीतकार जावेद अख्तर और लेखक तारिक फतेह के बीच ट्विटर पर तीखी नोकझोंक हो गई। शुरुआत फतेह के एक ट्वीट से हुई। जिसमें उन्होंने एक अन्य लेखक-विचारक सानु संक्रान्त को कोट करते हुए लिखा, ”भारत दुनिया की इकलौती ऐसी सभ्यता है, जहां व्यवस्थित तरीके से आपको अपनी संस्कृति और विरासत से घृणा करना और ऐसे लोगों को महिमामंडित करना सिखाया जाता है जो लुटेरे थे…देश को बर्बाद करने आए थे”। तारिक फतेह के इस ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि क्या आप नॉर्थ अमेरिका के हर गोरे को घुसपैठिया कह सकते हैं?

जावेद अख्तर ने आगे लिखा, ‘अकबर तो भारतीय थे लेकिन आपके पिता नहीं, जिन्होंने पलायन कर पाकिस्तान में बसना उचित समझा। सऊदी अरब में 11 साल बिताने वाला आप जैसा व्यक्ति हमें सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ा रहा है… चुप ही रहिये।’ इसका जवाब देते हुए तारिफ फतेह ने लिखा, ”इस्लामिक आक्रमणकारियों और हिंदुस्तान के लुटेरों पर आपके साथ बहस करने के लिए गटर में उतरना पड़ेगा।’

जावेद अख्तर बोले- अब चुप नहीं बैठूंगा: तारिक फतेह के जवाब पर जावेद अख्तर और भड़क गए। उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, ‘तारिक फतेह, मैं तुम्हारे तमाम अनपढ़, जाहिल समर्थकों के हर ट्वीट का जवाब नहीं देने वाला हूं लेकिन तुम्हारे जैसा पाकिस्तान में जन्मा और कनाडा का फेक नागरिक जब भी ट्विटर के जरिए मेरे देश में जहर फैलाने का प्रयास करेगा…भरपूर जवाब दूंगा। अब बस बहुत हो गया।’

इस पर तारिक फतेह ने अपने अगले ट्वीट में पूर्व आईएएस और लेखक संजय दीक्षित का एक वीडियो साझा किया। जिसमें वे जावेद अख्तर को लेकर तमाम बातें कहते और उन पर तमाम आरोप मढ़ते नजर आ रहे हैं। इस ट्वीट पर जावेद अख्तर और बिफर गए। उन्होंने लिखा, ‘मुझे आप पर तरस आती है। आप एक नंबर के झूठे हैं। आपको जब मेरे खिलाफ कुछ नहीं मिला तो ऐसे झूठ फैला रहे हैं…।’

‘कभी जिन्ना की तारीफ में एक शब्द नहीं कहे’: जावेद अख्तर ने अपने अगले ट्वीट में तारिक फतेह को चुनौती देते हुए लिखा, ‘मैंने कभी भी जिन्ना की तारीफ नहीं की और न ही एक शब्द कहे लेकिन मैं चाहता हूं कि आप उन तमाम कथित धर्म संसद पर भी एक लेख लिखें जिसमे खुलेआम मुस्लिमों के नरसंहार के लिए लोगों को उकसाया जाता है। क्या आप लिख पाएंगे? या आर्थिक तौर पर यह आपको सूट नहीं करता है?।’

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