इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर कम बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की खूब चर्चा हो रही है। नीब करौरी बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित इस फिल्म ने बेहद कम बजट में शानदार कमाई कर फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में अब तक 180.95 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। जो एक आम से बजट में बनी फिल्म के लिए बहुत बड़ी बात है।
हालांकि कम बजट में बंपर कमाई की यह कहानी नई नहीं है। कुछ महीने पहले गुजराती फिल्म ‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’ ने भी कुछ ऐसा ही कारनामा किया था। फिल्म का बजट करीब 50 लाख रुपये था मगर बॉक्स ऑफिस पर इसका कलेक्शन 120 करोड़ का हुआ था।
100 करोड़ का आंकड़ा पार करने वाली पहली फिल्म है ‘लालो’
ये एक सुपरहिट गुजराती और हिंदी धार्मिक थ्रिलर फिल्म थी, जिसका निर्देशन अंकित सखिया ने किया है। फिल्म को लेकर आई रिपोर्टों में इसे गुजराती सिनेमा की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल किया गया और यह पहली गुजराती फिल्मों में से एक बनी जिसने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया।
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धीमी शुरुआत के साथ नंबर 1 गुजराती फिल्म बनी ‘लालो’
‘लालो’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की थी। पहले हफ्ते फिल्म ने केवल 33 लाख रुपये कमाये थे। मगर इसकी कहानी और माउथ पब्लिसिटी के कारण फिल्म ने आगे चलकर 100 करोड़ के क्लब में अपनी जगह बना ली और कुल 120 करोड़ का बिजनेस किया।
कम बजट लेकिन कलेक्शन कमाल
‘लालो’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम लागत के बाद हुई शानदार कमाई है। करीब 50 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 120 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया। यही वजह है कि फिल्म को सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में गिना जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने भी अपनी लिस्ट में ‘लालो’ को ‘महावतार नरसिम्हा’, ‘सीक्रेट सुपरस्टार’, ‘उरी’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों के साथ शामिल किया था।
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क्या है ‘लालो’ की कहानी?
‘लालो’ फिल्म की कहानी भगवान कृष्ण से जुड़ी आस्था पर आधारित है। लालो एक साधारण सा ऑटो ड्राइवर है जो गरीबी, कर्ज और शराब की लत से जूझता है। एक दिन अचानक वो किसी सुनसान फार्महाउस में फंस जाता है। यहीं उसे भगवान श्री कृष्ण के दर्शन और आभास होने लगता है। धीरे-धीरे भगवान कृष्ण उसे मार्गदर्शन देने लगते हैं और उसे अपने जीवन में की गई गलतियों के लिए पश्चाताप करने के लिए प्रेरित करते हैं।
फिल्म को शुरुआत में एक आम फिल्म माना गया, लेकिन जब लोगों ने इसे देखा तो इसकी बातें होने लगीं। ऐसे ही ये कम बजट में बनी गुजराती फिल्म हिंदी बेल्ट के दर्शकों तक भी पहुंची और इसे काफी पसंद किया गया। फिल्म को भारत के बाद कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, यूएई और अमेरिका जैसे देशों में रिलीज किया गया था।
‘हनुमान अंश’ की तरह क्यों नहीं हुई ‘लालो’ की चर्चा
इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि ‘लालो’ गुजराती फिल्म थी, जबकि ‘हनुमान अंश’ शुरू से ही हिंदी दर्शकों के बीच चर्चा में रही। ‘लालो’ को पहले क्षेत्रीय स्तर पर सफलता मिली और बाद में इसे हिंदी में भी रिलीज किया गया। जनवरी 2026 में हिंदी रिलीज के बाद फिल्म ज्यादा दर्शकों तक पहुंची। जबकि ‘हनुमान अंश’ हिंदी फिल्म होने के कारण पहले दिन से ही चर्चा का विषय बन गई।
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‘लालो’ और ‘हनुमान अंश’ की सफलता में क्या है समानता?
दोनों फिल्मों में की सफलता के पीछे का कारण आस्था, कहानी और माउथ पब्लिसिटी है। दोनों फिल्मों में ही बड़े सितारे नहीं हैं और ना ही फिल्म का बजट करोड़ों में हैं, लेकिन इनकी कहानी, कंटेंट और दर्शकों के भरोसे ने फिल्मों को सफल बनाया है।
