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हंसला मेहता ला रहे हैं ‘Scam-1992’, पढ़ें- उस घोटाले की कहानी, जिससे दहल गया था स्टॉक मार्केट

SCAM 1992 Teaser: 1992 में हर्षद मेहता के इस काले कारनामे का टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार सुचेता दलाल ने पर्दाफाश किया था।

SCAM 1992 The Harshad Mehta Story, SCAM 1992 The Harshad Mehta Story Teaser,इस वेब सीरीज की शूटिंग 6 महीने तक चली है। जिसमें 170 से भी ज्यादा किरदार शामिल हैं।

SCAM 1992 Teaser: निर्देशक हंसल मेहता शेयर मार्केट दलाल हर्षद मेहता पर 10 एपिसोड की एक वेब सीरीज लेकर आ रहे हैं जिसका नाम ‘स्कैम 1992 – द हर्षद मेहता स्टोरी’ है। सोनी लिव पर स्कैम 1992 का टीज़र आ चुका है, जिसकी कहानी देबाशीष बसु और सुचेता दलाल की पुस्तक ‘द स्कैम’ पर आधारित है। इस वेब सीरीज में हर्षद मेहता के घोटाले को करीब से दिखाया जाएगा कि कैसे उसने 4000 करोड़ रुपये का घोटाला कर उस समय पूरे शेयर मार्केट व सरकार को हिला डाला था।

SCAM 1992 के टीजर की बात करें तो इसके शुरुआत में श्रेया धनवंतरी दिखाई गईं हैं जो पत्रकार सुचेता दलाल की भूमिका निभाएंगी। यहां बता दें कि पत्रकार सुचेता दलाल ही शख्स थीं जिसने हर्षद मेहता के घोटालों का खुलासा किया था। तब सुचेता दलाल टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार थीं। सीरीज में हर्षद मेहता के किरदार के रूप में प्रतीक गांधी नजर आएंगे। बता दें, इस वेब सीरीज की शूटिंग 6 महीने तक चली है। जिसमें 170 से भी ज्यादा किरदार शामिल हैं। सीरीज दो सौ से ज्यादा लोकेशन पर शूट की गई है।

कौन था हर्षद मेहताः हर्षद मेहता अपने जमाने के जाने माने स्टॉक ब्रोकर थे। गुजरात में पैदा हुए हर्षद मेहता ने कई छोटी – छोटी नौकरियां की, लेकिन शुरू से ही उनका मन गणित, शेयर मार्किट व बैंकिंग में था। हर्षद की पहली नौकरी न्यू इंडिया इन्सुरेंस कंपनी लिमिटेड में बतौर सेल्स पर्सन की। जिसके बाद शेयर मार्केट की तरफ उनका रुझान बढ़ता गया। हर्षद मेहता ने प्रसन्न परिजीवनदास को अपना गुरु माना और स्टॉक मार्केट के हर पैंतरे सीखे। इसके बाद साल 1984 में खुद की ‘ग्रो मोर रीसर्स एंड असेट मैनेजमेंट’ नाम की कंपनी की शुरुआत की। और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बतौर ब्रोकर मेंबरशिप ली। हर्षद मेहता के 1550 स्कॉवर फीट के सी फेसिंग पेंट हाउस से लेकर उनकी मंहगी गाड़ियों के शौक तक सबने उन्हें एक सेलिब्रिटी बना दिया था।

क्या था हर्षद मेहता घोटालाः 1990 के दशक तक हर्षद मेहता की कंपनी में बड़े बड़े इन्वेस्टर्स पैसा लगाने लगे थे। 1990 तक आते आते हर्षद मेहता का नाम हर बड़े अखबार, मैग्जीन के कवर पेज पर आए दिन आने लगा। हर्षद मेहता बाजार में ज्यादा से ज्यादा पैसा लगाकर मुनाफा कमाना चाहते थे। उन्होंने जाली बैंकिंग रसीद जारी करवाई। इसके लिए उन्होंने दो छोटे-छोटे बैंकों को हथियार बनाया। बैंक ऑफ कराड और मेट्रोपॉलिटन को-ऑपरेटिव बैंक में अपनी अच्छी जान पहचान का फायदा उठाकर हर्षद मेहता बैंक रसीद जारी करवाते थे। इन्हीं रसीद के बदले पैसा उठाकर वह शेयर बाजार में लगाते थे। इससे वह मुनाफा कमाकर बैंकों को उनका पैसा लौटा देते थे। जब तक शेयर बाजार चढ़ता रहा, किसी को इसकी भनक नहीं पड़ी। लेकिन बाजार में गिरावट के बाद जब वह बैंकों का पैसा 15 दिन के भीतर नहीं लौटा पाए उनकी पोल खुल गई।

कैसे हुआ पर्दाफाशः 1992 में हर्षद मेहता के इस काले कारनामे का टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार सुचेता दलाल ने पर्दाफाश किया। सुचेता दलाल ने बताया कि हर्षद मेहता बैंक से एक 15 दिन का लोन लेता था और उसे स्टॉक मार्केट में लगा देता था। हर्षद मेहता एक बैंक से फेक बीआर बनावाता जिसके बाद उसे दूसरे बैंक से भी आराम से पैसा मिल जाता था।इस राज का खुलासा तब हुआ जब वह एक बैंक का पैसा 15 दिन के भीतर नहीं दे पाए। लेकिन उनके मुनाफे से सब हैरान थे। मामले में 24 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया। मुंबई की विशेष अदालत ने हर्षद मेहता के भाई सुधीर मेहता समेत 6 आरोपियों को 700 करोड़ रुपये के घोटाले का दोषी करार दिया। 31 दिसंबर 2001 को जेल में ही उनकी मौत हो गई।

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