अगर आपको चोर-पुलिस का खेल देखना पसंद है तो आप प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हैवान’ देख सकते हैं। जैसे चोर को लगता है कि वह पुलिस से आगे है वैसे ही हैवान को भी लगता है कि वो श्याम(सैफ) से आगे है लेकिन नेत्रहीन श्याम नॉर्मल इंसान से ज्यादा चीजों को समझते और देखते हैं। फिल्म के लिए एक बात कहनी सही रहेगी कि ‘हैवान’ देखते समय ज्यादा दिमाग ना लगाए, हर छोटी बारीकी पर ध्यान ना दें ताकि आप फिल्म इंजॉय कर लें।
‘हैवान’ की कहानी क्या है
हैवान की एक झलक के साथ 2 घंटे 47 मिनट की फिल्म की कहानी शुरू होती है और सीधा सैफ(श्याम) के परिवार को दिखाया जाता है। श्याम एक नेत्रहीन इंसान है लेकिन नॉर्मल इंसान से ज्यादा देखता है। उसने अपने गांव का घर गिरवी रख दिया है, बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने हैं। श्याम मुंबई की सोसायटी में कीपिंग मैनेजर हैं। जो वहां मौजूद हर इंसान को उसकी आवाज से जानते है, हर किसी का नाम उन्हें पता है। साथ ही श्याम को कुश्ती और संगीत का भी ज्ञान है। आंखो के अलावा उनके बाकी सभी सेंसेज काफी पावरफुल हैं। बोमन ईरानी रिटायर्ड जज हैं जो इसी बिल्डिंग में रहते हैं, श्याम उनके काफी करीब हैं।
‘हैवान’ की कहानी का अहम पहलू बोमन ईरानी हैं जिन्होंने परशुराम(अक्षय) को झूठे रेप केस में 7 साल की सजा सुनाई थी। सजा के दौरान परशुराम का पूरा परिवार आत्महत्या कर लेता है, जिसका बदला लेने के लिए परशुराम उन सभी को मारना चाहता है जो इसमें जिम्मेदार थे। बोमन ईरानी की एक नाजायज बेटी(नंदिनी) है जिसे वह बचाना चाहते हैं और श्याम इस बारे में सब जानता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब परशुराम बोमन ईरानी की हत्या कर देता है। जब उसे पता चलता है कि बोमन ईरानी की एक बेटी है तो वह उसके पीछे पड़ जाता है और श्याम ढाल की तरह नंदिनी की रक्षा करता है। श्याम और नंदिनी के बीच एक बेहद प्यारा रिश्ता दिखाया गया है, वह नंदिनी के लिए श्याम बापू है। लेकिन इस कहानी में एक दिलचस्प मोड़ है, जिसका स्पॉलर यहां देना सही नहीं होगा।
‘हैवान’ के मुख्य कलाकार
अक्षय कुमार और सैफ अली खान स्टारर फिल्म ‘हैवान’ 2016 में आई मलयालम फिल्म ओप्पम का हिंदी रीमेक है। ओप्पम का निर्देशन भी प्रियादर्शन किया था और अब वह इसका हिंदी वर्जन लेकर आए हैं। अक्षय कुमार ने फिल्म में विलेन को रोल प्ले किया, जिसका नाम परशूराम है और सैफ अली खान ने नेत्रहीन शख्स का किरदार निभाया जिसका नाम श्याम है।
फिल्म में उनके अलावा श्रिया पिलगांवकर, बोमन ईरानी, राजपाल यादव, दिवंगत एक्टर असरानी, शारिब हाशमी, सैयामी खेर, राजेश शर्मा जैसे शानदार कलाकार हैं। फिल्म में बड़ा रोल सैफ और अक्षय का है लेकिन फिल्म बाकी किरदार काफी अहम और कहानी को अलग मोड़ देते हैं। फिल्म में मोहनलाल एक शानदार लेकिन छोटा सा कैमियो भी है।
कैसी है एक्टिंग
पहले बात करते हैं ‘हैवान’ की तो अक्षय कुमार में खूंखार शख्सियत कम बल्कि एक सरकास्टिक किलर की वाइब आती है। राजपाल यादव के साथ उनकी जोड़ी अच्छी लगती है लेकिन विलेन के रोल में अक्षय से उम्मीदें थोड़ी ज्यादा थी जो फिल्म में पूरी नहीं हो पाईं। हालांकि एक्शन सीन्स, स्क्रीन प्रेजेंस और कमाल की डायलॉग डिलीवरी में अक्षय ने कमाल कर दिया।
शारिब हाशमी और राजपाल यादव अपने वही अंदाज में दिखाई दिए। छोटा रोल लेकिन दमदार और शानदार। पर्दे पर आखिरी बार असरानी को देखना कमाल का था। फिल्म में उन्होंने एक अच्छा फन एलीमेंट एड किया। बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, राजेश शर्मा ने अपने रोल के साथ न्याय करते हैं।
सैफ अली खान भी नेत्रहीन शख्स के किरदार में थोड़े से अनकंफर्टेबल दिखाई देते हैं, हालांकि एक्शन और छोटी-छोटी बारीकियों में उन्होंने भी कोई कमी नहीं छोड़ी। भले ही उन्होंने अंधे इंसान का रोल प्ले किया लेकिन वो जरूरत से ज्यादा चीजें देखते हैं जो एक समय के बाद प्रिडिक्टेबल लगता है। फिल्म में एक पिता और बेटी पर आधारित एक गाना है जो कमाल है, और दर्शकों के दिल को छूने वाला है।
कैसा है प्रियदर्शन का डायरेक्शन
प्रियदर्शन ने ओप्पम से इस फिल्म में काफी समानताएं रखी हैं। सेट से लेकर कुछ किरदारों तक, फिल्म में काफी समानताएं हैं लेकिन प्रियादर्शन जिन फिल्मों के लिए मशहूर हैं, वो असर उन्होंने इस फिल्म में भी बरकरार रखा है। डार्क सीन्स, रहस्यमयी माहौल और कहानी को धीरे-धीरे खोलने का उनका अंदाज फिल्म को बांधे रखता है। क्लाईमैक्स अच्छा है, हालांकि एंडिंग थोड़ी सी निराशा देने वाली है। खास बात ये है कि गंभीर और डार्क कहानी के बीच भी प्रियदर्शन अपने सिग्नेचर कॉमिक टच को नहीं छोड़ते।
हालांकि फिल्म थोड़ी छोटी हो सकती थी। इस कहानी को 2 घंटे में खत्म किया जा सकता था। कई जगहों पर फिल्म थका देने वाली लगती है, सीन्स लंबे और बेवजह भी समझ आते है। इस पूरे ऑब्जर्वेशन के आधार पर मैं इस फिल्म को 2 स्टार्स देती हूं। इसे एक वन टाइम वॉच कहा जा सकता है।
