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Gunjan Saxena The Kargil Girl: जानिए कौन हैं IAF ऑफिसर गुंजन सक्सेना?, कारगिल युद्ध के दौरान उड़ाया था चीता हेलीकॉप्टर

Gunjan Saxena The Kargil Girl, Janhvi Kapoor: जान्हवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल सुर्खियों में बनी हुई है। यह फिल्म IAF की महिला पायलट गुंजन सक्सेना (Gunjan Saxena) पर बनी है।

Gunjan Saxena The Kargil Girl, Janhvi KapoorIAF ऑफिसर गुंजन सक्सेना और जान्हवी कपूर की तस्वीर

Gunjan Saxena The Kargil Girl, Janhvi Kapoor: बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर की फिल्म गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल (Gunjan Saxena The Kargil Girl) सुर्खियों में बनी हुई है। यह फिल्म IAF की महिला पायलट गुंजन सक्सेना (Gunjan Saxena) पर बनी है। गुंजन सक्सेना भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट रह चुकी हैं। गुंजन सक्सेना ने 5 साल की उम्र में लड़ाकू विमान देखा तो यह ठान लिया कि वह एक दिन लड़ाकू विमान उड़ाएंगी। बचपन से ही सपनों की उड़ान भरने वाली गुंजन सक्सेना ‘शौर्य चक्र पुरस्कार’ पाने वाली पहली महिला हैं।

गुंजन सक्सेना ने अपनी ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से की थी। जिसके तुरंत बाद उन्होंने दिल्ली का सफदरजंग फ्लाइंग क्लब जॉइन कर लिया था। 1994 में उन्हें पता चला कि IAF में पहली बार महिला पायलट की भर्ती हो रही है। उन्होंने जरा भी देर न करते हुए SSB की परीक्षा पास की और भारतीय वायुसेना के महिलाओं के पहले बैच में शामिल हो गईं।

इससे पहले महिलाओं को उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी जाती थी और न ही लड़ाकू विमान चलाने की अनुमति थी। गुंजन सक्सेना और उनकी साथी श्री विद्या उन 25 ट्रेनी पायलटों में शामिल हुईं जिन्हें पहली बार उड़ान भरने का मौका मिला था। महिलाओं के इस बैच ने पहली बार वायुसेना के विमान उड़ाकर इतिहास रच दिया था। उस समय गुंजन भारतीय वायु सेना में फ़्लाइंग ऑफिसर बनीं।

1999 में जब कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के बीच जंग चल रही थी। तब गुंजन और उनकी साथी श्री विद्या को पहली बार अपने देश के लिए कुछ करने का मौका मिला। गुंजन ने इससे पहले लड़ाकू विमान नहीं उड़ाया था। उस युद्ध के दौरान जब भारतीय सेना को पायलटों की जरूरत पड़ी तो गुंजन और उनकी साथी श्री विद्या को कश्मीर के उस युद्ध क्षेत्र में भेजा गया जहां पाकिस्तानी सेना की तरफ से लगातार रॉकेट लॉन्चर और गोलियों से हमला किया जा रहा था। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने चीता हेलीकॉप्टर उड़ाया था।

युद्ध के दौरान उन्होंने सैकड़ो सैनिकों की मदद की और कई भारतीय जवानों को वहां से सुरक्षित निकालने में सफलता पाई। युद्ध के समय पाकिस्तानी सेना की तरफ से गुंजन के एयरक्राफ्ट पर मिसाइल भी दागी गई लेकिन वह चूक गई और गुंजन बाल-बाल बच गईं। गुंजन और उनकी साथी ने अपनी जान की बाजी लगाकर इस मिशन को अंजाम दिया था। कारगिल युद्ध के दौरान गुंजन सक्सेना की इस बहादुरी के लिए उन्हें ‘शौर्य वीर पुरुस्कार’ से सम्मानित किया गया।

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