कुछ गाने ऐसे होते हैं जिन्हें हम सुनते नहीं, अपने भीतर जीते हैं। ‘मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है’ भी ऐसा ही एक गीत है। ये किसी बिछड़े प्रेमी की शिकायत नहीं, बल्कि उन यादों की वापसी की मांग है जिन्हें न लौटाया जा सकता है और न भुलाया जा सकता है। शायद यही वजह है कि करीब चार दशक बाद भी यह गीत हर उस इंसान को अपना लगता है, जिसने कभी किसी को खोया हो।
गुलजार के लिखे गानों की खूबसूरती ही यही थी कि ये कभी पुराने से नहीं लगते। ये गाना बाकी बॉलीवुड गानों जैसा नहीं था। इसमें ना तो कोई तुकबंदी थी और ना कोई अंतरा। गाना सुनने में ऐसा लगता है जैसे कोई इंसान कहानी कह रहा हो। एक ऐसी कहानी जो आपको उस शख्स के थोड़ा और पास ले जाती है जो आपसे बहुत दूर हो चुका है।
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साल 1987 में आई फिल्म ‘इजाजत’ के इस गाने के बोल गुलजार ने लिखे थे। इसे आवाज दी थी आशा भोंसले ने और संगीत दिया था। इस फिल्म में रेखा, नसीरुद्दीन शाह और अनुराधा पटेल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। ये फिल्म प्यार, शादी और अधूरे रिश्तों की कहानी थी जिसे बहुत मेच्योरिटी के साथ दिखाया गया था।
जब प्यार की यादें किसी चीज में नहीं, एहसासों में बस जाती हैं
इस गाने की सबसे बड़ी खूबसूरती है कि इसमें खोई हुई मोहब्बत को किसी इंसान या रिश्ते से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी यादों और पलों से जोड़ा गया है। ‘एक अकेली छतरी में जब आधे-आधे भीग रहे थे…’ जैसी लाइनें बताती हैं कि कभी-कभी सामान नहीं, वक्त वापस मांगने का मन करता है। वो वक्त जो आपने साथ बिताया हो, वो लम्हें जो आपने साथ जिये हों। वो सब वापस मांगने का एहसास इस गीत में समझाया गया है।
गुलजार ने गीत नहीं, एक अधूरी चिट्ठी लिख दी थी
भारतीय सिनेमाजगत में गुलजार अपनी गहरी राइटिंग के लिए जाने जाते है। उन्होंने कई किस्म गीत बॉलीवुड को दिए है लेकिन ये गीत एक कहानी जैसा लगता है। आम बॉलीवुड गानों की तरह इसमें कोई तुकबंदी या मुखड़ा-अंतरा नहीं है बल्कि सुनने में ऐसा लगता है जैसे कोई अपने पुराने प्रेमी को खत लिख रहा हो। यही वजह है कि ये गीत सुनने से ज्यादा महसूस किया जाता है क्योंकि ये आपको उन यादों में ले जाता है जो आप खुद एक बक्से में बंद कर चुके होते हो।
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आशा भोसले की आवाज़ ने दर्द को खामोशी की तरह गाया
इस गाने को अगर किसी ने अमर बनाया, तो वो है आशा भोसले की बेहद सादगी भरी गायकी। उन्होंने इसे रोकर नहीं, बल्कि अंदर दबे हुए दर्द के साथ गाया। यही सब्र इस गीत को और ज्यादा बेहतरीन बना देता है। जानकर हैरानी होगी कि गीत ‘मेरा कुछ सामान’ के लिए आशा भोसले को ‘बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर’ की कैटेगरी में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
आर डी बर्मन ने जब मजाक में कहा था – ‘इसका मीटर कहां है?’
फिल्म से जुड़े एक किस्से की बात करें तो जब गुलजार साहब इस गीत को पंचम दा के पास लेकर आए तो शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि इतनी फ्री शैली वाली रचना को धुन में कैसे ढाला जाए। इसमें नॉर्मल फिल्मी गीतों जैसा ढांचा नहीं था। तो उन्होंने हंसते हुए पूछा, ‘अरे, इसका मीटर कहां है?’ लेकिन बाद में इस गीत के लिए आर डी बर्मन ने इतनी खूबसूरत धुन बनाई कि ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में मील का पत्थर बन गया।
आज के दौर में भी क्यों दिल को छू जाता है ‘मेरा कुछ सामान’?
सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेज के इस दौर में रिश्ते जल्दी बनते और टूटते हैं, लेकिन यादें आज भी वहीं रह जाती हैं। शायद इसी वजह से ये गीत हर पीढ़ी को अपना सा लगता है। ये हमें याद दिलाता है कि प्यार खत्म हो सकता है, लेकिन उससे जुड़े कुछ मौसम, कुछ बातें और कुछ अधूरे लम्हे हमेशा हमारे भीतर कहीं पड़े रहते हैं।
