भारतीय संगीत जगत की बात हो और तो गुलशन कुमार का नाम जरूर आता है। गुलशन कुमार की 12 अगस्त 1997 की हत्या कर दी गई थी। मगर 29 साल बाद भी उनकी विरासत बुलंदियों पर है। हम बात कर रहे हैं उनकी टी-सीरीज कंपनी की, जिसकी स्थापना गुलशन कुमार ने की थी। मगर क्या आप जानते हैं गुलशन कुमार कभी दिल्ली की सड़कों पर अपने पिता के साथ फल बेचा करते थे।

कभी दिल्ली की सड़कों पर फल बेचने वाले गुलशन कुमार ने अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और कारोबार की समझ के दम पर ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जो उनके निधन के 29 साल बाद भी देश की नंबर-1 म्यूजिक कंपनी बना हुआ है।

साधारण परिवार में हुआ जन्म

गुलशन कुमार का जन्म 5 मई 1956 को दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। उनका असली नाम गुलशन दुआ था। उनका परिवार विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आया था। आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए परिवार को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती थी।

कहा जाता है कि शुरुआती दिनों में परिवार फलों का कारोबार करता था। गुलशन कुमार भी पिता के साथ दिल्ली की सड़कों पर फल बेचने में मदद करते थे। बाद में उनके पिता ने दिल्ली के दरियागंज इलाके में जूस की दुकान शुरू की, जहां गुलशन भी काम करते थे।

कैसे आया म्यूजिक बिजनेस का आइडिया?

जूस की दुकान चलाने के दौरान गुलशन कुमार ने देखा कि लोगों में भक्ति गीतों और फिल्मी गानों की रिकॉर्डिंग सुनने का जबरदस्त क्रेज है। उस दौर में ऑडियो कैसेट काफी महंगे होते थे और आम आदमी की पहुंच से बाहर थे।

यहीं से उनके मन में सस्ते दामों पर ऑडियो कैसेट बेचने का विचार आया। उन्होंने पहले रिकॉर्डेड गानों की कैसेट बनाकर बेचना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने अपना कारोबार बढ़ाया और सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज की स्थापना की, जिसे बाद में पूरी दुनिया टी-सीरीज के नाम से जानने लगी।

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सस्ते कैसेट ने बदल दी पूरी इंडस्ट्री

1980 के दशक में टी-सीरीज ने बेहद कम कीमत पर ऑडियो कैसेट बाजार में उतारे। इससे आम लोगों के लिए संगीत खरीदना आसान हो गया। कंपनी ने भक्ति संगीत, फिल्मी गाने और लोकल मयूजिक पर विशेष ध्यान दिया।

धीरे-धीरे टी-सीरीज ने देशभर में अपना मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार कर लिया। छोटे शहरों और गांवों तक कंपनी के कैसेट पहुंचने लगे। यही रणनीति टी-सीरीज की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।

भक्ति संगीत से मिली सबसे बड़ी पहचान

गुलशन कुमार ने सबसे पहले भक्ति संगीत को बड़े स्तर पर पेश किया। माता के भजन, शिव भक्ति, विष्णु भजन और अन्य धार्मिक गीतों की कैसेट करोड़ों की संख्या में बिकीं।

फिल्मों के निर्माण में भी रखा कदम

म्यूजिक बिजनेस में सफलता मिलने के बाद गुलशन कुमार ने फिल्म निर्माण में भी कदम रखा। टी-सीरीज ने कई फिल्मों में संगीत देने के साथ-साथ फिल्मों का निर्माण भी शुरू किया।

1990 के दशक में कंपनी बॉलीवुड की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनियों में शामिल हो गई। बाद के वर्षों में टी-सीरीज ने कई सुपरहिट फिल्मों का निर्माण और सह-निर्माण किया।

1997 में हुई गुलशन कुमार की हत्या

12 अगस्त 1997 को मुंबई के अंधेरी स्थित एक मंदिर के बाहर गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उनकी मौत ने पूरे फिल्म और संगीत जगत को झकझोर दिया था। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 41 वर्ष थी। उनकी हत्या से जुड़ा मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। हालांकि, उनके जाने के बाद भी उनका बनाया कारोबार नहीं रुका।

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बेटे भूषण कुमार ने संभाली कमान

गुलशन कुमार के निधन के बाद उनके बेटे भूषण कुमार ने बहुत कम उम्र में टी-सीरीज की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने कंपनी को नए दौर के हिसाब से बदलने का फैसला किया।

डिजिटल युग की शुरुआत होते ही टी-सीरीज ने यूट्यूब और ऑनलाइन म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर तेजी से निवेश किया। इसका फायदा कंपनी को जबरदस्त तरीके से मिला।

दुनिया का सबसे बड़ा यूट्यूब चैनल

आज टी-सीरीज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े यूट्यूब चैनलों में शामिल है। कंपनी के चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर हैं और इसके वीडियो अरबों बार देखे जा चुके हैं। म्यूजिक स्ट्रीमिंग, फिल्म निर्माण, डिजिटल कंटेंट और क्षेत्रीय संगीत में भी टी-सीरीज लगातार अपना विस्तार कर रही है।

29 साल बाद भी कायम है नंबर-1 का ताज

गुलशन कुमार के निधन को 29 साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी बनाई टी-सीरीज आज भी भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री की सबसे प्रभावशाली कंपनी मानी जाती है। नए कलाकारों को मौका देने से लेकर बड़े बजट की फिल्मों के निर्माण और दुनिया भर में भारतीय संगीत पहुंचाने तक, टी-सीरीज लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है।