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फिल्म के चक्कर में बिक गया था गोविंदा के पिता का बंगला, मां की बात सुन रेलवे स्टेशन पर ही फूट-फूटकर रोने लगे थे

गोविंदा के पिता ने एक फिल्म बनाई थी लेकिन जब उनकी फिल्म नहीं चली तो उन्हें अपना बंगला बेचना पड़ा। इसके बाद गोविंदा के परिवार पर कई मुश्किलें आईं जिसे दूर करने के लिए उन्होंने...

govinda, govinda struggle story, govinda latest newsगोविंदा ने अपने एक्टिंग करियर में बहुत संघर्ष किए हैं (Photo-Indian Express)

बॉलीवुड में अपने डांस स्टाइल और एक्टिंग के लिए मशहूर एक्टर गोविंदा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ये खुलासा किया कि बॉलीवुड में कुछ लोग हैं जिन्होंने उनके करियर को बर्बाद करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उनकी फिल्मों को रिलीज नहीं होने दिया गया, जिस कारण उन्हें करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा। आपको बता दें कि गोविंदा के पिता भी एक एक्टर थे और एक जमाने में फिल्मों के चक्कर में ही उनका बंगला बिक गया था।

जब गोविंदा के पिता को बेचना पड़ा बंगला- गोविंदा के पिता अरुण आहूजा एक एक्टर थे और उन्होंने लगभग 40 फिल्मों में काम किया। बाद में उन्होंने एक फ़िल्म बनाने की सोची जो बुरी तरह फ्लॉप हुई। इस फिल्म के लिए अरुण आहूजा ने अपने सारे पैसे लगा दिए थे और जब फिल्म फ्लॉप हुई तो उन्हें भारी नुकसान हुआ। गोविंदा ने सिमी ग्रेवाल के शो पर बताया था कि कार्टर रोड पर उनका एक बंगला था जिसे उनके पिता को बेचना पड़ा और परिवार को किसी और जगह शिफ्ट होना पड़ा था। इसके बाद परिवार में मुश्किलों का दौड़ शुरू हुआ था।

महिला डिब्बे में नहीं मिली जगह तो मायूस मां को देख रोने लगे थे गोविंदा- गोविंदा अपनी मां के बेहद करीब थी और उनके कष्टों को देखकर ही उन्होंने सोच लिया कि किसी भी तरह वो अपने मां के कष्टों को दूर करेंगे। उनकी मां निर्मला देवी क्लासिकल आर्टिस्ट थीं और वो अपने बच्चों के लिए बहुत मेहनत करती थीं। एक बार ऐसी घटना हुई जिसने गोविंदा को बहुत उद्वेलित किया था। गोविंद ने बताया था, ‘एक बार मम्मी को छोड़ने के लिए मैं खार रेलवे स्टेशन पर गया था। लेडीज डिपार्टमेंट में भी बहुत भीड़ थी और औरतें भी लटककर सफर कर रही थीं।’

गोविंदा ने आगे कहा, ‘वो उन महिलाओं से कहती कि बेटा मुझे अंदर ले लो प्लीज। लेकिन उन्हें जगह नहीं मिली और इस तरह पांच ट्रेन चली गई लेकिन वो चढ़ नहीं पाईं। तो मम्मी ने कहा कि – हां ये भी छूट गई, बड़ा कठिन हो गया है चीची (गोविंदा के घरवाले प्यार से उन्हें इसी नाम से बुलाते थे) आजकल। मैं उनकी बात सुन रोने लगा और मैंने मां से कहा कि आप 10 मिनट रुकिए यहीं।’

 

गोविंदा ने आगे बताया कि वो रोते – रोते दौड़कर अपने मामा के घर गए और उनसे पैसे लेकर आए। उन पैसों से उन्होंने मां के लिए फर्स्ट क्लास की टिकट खरीदी थी। गोविंदा ने बताया कि इस घटना के बाद से वो ज़िंदगी में बहुत जुनूनी हो गए और एक सफल अभिनेता बने।

 

गोविंदा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1986 में आई फ़िल्म, ‘इल्जाम’ से किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और कई सफल फिल्में दी। उन्हें हसीना मान जाएगी फ़िल्म के लिए बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड मिला। साजन चले ससुराल फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर स्पेशल अवॉर्ड से नवाजा गया। गोविंदा के करियर में एक दौर ऐसा भी आया जब उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगीं। साल 2000 के दौरान कई फिल्में फ्लॉप हुईं जिसके बाद भागमभाग, पार्टनर जैसी फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया।

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