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नायाब किस्साः जब गीता दत्त ने मथुरा के मंदिर में गीत गाया

इंसान जब अवसाद की गिरफ्त में आ जाए तो उसे धार्मिक स्थल, तंत्र -मंत्र, ज्योतिषी खूब लुभाते हैं। मशहूर हीरोइन और गायिका गीता दत्त के साथ भी यही हुआ था ।

Author Published on: November 17, 2017 2:00 AM
गीता दत्त (फोटो- Wikipedia)

अशोक बंसल
इंसान जब अवसाद की गिरफ्त में आ जाए तो उसे धार्मिक स्थल, तंत्र -मंत्र, ज्योतिषी खूब लुभाते हैं। मशहूर हीरोइन और गायिका गीता दत्त के साथ भी यही हुआ था । हुस्न की मलिका गीता दत्त ( अभिनेता गुरु दत्त की पत्नी ) के मथुरा के एक ज्योतषी के पास कई बार आने और मथुरा में हनुमानजी का एक मंदिर बनवाने का दिलचस्प किस्सा बहुत कम लोगों को मालूम है। 30 नबंवर , 1930 को जन्मीं गीता दत्त ने जीवन में शोहरत खूब पाई लेकिन पति गुरु दत्त की बेवफाई से दुखी होकर वे मानसिक चैन के लिए यदा कदा कन्हैया की नगरी वृन्दावन आती थीं। वे अपने वैवाहिक जीवन को लेकर बेहद चिंतित थीं । कहते हैं कि गुरु दत्त का अभिनेत्री वहीदा रहमान की और बेहद झुकाव था। किसी ने उन्हें बताया कि मथुरा में मातावाली गली में पंडित डालचंद शर्मा रहते हैं जो पहुंचे हुए ज्योतषी हैं। गीता दत्त पंडितजी की खोज में कई बार मातावाली गली में आईं थीं । यह बात 1960 के आसपास की है। कैलाश वर्मा इसी गली के वासी हैं। उन्हें याद है कि एक बार गीता दत्त फिल्म अभिनेत्री टुनटुन के साथ पंडित डालचंद के पास आईं। होलीगेट के अंदर मातावाली गली के तमाम लोग इकठ्ठे हो गए। पंडितजी के घर के पास हनुमान का मंदिर है। पंडितजी गीता को हनुमान के मंदिर में ले आए।

गली में सभी लोगों ने बड़ी आसानी से फिल्म अभिनेत्रियों को पहचान लिया। एक स्वर में सभी ने विनती की कि गीताजी कुछ गाएं। गीता ने पंडितजी की तरफ देखा। उधर से स्वीकृति मिली तो गीता दत्त ने मुक्त कंठ से फिल्म ‘दो भाई’ में खुद का गाया गीत सुनाया …‘मेरा सुन्दर सपना बीत गया , मैं प्रेम में सब कुछ हार गई, बेदर्द जमाना जीत गया, मेरी प्रेम कहानी खत्म हुई, सुन्दर सपना बीत गया।’ कैलाश वर्मा ने बताया कि इस दर्द भरे गीत को गाते वक्त गीता के चेहरे पर दर्द की लकीरें साफ झलक रही थीं।

नौजवानों ने तब टुनटुन से कोई फिल्मी डायलॉग सुनाने को कहा। टुनटुन सभी जानते हैं उमारानी के नाम से फिल्मी गायिका भी रही हैं। टुनटुन ने कोई नाज-नखरे नहीं किए। उन्होंने मशहूर गाना सुनाया…‘अफसाना लिख रही हूं, दिल ऐ बेकरार का, आंखों में रंग भरके तेरे इंतज़ार का।’
इसके बाद गीता दत्त को मातावाली गली के लोगों ने कई अन्य मौकों पर देखा। कहते हैं पति गुरु दत्त का वहीदा रहमान के लिए आकर्षण आखिरी दम तक बना रहा। 10 अक्त्तूबर 1964 को गुरु दत्त ने आत्महत्या कर ली। गीता दत्त बुरी तरह टूट गर्इं। अवसाद की शिकार हो गर्इं। फिल्मों की तरफ झांकना भी छोड़ दिया। आर्थिक तंगी की शिकार हुईं तो गाना शुरू किया। साथ में मदिरा पान भी। नतीजा , लिवर सिरोसिस की शिकार हो 20 जुलाई 1972 को मशहूर अभिनेत्री-गायिका गीता की कहानी खत्म हो गई। मथुरा के पंडितजी के नजदीक रहे प्रसिद्ध वकील सुरेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि पंडितजी से गीता दत्त बहुत प्रभावित थीं। पंडित डालचंद शर्मा के कहने पर गीता दत्त ने मथुरा के डेम्पियर नगर में हनुमानजी एक मंदिर भी बनवाया था। डेम्पियर नगर का हनुमान मंदिर गीता दत्त की याद को सदैव संजोता रहेगा।

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