जब यूपी के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने गोविंदा पर लगाया था दाऊद इब्राहिम से सांठगांठ का आरोप, जानिये- पूरा मामला

यूपी के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने अपनी किताब 'चरैवेती चरैवेती' में गोविंदा पर आरोप लगाते हुए लिखा था कि साल 2004 में उन्हें लोकसभा चुनाव में हराने के लिए एक्टर ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम का सहारा...

बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा

गोविंदा ने फिल्मों के अलावा राजनीति में भी हाथ आजमाया, लेकिन यहां उन्हें फिल्मों जैसी सफलता नहीं मिली। यही कारण है कुछ वक्त बाद वो राजनीति छोड़कर एक बार फिर फिल्मों में काम करने आ गए। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने गोविंदा पर सनसनीखेज खुलासा करते हुए अपनी किताब ‘चरैवेती चरैवेती’ में लिखा था कि साल 2004 में मुझे लोकसभा चुनाव में हराने के लिए गोविंदा ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम का सहारा लिया था।

अपनी किताब में राम नाई ने इस किस्से का जिक्र करते हुए लिखा, साल 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हराने के लिए माफिया सरगना दाऊद इब्राहीम की मदद ली गई। गौरतलब है कि साल 2004 में गोविंदा उत्तर-मुंबई लोकसभा क्षेत्र से राम नाईक को हराकर सांसद बने थे। अपनी किताब में हार का विस्तार से विवरण करते हुए नाईक ने लिखा, बिल्डर लॉबी और अंडरवर्ल्ड मेरी हार के लिए प्रमुखता से जिम्मेदार रहे। दाऊद और गोविंदा की दोस्ती के बारे में सभी को पता है। जिस वजह से चुनाव में दहशत हावी रही। पूरे चुनाव क्षेत्र में मिलने वाली बढ़त सिर्फ दो इलाकों तक सिमट गई और नतीजा मेरी शिकस्त रहा।

राम नाईक के इस खुलासे पर महाराष्ट्र सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया था। उस वक्त के गृह राज्यमंत्री राम शिंदे ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि जरूरत पड़ी तो इन आरोपों की जांच की जाएगी। इतना ही नहीं राम नाईक ने आगे लिखा, मुंबई उत्तर सीट पर 11,000 हजार वोटों से हुई हार को कुबूल करना अटल बिहारी वाजपेयी के लिए भी मुश्किल भरा था। इससे पहले इस सीट पर उन्हें लगातार तीन बार जीत हासिल हो चुकी थी। उनका अनुमान था कि उनकी इस अप्रत्याशित हार की पीछे अंडरवर्ल्ड का हाथ था।

वहीं इसके बाद इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए गोविंदा ने राम नाईक के आरोपों को बताया था। उन्होंने एक ऑडियो टेप जारी कहा था, ‘क्योंकि जो चीज देश की न्यायिक व्यवस्था नहीं कह रही, जो पुलिस नहीं कह रही, वो राम नाईक कैसे कह रहे हैं? वो अपनी हार को इतना ज्यादा दुखद कैसे ले सकते हैं, कि एक व्यक्ति की जीत का श्रेय वो अंडरवर्ल्ड दे दें। गोविंदा ने यह भी गुजारिश की है कि उन्हें बेवजह बदनाम न किया जाए।’ बता दें साल 2004 के बाद भी राम नाईक को साल 2009 में कांग्रेस नेता संजय निरुपम के सामने हार झेलनी पड़ी थी।

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