फिल्मों में किसिंग सीन देखना और उसे शूट करना दोनों में बहुत बड़ा फर्क होता है। लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं- ये सीन रियल होते हैं, फेक होते हैं… या फिर कैसे शूट होते हैं।

क्या एक्टर्स सच में एक-दूसरे को किस करते हैं या फिर ये कैमरा एंगल और कोरियोग्राफी होती है। क्या ऐसे इंटीमेट सीन शूट करते हुए एक्टर्स अपनी प्रोफेशनल बाउंड्री नहीं क्रॉस करते… इन तमाम सवालों के जवाब के लिए हमने भारत की पहली इंटिमेसी डायरेक्टर आस्था खन्ना से बात की और उन्होंने हमें इंटिमेट सीन के बारे में विस्तार से बताया।

उनसे पूछा गया कि क्या किसिंग सीन या इंटीमेट सीन से पहले किस तरह की गाइडलाइन्स और सुझाव एक्टर्स को दिए जाते हैं। उनकी कोशिश क्या रहती है कि कैसे एक्टर्स इमोशनली सेफ और कंफर्टेबल फील करे।

इसका जवाब देते हुए आस्था खन्ना ने कहा, “मेरे लिए हर इंटीमेट सीन सिर्फ एक्टिंग नहीं होता, बल्कि एक जिम्मेदारी होती है। मैं एक्टर्स को आराम से समझाती हूं कि सीन में क्या करना है, क्यों करना है और स्क्रीन पर क्या दिखेगा। साथ ही यह भी ध्यान रखती हूं कि सब कुछ सुरक्षित तरीके से हो। मेरी कोशिश रहती है कि सेट पर ऐसा माहौल हो जहां एक्टर्स खुलकर बात कर सकें, खुद को सुरक्षित महसूस करें और किसी भी चीज के लिए ना कहने में झिझक न हो। यहां कोई भी सवाल छोटा नहीं माना जाता।”

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क्या हर किसिंग सीन होता है सच?

जब उनसे पूछा गया कि क्या सारे किसिंग सीन रियल होते हैं, क्या कभी ऐसा भी होता है कि किसिंग सीन ना हो और कैमरा एंगल और कोरियोग्राफी से इसे ऐसा बनाया जाए कि वो असली लगें? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि जो दिखता है वो हमेशा असली नहीं होता।

उन्होंने कहा, “सीधी भाषा में कहें तो, जो हम स्क्रीन पर देखते हैं वो हमेशा वैसा नहीं होता जैसा असल में शूट हुआ होता है। कई बार बिना सच में छुए भी एक्टर्स ऐसा माहौल बना देते हैं कि सीन बिल्कुल रियल लगे।

ये सब कैमरा एंगल, सही मूवमेंट और एक्टिंग के दम पर होता है। असल में मेकर्स का ध्यान यही रहता है कि सीन देखने में नैचुरल लगे, लेकिन साथ ही एक्टर्स की कम्फर्ट और उनकी पर्सनल बाउंड्री का पूरा ख्याल रखा जाए। मतलब काम भी बढ़िया हो और किसी को असहज भी ना लगे।”

आस्था खन्ना से शूटिंग के दौरान एक्टर्स के कंसेंट के बारे में सवाल किया गया। जिसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “मेरे काम में कंसेंट सबसे जरूरी चीज होती है। सीन शुरू होने से पहले ही एक्टर्स के बीच खुलकर बात करवाई जाती है-क्या ठीक है, क्या नहीं, और किस हद तक जाना है। ताकि बाद में कोई कन्फ्यूजन या असहजता ना रहे।”

उन्होंने आगे कहा,” सिर्फ एक बार की बात नहीं होती, पूरी शूटिंग के दौरान ये बातचीत चलती रहती है। कंसेंट हमेशा साफ होना चाहिए, किस चीज़ के लिए है ये भी तय होना चाहिए, और अगर कोई अपना मन बदलना चाहे तो उसकी पूरी आजादी होती है। यही चीज एक्टर्स को भरोसा देती है और वो आराम से अपना काम कर पाते हैं।”

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इंटीमेट सीन से पहले कौन-कौन से प्रोटोकॉल किए जाते हैं फॉलो?

इसके बारे में बताते हुए आस्था खन्ना ने कहा, “इंटीमेट सीन के समय सेट पर सख्त नियम होते हैं। वहां बहुत कम लोग रहते हैं और हर चीज पहले से तय होती है। सीन को पहले ही प्रैक्टिस कर लिया जाता है, इसलिए शूट के दौरान कुछ नया या अचानक नहीं किया जाता। ऐसा इसलिए ताकि सब कुछ ठीक रहे। इससे सेट पर ऐसा माहौल बनता है, जहां सभी को इज्जत और सुरक्षा मिलती है।”

क्या सीन शूट करते वक्त असहज महसूस करते हैं एक्टर्स?

इसके बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “कभी-कभी पूरी तैयारी के बाद भी कोई एक्टर असहज महसूस कर सकता है और यह बिल्कुल ठीक है। ऐसे में हम तुरंत रुक जाते हैं। फिर से बात करते हैं, जरूरत हो तो सीन बदलते हैं। मेरे लिए कोई भी शॉट, किसी भी इंसान की सेफ्टी से बड़ा नहीं है।”

पहले के समय और अब इंटिमेट सीन शूट करने में कितना आया अंतर

पहले फिल्मों से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक्ट्रेस को बिना बताए ही इंटिमेट सीन शूट किए गए। अब वर्किंग कल्चर में किस तरह का बदलाव हुआ? इसके बारे में आस्था खन्ना ने खुलकर बताया।

उन्होंने कहा, “पहले इंटीमेट सीन को लेकर इतना स्ट्रक्चर या जागरूकता नहीं थी। कई बार एक्टर्स को पूरी जानकारी भी नहीं दी जाती थी। आज चीजें बदल रही हैं। अब बातचीत हो रही है, कंसेंट की अहमियत समझी जा रही है, और परफॉर्मर्स की सेफ्टी को प्राथमिकता मिल रही है। इंटीमेसी कोऑर्डिनेशन दुनिया में कई सालों से विकसित हो रहा है, और भारत में अब यह एक जरूरी और मजबूत प्रैक्टिस के तौर पर जगह बना रहा है।

क्या कभी प्रोफेशनल बाउंड्री क्रॉस कर देते हैं एक्टर्स?

जब आस्था खन्ना से पूछा गया कि क्या कभी ऐसा मोमेंट आया है जब एक्टर्स ने कट के बावजूद प्रोफेशनल बाउंड्री क्रॉस कर दी हो, ऐसी सिचुएशन कैसे संभालते हैं? जवाब में उन्होंने कहा कि अगर कभी कोई अपनी हद पार करता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाता। हम तुरंत शूट रोक देते हैं और बात को वहीं सुलझाते हैं। सबसे पहले उस इंसान का ख्याल रखा जाता है जो असहज महसूस कर रहा हो। फिर साफ-साफ बताया जाता है कि क्या ठीक है और क्या नहीं। इस काम में जिम्मेदारी लेना बहुत जरूरी होता है।

बड़े स्टार्स और नए स्टार्स किनके साथ काम करना ज्यादा आसान?

इस सवाल का जवाब देते हुए इंटिमेसी डायरेक्टर ने कहा, “मेरे अनुभव में ये मायने नहीं रखता कि कोई बड़ा स्टार है या नया कलाकार। असली फर्क उनके काम करने के तरीके से पड़ता है। जो लोग खुले दिल से सीखते हैं, साफ-साफ बात करते हैं और दूसरों की सीमाओं का सम्मान करते हैं, उनके साथ काम करना आसान होता है। प्रोफेशनल होना किसी स्टेटस पर नहीं, बल्कि सोच और व्यवहार पर निर्भर करता है।”