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मृणाल सेन ने भारतीय सिनेमा को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

बहुत कम लोगों को मालूम है कि हिंदी की मशहूर कवयित्री और लेखिका महादेवी वर्मा की एक छोटी-सी कथा पर मृणाल सेन ने 1958 में एक बांग्ला फिल्म बनाई थी। इस फिल्म का नाम था ‘नील आकासेर नीचे’।

Author Published on: June 26, 2020 3:02 AM
मृणाल सेन ने हिंदी की मशहूर अभिनेत्रियों की प्रतिभा का इस्तेमाल अपनी बांग्ला फिल्मों में भी किया था।

जयनारायण प्रसाद

भारतीय सिनेमा में मृणाल सेन की गिनती सत्यजीत रे और ऋत्विक घटक जैसे महान बंगाली फिल्मकारों के साथ की जाती है। पद्मभूषण, दादा साहेब फाल्के और विदेश में अनेकों पुरस्कार से सम्मानित मृणाल सेन ने अपनी मातृभाषा बांग्ला के अलावा हिंदी, तमिल और ओड़िया भाषाओं में भी फिल्में बनाई हैं। हिंदी भाषा में उन्होंने कुल छह फीचर फिल्में बनाई हैं। ‘तस्वीर अपनी-अपनी’ (1984) नामक एक हिंदी टेलीफिल्म और 13 एपिसोड वाला हिंदी धारावाहिक ‘कभी दूर कभी पास’ (1986-87) भी निर्देशित किया।

14 मई, 1923 को बांग्लादेश के फरीदपुर में जन्मे मृणाल सेन की छह हिंदी फीचर फिल्मों में ‘मृगया’, ‘भुवन सोम’, ‘एक अधूरी कहानी’, ‘खंडहर’, ‘एक दिन अचानक’ और ‘जेनिसीस’ शामिल हैं। ‘जेनिसीस’ अंग्रेजी में बनी थी। बाद में इसे हिंदी में भी बनाया गया। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, ओमपुरी, एमके रैना और शबाना आजमी ने अभिनय किया था। कान और लंदन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इसे खूब सराया गया।

मृणाल सेन ने हिंदी की मशहूर अभिनेत्रियों की प्रतिभा का इस्तेमाल अपनी बांग्ला फिल्मों में भी किया था। इनमें डिंपल कपाड़िया और स्मिता पाटिल का नाम प्रमुख है। डिंपल ने 1993 में बांग्ला फिल्म ‘अंतरीन’ में काम किया है। इस फिल्म की कहानी मशहूर कथाकार सआदत हसन मंटो की कथा ‘बादशाहत का खात्मा’ (एंड आॅफ किंग्सीप’ पर आधारित था। सर्वश्रेष्ठ कथा फिल्म के लिए इस फिल्म को राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था। बांग्ला फिल्म ‘आकालेर संधाने’ (अकाल की खोज) में अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने अभिनय किया है। यह फिल्म 1980 में बनी थी।
मृणाल सेन की हिंदी फिल्म ‘खंडहर’ (1983) और ‘एक दिन अचानक’ (1989) में शबाना आजमी ने अभिनय किया है। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और अनू कपूर ने बेहतरीन अभिनय किया है। शबाना आजमी को फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए 1984 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला।

मृणाल की छह हिंदी फिल्मों में ‘भुवन सोम’ (1969) वह हिंदी फिल्म है, जिसे भारत में समानांतर सिनेमा या न्यू वेब की पहली हिंदी कहा जाता है। इस फिल्म को कान और वेनिस फिल्म महोत्सव में पुरस्कार तो मिला ही साथ ही देश में राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा गया।

बहुत कम लोगों को मालूम है कि हिंदी की मशहूर कवयित्री और लेखिका महादेवी वर्मा की एक छोटी-सी कथा पर मृणाल सेन ने 1958 में एक बांग्ला फिल्म बनाई थी। इस फिल्म का नाम था ‘नील आकासेर नीचे’।

‘मृगया’ उनकी बेहतरीन फिल्मों में से एक है। 1976 में भगवती चरण पाणिग्रही की कहानी पर आधारित इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती और ममता शंकर का अभिनय अब भी यादगार माना जाता है। मिथुन चक्रवर्ती को इस फिल्म के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिला था।
लगभग 23 फीचर फिल्में बनाने वाले मृणाल सेन ने अपनी पहली फिल्म बांग्ला में ‘श्रात भोर’ (1955) बनाई थी। 2017 में उन्हें ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम एचीवमेंट’ पुरस्कार दिया गया। वे राज्यसभा में सांसद भी रहे। उनकी आखिरी बांग्ला फिल्म ‘आमार भुवन’ (2002) थीं, जिसमें नंदिता दास ने अभिनय किया था।

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