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Film Review- मोर्टल इंजिंस: मशीनों के बीच इंसानों की जंग

‘मोर्टल इंजिंस’ इसी नाम की एक किताब पर आधारित है। इस फिल्म में मशीनों की चकाचौंध है, लेकिन फिल्म की एक कमजोरी भी है कि इसमें इतने ज्यादा चरित्र हैं कि दर्शक का उन चरित्रों से जुड़ाव नहीं हो पाता। हालांकि फिल्म भविष्य पर आधारित है लेकिन इसमें समकालीन समय के सवाल भी हैं, जैसे अपने फायदे के लिए वैज्ञानिक शोध और वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ की लड़ाई।

(Image Source: YouTube)

निर्देशक- क्रिश्चियन रिवर्स
कलाकार- रॉबर्ट शीहान, हेरा हिमलर, ह्यूगो विविंग

हॉलीवुड की यह फिल्म हिंदी में भी डब होकर रिलीज हुई है। यह फिल्म भविष्य की एक दुस्वप्नगाथा पर आधारित है। इस दुस्वप्न में शहर बड़े इंजनों में तब्दील हो जाते हैं। लंदन भी एक ऐसे बड़े इंजन में बदल गया है जो आधुनिक सैन्य संसाधनों से सजा है और दूसरे किसी बड़े शहर यानी इंजन वाले शहर को ध्वस्त कर सकता है या निगल सकता है। वैलेंटाइन (ह्यूगो विविंग) नाम का एक दुष्ट वैज्ञानिक पूरी दुनिया पर कब्जा करना चाहता है, लेकिन एस्टर शॉ नाम की एक महिला उसके इस मंसूबे को कामयाब नहीं होने देना चाहती। वैलेंटाइन ने उसकी पुरातत्ववेत्ता मां को मारा था, जिसका बदला लेने के मकसद से एस्टर भी वैलेंटाइन को मारना चाहती है। धीरे-धीरे उसके साथ और भी लोग जुड़ते जाते हैं।

‘मोर्टल इंजिंस’ इसी नाम की एक किताब पर आधारित है। इस फिल्म में मशीनों की चकाचौंध है, लेकिन फिल्म की एक कमजोरी भी है कि इसमें इतने ज्यादा चरित्र हैं कि दर्शक का उन चरित्रों से जुड़ाव नहीं हो पाता। हालांकि फिल्म भविष्य पर आधारित है लेकिन इसमें समकालीन समय के सवाल भी हैं, जैसे अपने फायदे के लिए वैज्ञानिक शोध और वामपंथ बनाम दक्षिणपंथ की लड़ाई। इसमें एक मशीनी मानवाकृति या रोबोट भी है जो प्रतिशोध की भावना से भरा है, लेकिन अगर उसमें भावना है तो क्या उसमें प्यार या स्नेह भी पैदा होगा। फिल्म में हंसी-मजाक के कुछ दृश्य भी हैं, जैसे एक जगह एस्टर शॉ और उसके मित्र को काई से बनी चाय पिलाई जाती है, जिसके बारे में सोचकर ही हंसी आती है। फिल्म बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है। हवाई युद्ध के दृश्य रोमांचक कम और चमत्कारिक ज्यादा लगते हैं।

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