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जानी मानी अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ का जाना, अमिताभ बच्चन की शोले में भी आ चुकी हैं नजर..

गीता सिद्धार्थ ने फिल्मों में बहुत ज्यादा काम तो नहीं किया, लेकिन ‘गर्म हवा’ में उनका होना यह दर्शाता है कि वे कितनी ऊंचे कद की अभिनेत्री थीं। परिचय, गमन, शोले, मंडी, एक चादर मैली, दूसरा आदमी, नूरी, अलग-अलग और राम तेरी गंगा मैली उनकी चंद फिल्में हैं। पेश है जयनारायण प्रसाद की रिपोर्ट...

Updated: December 20, 2019 3:49 PM
पति सिद्धार्थ काक के साथ एक्ट्रेस गीता सिद्धार्थ

एक सामान्य सी अभिनेत्री कैसे एक फिल्म को अमर कर देती हैं, अभिनेत्री गीता सिद्धार्थ इसका उदाहरण हैं। हाल में गीता सिद्धार्थ ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। ‘गर्म हवा’ 1973 में बनीं और कानूनी पचड़ों को झेलते हुए 1974 में रिलीज हुईं। गीता ने इस फिल्म में अभिनय किया था। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने फिल्म में सलीम (बलराज साहनी) की पुत्री अमीना का किरदार निभाया था। गीता सिद्धार्थ ने गुलजार की फिल्म ‘परिचय’ में भी अभिनय किया था जिसमें जितेंद्र, जया भादुरी, प्राण और संजीव कुमार भी थे। गुलजार की फिल्म परिचय से बॉलीवुड डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस गीता सिद्धार्थ ने अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र स्टारर सुपर डुपर हिट फिल्म शोले में भी काम किया था। फिल्म 1975 में आई थी।

गीता सिद्धार्थ ने फिल्मों में बहुत ज्यादा काम तो नहीं किया, लेकिन ‘गर्म हवा’ में उनका होना यह दर्शाता है कि वे कितनी ऊंचे कद की अभिनेत्री थीं। परिचय, गमन, शोले, मंडी, एक चादर मैली, दूसरा आदमी, नूरी, अलग-अलग और राम तेरी गंगा मैली उनकी चंद फिल्में हैं। पर, ये फिल्में ‘गर्म हवा’ के आसपास भी नहीं हैं। हर कोण और हर दृष्टि से इस फिल्म को देखना अपने दौर के इतिहास को देखने जैसा है।

‘गर्म हवा’ दरअसल, भारत-पाकिस्तान विभाजन की फिल्म नहीं है, बल्कि विभाजन के केंद्र में सदियों से बसे एक मुसलिम परिवार पर क्या कुछ बीतता है, उसे दर्शाया गया है। फिल्म में सभी किरदारों ने दमदार अभिनय किया है। विदेशों में इस फिल्म को एक क्लासिक फिल्म और फिल्म के निर्देशक एमएस सथ्यूू को एक बेहतरीन निर्देशक के तौर पर देखा जाता है। इस फिल्म की कहानी इस्मत चुगताई की है, इसकी कहानी बहुत छोटी थी, जिसे कैफी आजमी और शमा जैदी ने अपनी लेखनी से विस्तार दिया था। इस फिल्म में उस्ताद बहादुर खां का संगीत इतना चाक्षुष और कर्णप्रिय है कि इस फिल्म को कई बार देखने का दिल करता है।

बहरहाल, गीता सिद्धार्थ का जाना एक अभिनेत्री का जाना भर नहीं हैं। वह जहां भी जातीं ‘गर्म हवा’ उनके साथ-साथ और आसपास ही रहतीं, किसी हमसाए की तरह। एमएस सथ्यू के निर्देशन वाली इस एतिहासिक फिल्म को बलराज साहनी, फारुख शेख और गीता सिद्धार्थ के बगैर जानना अधूरापन होगा। आज के संदर्भ में यह फिल्म और भी ज्यादा प्रासंगिक है। ‘गर्म हवा’ को उस दौर में कुछ सिरफिरों ने गलत बताया था। लेकिन सत्यजित राय, मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, तपन सिन्हा जैसे फिल्मकारों ने ‘गर्म हवा’ के निर्देशक एमएस सथ्यू का साथ दिया था। इसलिए, ‘गर्म हवा’ को देखना एक लाजवाब फिल्म को देखना भर नहीं है, हिंदुस्तान के अतीत और 1947 के भारत विभाजन को भी देखना है! आज के समय से इस फिल्म को मिला कर देखा जा सकता है। यह उर्दू फिल्म आपको 1947 के हिंदुस्तान से रूबरू कराएगी।

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