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खुद को साबित करने में वक्त लगता है: जॉन अब्राहम

’पहले लोग जॉन की बॉडी देखना चाहते थे। जब मैंने बतौर निर्माता फिल्म बनानी शुरू की तो कुछ लोग ये सोचने लगे कि अरे यह सोचता भी है। जब मैंने ‘मद्रास कैफे’ बनाई तो लोगों ने भरपूर तारीफ की। पढ़िए जॉन अब्राहम का पूरा इंटरव्यू।

Author नई दिल्ली | July 19, 2019 12:44 AM
जॉन अब्राहम आज खुद को बेहतरीन फिल्मों के निर्माता और सशक्त अभिनेता के रूप में साबित कर चुके हैं

आरती सक्सेना
भी देह की छवि में कैद कर दिए गए जॉन अब्राहम आज खुद को बेहतरीन फिल्मों के निर्माता और सशक्त अभिनेता के रूप में साबित कर चुके हैं जो जल्द ही अपनी नई फिल्म ‘बाटला हाउस’ के साथ दर्शकों से मुखातिब होंगे। इस फिल्म का निर्देशन निखिल आडवाणी ने किया है। देश की सुरक्षा से जुड़ी इस फिल्म को लेकर बातचीत के दौरान जॉन खासे उत्साहित दिखे।

सवाल : ‘बाटला हाउस’ में आपको सबसे खास बात क्या लगी?
’यह फिल्म 10 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए बाटला हाउस मुठभेड़ पर है। ऐसे ज्यादातर मामलों में पुलिस को दोषी मान लिया जाता है। मैंने जब इसकी कहानी सुनी तो तय किया कि इस मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। फिल्म की शूटिंग करते वक्त देश की पुलिस पर गर्व हुआ।
सवाल : मुठभेड़ के बाद पुलिस और आरोपी में दोषी कौन, इस पर लंबी बहस चलती है। आप इसे कैसे देखते हैं?
’मैं किसी और मुठभेड़ पर अपनी राय नहीं रख सकता। मैंने ‘बाटला हाउस’ के बारे में जानकारी जुटाई है तो सिर्फ उसकी बात कर सकता हूं। यह उन दो मुसलिम आंतकवादियों के साथ मुठभेड़ की कहानी है जिनका मकसद हिंदुस्तान को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाना था।
सवाल : फिल्म में आपकी भूमिका क्या है?
’मैं डीएसपी संजीव कुमार यादव का किरदार निभा रहा हंूं जिन्हें देश के राष्टÑपति सम्मानित कर चुके हैं। किस तरह एक पुलिसवाला देश के दुश्मन का खात्मा करता है फिल्म में यही दिखाया गया है।
सवाल : आतंकवाद की बात करें तो बॉलीवुड पर भी अंडरवर्ल्ड का आतंक छाया हुआ था। इस मामले में आपका कैसा अनुभव रहा?
’मैं जब आया तो फिल्म उद्योग में कारपोरेट का बोलाबाला था। मेरा आतंक का कोई अनुभव नही हैं।
सवाल : पिछले कुछ समय से आप और अक्षय कुमार देशहित से जुड़े मुद्दों पर फिल्में कर रहे हैं। पिछले साल भी आप दोनों की फिल्म साथ प्रदर्शित हुई थीं। इस साल भी ‘मिशन मंगल’ और ‘बाटला हाउस’ साथ आएगी। आप दोनों अच्छे दोस्त हैं लेकिन क्या फिल्में साथ प्रदर्शित होने पर कोई मनमुटाव नहीं होता?
’हम अच्छे दोस्त हैं इसलिए हमारी पसंद भी मिलती-जुलती है। हमारी फिल्मों का एक ही तारीख पर प्रदर्शित होना इत्तफाक है जो हम दोनों तय नहीं करते हैं।
सवाल : आप ने पिछले कुछ समय से पुलिस इंस्पेक्टर पर आधारित कई फिल्में की हैं जैसे, ‘सत्यमेव जयते’ और अब बाटला हाउस। क्या ये इसलिए करते हैं कि पुलिस पर आधारित फिल्में ज्यादा चलती हैं?
’मेरी छवि पुलिस वाले किरदार के साथ फबती है। यह जरूरी नही है कि पुलिस अफसर पर आधारित कहानी है तो हिट होगी ही। इसके लिए फिल्म की कहानी का भी अच्छा होना जरूरी है।
सवाल : क्या आपकी पिछली फिल्मों की तरह आगामी फिल्म में भी भरपूर एक्शन होगा ?
’इस फिल्म में भी एक्शन है लेकिन अलग तरह का है क्योंकि यह मुठभेड़ पर आधारित है। इसमें पुलिस और मुजरिम के बीच गोलीबारी और एक्शन के साथ लड़ाई नजर आएगी।

सवाल : आपके करिअर के शुरुआती दौर में अभिनय को लेकर आपकी बहुत आलोचना होती थी। आप अपने अब तक के सफर को कैसे देखते हैं?

’पहले लोग जॉन की बॉडी देखना चाहते थे। जब मैंने बतौर निर्माता फिल्म बनानी शुरू की तो कुछ लोग ये सोचने लगे कि अरे यह सोचता भी है। जब मैंने ‘मद्रास कैफे’ बनाई तो लोगों ने भरपूर तारीफ की। उसके बाद जब ‘परमाणु’ बनाई तो मुझे एक काबिल निर्माता मानने लगे। बतौर निर्माता मेरे लिए और भी दरवाजे खुल गए हैं। हर कलाकार को खुद को साबित करने में समय लगता है।

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