साहेब, IT रेड माल्या नीरव मोदी के यहां क्यों नहीं हुई? पुण्य प्रसून बाजपेयी का सवाल, पूर्व IAS बोले- ये झूठ से सच की लड़ाई

पत्रकारों से लेकर आम लोगों तक मामले में कई तरह के सवाल पूछ रहे हैं और ट्वीट कर रहे हैं। ऐसे में पुण्य प्रसून बाजपेयी से लेकर सूर्य प्रताप सिंह, रोहन गुप्ता आदि तक ट्वीट कर सरकार पर सवाल उठाते दिख रहे हैं।

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म.प्र के भोपाल में दैनिक भास्कर समूह के मालिक सुधीर अग्रवाल के परिसर पर आयकर विभाग के छापे के बाद गुरुवार को मुस्तैद सुरक्षाकर्मी। (फोटोः पीटीआई)

दैनिक भास्कर मीडिया ग्रुप के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर आयकर विभाग ने कर चोरी के आरोपों में गुरुवार को छापे मारे। ऐसे में सोशल मीडिया पर मुद्दा गर्माया हुआ है। पत्रकारों से लेकर आम लोग तक मामले में कई तरह के सवाल पूछ रहे हैं और ट्वीट कर रहे हैं। ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने एक ट्वीट किया जिसमें वह सरकार पर कटाक्ष करते हुए पूछते नजर आए- ‘साहिब IT, ED Raid माल्या, चौकसी, नीरव मोदी के यहां क्यों नहीं हुई?

वहीं पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने भी मीडिया ग्रुप के सपोर्ट में आकर कहा- ‘भारत समाचार और पत्रकार ब्रिजेश मिश्रा जी उत्तरप्रदेश की बुलंद आवाज हैं। विशेषकर कोरोना काल में सीमित संसाधनों के साथ उनकी टीम की रिपोर्टिंग भारतीय मीडिया के लिए नज़ीर बनी। चुनाव तक अनेकों साज़िशें होंगी, पर अंत में जीत सत्य की ही होगी। मैं पूरे मन, पूरी ताक़त से आपके साथ खड़ा हूं।’

अपने एक अन्य पोस्ट में पूर्व आईएएस ने कहा- ‘भारत समाचार और दैनिक भास्कर पर रेड ‘सच की पत्रकारिता’ की रीढ़ पर हमला है। सच के लिए परीक्षा का दौर है। झूठ से सच की लड़ाई है, कुछ चीखें तो उठेंगी।’

कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने भी मामले को लेकर एक पोस्ट कर कहा- ‘प्रिय पत्रकार साथियों, आयकर विभाग का छापा आपकी सच्ची पत्रकारिता के लिए सरकारी प्रमाण पत्र है। हिम्मत मत हारियेगा, पाठकों और दर्शकों की नज़र में आपका सम्मान बढ़ रहा है।’ वहीं कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी का भी ट्वीट सामने आया जिसमें उन्होंने कहा- ‘कहने को 56 इंच का सीना है, टुच्ची हरकतें करके जीना है..!’

कांग्रेस नेता रोहन गुप्ता बोले- ‘अखबार ने नाकामी छाप दी और बदले में साहेब ने छापा मार दिया।’ पत्रकार आदेश रावल ने कहा- ‘मामला सिर्फ दैनिक भास्कर तक सीमित नहीं है। मेरी जानकारी के मुताबिक, देश के 2 बड़े न्यूज चैनल्स के मैनेजमेंट इस समय नोटिस पर हैं। रोज उनकी खबरों को रिव्यू किया जाता है। नाम बताने का कोई फायदा नहीं है। आने वाले दिनों में ऐसी रेड की खबरें किसी न्यूज चैनल से आएं, तो समझ जाइएगा।’

पत्रकार उमाशंकर ने लिखा- ‘किसी पाखंडी को सबसे अधिक ग़ुस्सा तब आता है जब उसके पाखंड पर सवाल उठाया जाता है। लेकिन समय सबका खंड खंड पाखंड करता है।’

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