यूट्यूबर और Bigg Boss OTT 2 के विनर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सांप के जहर मामले में फटकार लगाई है। केस में सुनवाई के दौरान SC ने सख्त टिप्पणी करते हुए साफ कहा- लोकप्रियता का मतलब यह नहीं कि कोई “जो मन में आए” कर सकता है।

कोर्ट में क्या हुआ?

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दाखिल चार्जशीट और आपराधिक कार्रवाई को चुनौती दी है।

  • सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तीखे सवाल पूछे-
  • क्या कोई व्यक्ति सांपों के साथ कथित तौर पर “खेल” सकता है?
  • क्या किसी को सिर्फ इसलिए छूट दी जा सकती है क्योंकि वह मशहूर है?
  • अगर ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया जाए तो समाज में क्या संदेश जाएगा?

बेंच ने कहा कि यदि लोकप्रिय चेहरे बेजुबान जीवों का इस्तेमाल करते दिखेंगे, तो यह गलत उदाहरण पेश करेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत ही आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय है।

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बचाव पक्ष की दलील क्या है?

एल्विश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने दलील दी कि वे संबंधित पार्टी में सिर्फ एक गेस्ट के रूप में पहुंचे थे। बचाव पक्ष का कहना है कि रेव पार्टी के आरोपों के ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं। मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि जांच में शामिल नौ सांप जहरीले नहीं थे।

हालांकि, राज्य पक्ष का तर्क है कि अंडरकवर ऑपरेशन और बरामदगी के आधार पर जांच आगे बढ़ी है।

मामला शुरू कैसे हुआ?

3 नवंबर 2023 को नोएडा पुलिस को एक कथित रेव पार्टी की सूचना मिली। छापेमारी के दौरान कोबरा सहित नौ सांप बरामद किए गए। आरोप है कि इन सांपों और उनके जहर का इस्तेमाल अवैध पार्टियों में किया जाता था।

एफआईआर एक एनजीओ की शिकायत के आधार पर दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सांपों का इस्तेमाल वीडियो शूट और पार्टियों में किया जा रहा है।

गिरफ्तारी और जमानत

17 मार्च 2024 को एल्विश यादव को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और आईपीसी की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत गिरफ्तार किया गया। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

22 मार्च 2024 को गौतम बुद्ध नगर की जिला अदालत ने 50,000 रुपये के बेल बॉन्ड पर उन्हें जमानत दे दी। उस समय बचाव पक्ष ने कहा था कि एनडीपीएस एक्ट से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला।

फिलहाल, अंतिम फैसला आना बाकी है। 19 मार्च की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

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