अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम 3’ का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा था। ‘2 अक्टूबर को क्या हुआ है?’, बॉलीवुड फिल्मों के सबसे जरूरी सवालों में से एक है। ये उतना ही बड़ा सवाल है, जितना ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था?’
‘दृश्यम’, बॉलीवुड की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी में से एक हैं। अजय देवगन और तब्बू स्टारर इस फिल्म ने बीते 11 सालों से दर्शकों को अपने साथ बांधा हुआ है। अब ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के साथ इस फ्रेंचाइजी का अंत हो रहा है। पिछली दो फिल्में मलयालम एक्टर मोहनलाल की ‘दृश्यम’ का रीमेक थीं। लेकिन इस बार डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने चीजों को अपने हाथ में लेते हुए कहानी को अलग मोड़ देने का फैसला किया। यही चीज पिक्चर में अच्छी भी है।
विजय सलगांवकर की बढ़ी मुश्किलें
कहानी की शुरुआत मीरा देशमुख (तब्बू) के सुसाइडल होने से होती है। मीरा अपने बेटे समीर की मौत से आज भी टूटी हुई है और विजय सलगांवकर (अजय देवगन) के परिवार से बदला चाहती हैं। ऐसे में उसका पति महेश देशमुख (रजत कपूर), क्राइम ब्रांच चीफ राजवीर सिंह तोमर (जयदीप अहलावत) के पास पहुंचता है। सभी मिलकर विजय सलगांवकर और उसके परिवार को पकड़ने का जाल बुनने लगते हैं। केस दोबारा खुलता है और विजय एक बार फिर सवालों के घेरे में आ जाता है।
इस बार लगता है कि चीजें पहले से ज्यादा गंभीर हैं। विजय सलगांवकर के पास भागने का कोई रास्ता नहीं है। मुसीबत कब, कहां से आएगी कोई नहीं बता सकता। विजय के पास भागने के रास्ते खत्म हो चुके हैं, और यहीं से आगे की कहानी आगे का मोड़ लेती है। पिक्चर के सबसे बढ़िया सीन्स में से एक है विजय और राजवीर का आमना-सामना, जो इंटरवल से ठीक पहले होता है। दोनों एक दूसरे को भांपने की कोशिश कर रहे हैं। यही सीन आपको आगे क्या होगा जानने के लिए अपनी सीट से जोड़ता है।
पिक्चर का फर्स्ट हाफ थोड़ा स्लो है। कहानी में नए किरदारों के आने में और पुरानी बातों को याद करने में ये बीतता है। मगर इंस्पेक्टर गायतोंडे (कमलेश सावंत) अपनी कॉमिक टाइमिंग के साथ आपका खूब मनोरंजन करते हैं। सेकेंड हाफ में असली खेल शुरू होता है। मीरा का वकील श्रीकांत रेड्डी (प्रकाश राज), विजय और उसके परिवार को परत दर परत खोलने में लग जाता है। इस बार पुलिस के पास सबूत है। बड़े सवाल हैं और गवाह भी है। ऐसे में हर वक्त यही बात आपके मन में आती है कि अब तो विजय सलगांवकर गया।
परफॉरमेंस
परफॉरमेंस की बात की जाए तो अजय देवगन ने एक बार फिर कमाल किया है। वो बिना कुछ बोले अपनी आंखों से ही हर चीज बयां करते हैं। रेड्डी के रोल में प्रकाश राज काफी बढ़िया हैं। उनकी डायलॉग डिलीवरी और अंदाज आपको पसंद आएगा। जयदीप अहलावत, ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी में एक नया एलिमेंट लेकर आए हैं। विजय की बीवी नंदिनी के रोल में श्रिया सरन को थोड़ा-सा ही वक्त मिला है। एक ही सीन में उन्होंने कमाल किया है।
हालांकि पुलिस को पागल बनाने और विजय को शातिर दिखाने के चक्कर में मेकर्स उसके फैमिली मैन रूप को भूल गए। विजय सलगांवकर एक फैमिली मैन है, जो अपनी बीवी और बेटियों की रक्षा के लिए सबकुछ कर रहा है। उसकी आम जिंदगी की वजह से ही उसके ये क्राइम छिपाने के बड़े-बड़े काम देखने में एकदम शॉकिंग लगते हैं। फिल्म में अंजू और अन्नू बनीं इशिता दत्ता और मृणाल जाधव के पास कोई खास डायलॉग नहीं हैं। ‘दृश्यम 3’ में थ्रिलर पर ज्यादा जोर दिया गया है, जो इसके इमोशनल कनेक्ट को कम करता है।
‘दृश्यम 3’ का क्लाइमैक्स जैसे-जैसे करीब आता है, इसमें ड्रामा बढ़ता जाता है, जो आपको बड़े अंत को देखने के लिए उत्सुक करता है। हर ट्विस्ट के साथ आप खुद को तालियां बजाने और सीटी मारने से रोक नहीं पाते। पिक्चर का बैकग्राउंड स्कोर माहौल बनाने में कामयाब हुआ है। अमर मोहिले ने इसे काफी अच्छे से बनाया है। इसी के साथ ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी का बढ़िया अंत होता है।
