CineGram: रेखा और अमिताभ बच्चन की प्रेम कहानी हिंदी सिनेमा की उन चर्चित दास्तानों में से एक है, जिसके बारे में आज भी खूब बातें होती हैं। दोनों ने कभी अपने रिश्ते को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं किया, लेकिन उनके नाम के साथ जुड़ी प्रेम कहानी दशकों बाद भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई है।
रेखा की जिंदगी पर लिखी गई किताब ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ में भी उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्सों और दावों का जिक्र है। इस किताब के लेखक यासिर उस्मान ने रेखा के जीवन के कई अनकहे पहलुओं को सामने रखा है।
किताब में ‘उमराव जान’ के निर्देशक मुजफ्फर अली के हवाले से रेखा और अमिताभ के रिश्ते को लेकर एक बेहद भावुक बात लिखी गई है। मुजफ्फर अली का मानना था कि रेखा के साथ नाइंसाफी हुई और अमिताभ बच्चन को उनसे शादी करनी चाहिए थी। उनका दावा था कि उन्होंने रेखा के हालात को बेहद करीब से महसूस किया था और उन्हें लगता था कि अमिताभ को इस रिश्ते को एक पहचान और नाम देना चाहिए था।
यासिर उस्मान की किताब के मुताबिक, मुजफ्फर अली ने कहा था कि ‘उमराव जान’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने रेखा को बेहद करीब से समझा। उनके मुताबिक, रेखा अमिताभ का जिक्र जिस अंदाज में करती थीं, उससे ऐसा लगता था जैसे वह उनके पति हों। वह अमिताभ के लिए ‘इनको’ और ‘इन्होंने’ जैसे संबोधन इस्तेमाल करती थीं।
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मुजफ्फर अली ने रेखा की उस मनोदशा को याद करते हुए कहा था कि वह एक समय पर चलती-फिरती जिंदा लाश’ जैसी हो गई थीं और इसके लिए उन्होंने अमिताभ को जिम्मेदार माना।
उनके मुताबिक, रेखा ने अमिताभ से प्यार किया था और वह उस दौर में भी उनसे प्यार करती थीं। यही वजह थी कि मुजफ्फर अली को लगता था कि अमिताभ को रेखा के साथ अपने रिश्ते को नाम देना चाहिए था।
‘उमराव जान’ रेखा के करियर की सबसे यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। इस फिल्म में उन्होंने उमराव जान का किरदार निभाकर अपनी अदाकारी की ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी हिंदी सिनेमा के शानदार अभिनय में शुमार किया जाता है।
किताब में मुजफ्फर अली के हवाले से बताया गया है कि दिल्ली में ‘उमराव जान’ की शूटिंग के दौरान वह अक्सर सेट पर आते और वहां बैठते थे। इस दौरान रेखा से उनकी बातचीत होती रहती थी। रेखा जब भी अमिताभ के बारे में बात करती थीं, तो उनके बोलने के अंदाज से मुजफ्फर अली को बहुत कुछ समझ आता था। इसी से उन्हें लगा कि रेखा मन ही मन खुद को अमिताभ की पत्नी मानती थीं।
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मुंबई में भी छिपाकर सेट तक पहुंची थीं रेखा
मुजफ्फर अली ने ‘उमराव जान’ की शूटिंग से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा बताया था। उनके मुताबिक, जब वह पूरी यूनिट के साथ मुंबई पहुंचे तो रेखा को स्टेशन से छिपाकर सेट तक ले जाया गया था। बताया जाता है कि रेखा मुजफ्फर अली के पीछे छिपकर वहां से निकली थीं।
फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद जब डबिंग की बारी आई तो रेखा ने कहा था कि वह महज छह घंटे में पूरी डबिंग कर देंगी। हालांकि, मुजफ्फर अली ऐसा नहीं चाहते थे। उनका मानना था कि रेखा को हर डायलॉग और हर शब्द को सिर्फ बोलना नहीं, बल्कि उसे महसूस करके पर्दे पर उतारना चाहिए।
डबिंग के दौरान रेखा नर्वस भी हुईं और इसी वजह से काम उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंच गया। छह घंटे में डबिंग पूरी करने के बजाय इसमें करीब एक हफ्ते का समय लगा। हालांकि, मुजफ्फर अली के मुताबिक, इस अतिरिक्त समय का नतीजा बेहद शानदार रहा। रेखा की आवाज और संवाद अदायगी में जो भावनाएं उभरकर सामने आईं, उन्होंने ‘उमराव जान’ के किरदार को और भी प्रभावशाली बना दिया।
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रेखा के करियर की मील का पत्थर बनी ‘उमराव जान’
1981 में रिलीज हुई ‘उमराव जान’ रेखा के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक साबित हुई। फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से खूब सराहना मिली। इस भूमिका के लिए रेखा को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट एक्ट्रेस का सम्मान भी मिला।
‘उमराव जान’ से न सिर्फ रेखा को एक बेहतरीन अभिनेत्री के तौर पर पहचान मिली, बल्कि इस फिल्म ने उनके स्टारडम को भी नई ऊंचाई दी। दूसरी तरफ, अमिताभ बच्चन के साथ उनके कथित रिश्ते की चर्चा भी उनके फिल्मी सफर के साथ लंबे समय तक जुड़ी रही। हालांकि, दोनों ने अपने निजी रिश्ते को लेकर कभी खुलकर सार्वजनिक पुष्टि नहीं की।
इसी वजह से रेखा और अमिताभ की कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित और रहस्यमयी प्रेम कहानियों में शामिल है। मुजफ्फर अली की कही बातें भी इसी अनकही कहानी का एक हिस्सा हैं, जो रेखा की जिंदगी के उस दौर और उनकी भावनात्मक स्थिति पर एक अलग नजरिया पेश करती हैं।
