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लिपस्टिक अंडर माय बुर्का विवाद: कबीर खान बोले- फिल्म देखने के लिए किसी को मजबूर नहीं कर सकते

श्याम बेनेगल, फरहान अख्तर और अशोक पंडित के बाद फिल्मकार कबीर खान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को प्रकाश झा की फिल्म 'लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का' को प्रमाण पत्र देने से मना करने पर लताड़ लगाई है और इसे 'हास्यास्पद' करार दिया है।

Author नई दिल्ली | Updated: September 22, 2017 3:14 PM
फिल्म निर्देशक कबीर खान।

श्याम बेनेगल, फरहान अख्तर और अशोक पंडित के बाद फिल्मकार कबीर खान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को प्रकाश झा की फिल्म ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुर्का’ को प्रमाण पत्र देने से मना करने पर लताड़ लगाई है और इसे ‘हास्यास्पद’ करार दिया है। कबीर ने शुक्रवार को यहां लघु फिल्म ‘द स्ट्रेंज स्माइल’ की स्क्रीनिंग के दौरान कहा, “यह एक अजीब स्थिति है और समस्या तब होती है, जब इस तरह की घटनाएं अक्सर होने लगती हैं। फिल्म देखना एक स्वैच्छिक निर्णय है। इसके लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता और सीबीएफसी में बैठे दो-तीन लोग पूरे समाज के लिए कोई निर्णय नहीं ले सकते हैं, यह बिल्कुल हास्यास्पद है।”

फिल्मकार ने तंज कसते हुए कहा कि हम भारत को वैश्विक शक्ति कहते हैं, लेकिन वैश्विक शक्तियां इस तरह से काम नहीं करती हैं। उन्होंने कहा कि इस उद्योग के लोगों के लिए इस निर्णय के खिलाफ एकजुट होकर अपने अधिकारों की मांग के लिए आवाज बुलंद करने का समय आ गया है। सीबीएफसी ने इस फिल्म को यह कहकर प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया कि महिला प्रधान इस फिल्म में लगातार उत्तेजक दृश्यों और अपशब्दों की भरमार है। यह अप्रत्यक्ष रूप से समाज के एक विशेष वर्ग के संवेदनशली मुद्दे को दर्शाती है।

अलंकृता श्रीवास्तव निर्देशित यह फिल्म समाज के विभिन्न वर्गो की महिलाओं की इच्छाओं को दर्शाती है, जो खुली हवा में अपने तरीके से जिंदगी जीना चाहती हैं। फिल्म में रत्ना पाठक शाह, कोंकणा सेन शर्मा और अहाना कुमरा प्रमुख कलाकार हैं। यह फिल्म टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में स्पिरिट ऑफ एशिया अवार्ड और मुंबई फिल्म महोत्सव में लैंगिक समानता के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का ऑक्सफैम अवार्ड जीत चुकी है। गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड को 24 फरवरी को अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुरका’ को सर्टिफिकेट देने से इनकार करने के चलते लोगों के रोष झेलना पड़ा था। ऑडियो पोर्नोग्राफी, सेक्सुअल सीन्स और अभद्र शब्दों के लिए आरोप झेल रही फिल्म का सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने विरोध किया था। मालूम हो कि अलंकृता श्रीवास्तव की नारीवादी फिल्म लिपस्टिक अंडर माई बुर्का जोकि छोटे शहर की चार महिलाओं की यौन इच्छाओं के बारे में है।

सीबीएफसी के चेयरमैन पहलाज निहलानी ने इस मामले पर पहले जहां खुलकर बात करने से मना कर दिया था, वहीं 25 फरवरी को उन्होंने कहा- लोगों और मीडिया को सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया नहीं मालूम है। उन्होंने कहा कि सीबीएफसी उनके मुताबिक काम नहीं करेगा। पहलाज ने कहा कि टीवी चैनल्स पर डिबेट चल रही हैं लेकिन उन्होंने सीबीएफसी की गाइडलाइन्स पर होमवर्क नहीं किया है। टाइटल के शब्द बुरखा पर नहीं बल्कि ऑब्जेक्शन कंटेंट पर है। यह महिला शशक्तिकरण के पक्ष में है लेकिन इसका प्रोजेक्शन सही नहीं है। पहलाज ने फिल्म मेकर्स को सलाह देते हुए कहा- हिंदुस्तान की परंपरा को आगे रख कर फिल्म बनाएं। फेस्टिवल में फिल्म दिखाओ ताली बजती है पर थिएटर में पब्लिक नहीं आती।

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