सोमवार को दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को जहां कुछ बॉलीवुड हस्तियों ने सपोर्ट किया है, तो बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने इसे हुड़दंग और उत्पाती हरकत बताया। अब इस लिस्ट में पंजाबी सिंगर और अभिनेता दिलजीत दोसांझ का नाम भी शामिल हो गया है। सिंगर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए छात्रों के प्रदर्शन को खुलकर सपोर्ट किया है। उन्होंने अधिकारियों से छात्रों की मांगें सुनने की अपील की।

सिर्फ इतना ही नहीं, दिलजीत दोसांझ का कहना है कि छात्रों का समर्थन करने के लिए उन्हें ‘देश-विरोधी’ तक कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2020 में किसानों के विरोध प्रदर्शन के पक्ष में बोलने पर उन्हें काफी आलोचना और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। चलिए आपको विस्तार से बताते हैं कि अभिनेता ने क्या कहा है।

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दिलजीत ने किया प्रोटेस्ट को खुलकर सपोर्ट

सिंगर ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया। उस पोस्ट में उन्होंने पंजाबी में लिखा, “आज जो हुआ बहुत दुखद था। छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए था। मैं अथॉरिटी से छात्रों की मांगों को सुनने का आग्रह करता हूं। जनता की आवाज ईश्वर की आवाज होती है।”

दिलजीत ने आगे लिखा, “मुझ पर पहले ही कई बार एंटी-नेशनलिस्ट का टैग लग चुका है और अभी भी एंटी-नेशनलिस्ट ही कहा जाएगा। किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बाद मुझे काफी आलोचना और कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, जिनके बारे में मैं बात भी नहीं कर सकता। बाकी, ईश्वर सब देख रहे हैं। ईश्वर सबका भला करे।” बता दें कि दिसंबर 2020 में दिलजीत दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ शामिल हुए थे। उस दौरान उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

क्या बोलीं कंगना रनौत?

मानसून सत्र के पहले दिन मीडिया से बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा, “देखिए, ये जो हमारा संसद का सत्र होता है, ये इसीलिए होता है कि सब मुद्दों का विस्तारपूर्वक हम लोग डिस्कस कर सकें। सरकार की जवाबदेही सब चीज की होती है। हम लोग चाहते हैं कि सत्र चले और अपने प्रश्न वहां रखे।

लेकिन अगर हुड़दंग करेंगे और वहां पर उत्पात मचाएंगे और जिस तरह से ये प्रोटेस्ट भी चल रहा है, तो वो ठीक नहीं है। जनता ने जिस सरकार को चुना है वो कैसे सरकार चलाएगी, ये उनका अधिकार है। अगर आपको इतना ही है तो आप भी खड़े हो जाइए। आप सरकार की बाहें नहीं पकड़ सकते कि किसको रखिए किसको मत, ये बांह मरोड़ना अच्छी बात नहीं है।”

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