दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में बैन करने के बाद अब विदेशों में भी बैन कर दिया गया है। इस फिल्म का पहला नाम ‘पंजाब 95’ था, जिसे अब जी5 की इंटरनेशनल लाइब्रेरी से भी हटा दिया गया है। करीब चार साल तक सेंसरशिप से जुड़ी देरी का सामना करने के बाद फिल्म ने पिछले शुक्रवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक दी थी, लेकिन भारत में रिलीज के 48 घंटे के भीतर ही सरकारी निर्देशों के बाद इसे हटा लिया गया था। हालांकि, उस समय तक यह फिल्म विदेशों में उपलब्ध थी।
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स्क्रीन ने इस बात की पुष्टि के लिए फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान से संपर्क किया गया, तो उन्होंने फिल्म को इंटरनेशनली हटाए जाने की पुष्टि करते हुए सिर्फ इतना कहा, “हां।” वहीं, ZEE5 से फिल्म के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हटने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक्स पर एक यूजर ने इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लिखा, “अब इसे इंटरनेशनल मार्केट से भी हटा दिया गया है।” ऐसे कई ट्वीट इंटरनेट पर सामने आ रहे हैं।
पिछले रविवार शाम 5 जुलाई की शाम में जी5 ने ‘सतलुज’ को इंडिया में अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया था और इस सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया था। प्लेटफॉर्म ने कहा था, “मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ‘सतलुज’ अगली सूचना तक भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी। हम पूरी प्रक्रिया और उचित माध्यमों के जरिए फिल्म को जल्द से जल्द दर्शकों तक वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
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फिल्म के हटाए जाने के तुरंत बाद इसकी पायरेटेड कॉपियां भी इंटरनेट पर सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर फिल्म की पायरेटेड कॉपियां लगभग हर प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं और लोग इसे देख रहे हैं। फिल्म के बैन हो जाने के बाद फिल्म के एक्टर और निर्देशक का बयान भी सामने आया था, जिसमें उन्होंने फिल्म को 2 दिन में मिले प्यार के लिए शुक्रियादा किया था और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इस फिल्म को पहुंचाने की अपील की थी।
फिल्म सतलुज के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बैन होने पर अभी तक एक्टर दिलजीत की तरफ से कोई बयान सामने नही आया है। फिल्म के डायरेक्टर ने इस बैन को कंफर्म किया है। बतो दें कि फिल्म करीब 4 साल से सेंसर बोर्ड की मंजूरी नामिलने की वजह से सिनेमाघरों में रिलीज नही की गई थी, जिसे 3 जुलाई को बिना किसी प्रमोशन और घोषणा के जी5 पर रिलीज कर दिया गया था।
फिल्म की कहानी पंजाब के साल 1984 से 1995 की पृष्ठभूमि पर आधारित है। ये वो समय था जब आतंकवादी को मारने के बदले पंजाब में पुलिस वालों को प्रमोशन मिलता था और इसी लालच में बेकसूरों को आतंकवादी बताकर मारा जा रहा था, इतना ही नहीं पुलिसवालें उनको लावारिस बता कर उनका अंतिम संस्कार भी कर देते थे। इस बात का पर्दाफाश मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह ने किया था। फिल्म में जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने निभाया है, फिल्म का निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है।
