सालों के इंतजार और सेंसर बोर्ड के साथ लंबी कानूनी व सेंसरशिप की लड़ाई के बाद आखिरकार सिंगर, एक्टर दिलजीत दोसांझ और निर्देशक हनी त्रेहान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘पंजाब 95’ दर्शकों तक पहुंच गई है। फिल्म का नाम बदलकर इसे अब ‘सतलुज’ नाम से रिलीज किया गया है। यह फिल्म शुक्रवार शाम से जी5 पर एक्सक्लूसिव स्ट्रीम हो रही है। फिल्म के साथ इसके ऑफिशियल ट्रेलर को भी जारी किया गया।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ कंवलजीत सिंह, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन से प्रेरित है। कहानी पंजाब के उस दौर को दिखाती है, जब 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में खालिस्तान आंदोलन के समय कई लोगों के गायब होने, फर्जी एनकाउंटर और बिना वजह हिरासत में लिए जाने के मामले सामने आए थे।
लंबी कानूनी और सेंसरशिप की लड़ाई के बाद, फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ कर दिया गया। डायरेक्टर हनी त्रेहान ने साफ किया कि दर्शकों को फिल्म का पूरा और बिना किसी कट वाला ओरिजिनल वर्जन देखने को मिला है।
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फिल्म ‘सतलुज’ का ट्रेलर कैसा है
फिल्म की रिलीज के साथ इसका आधिकारिक ट्रेलर भी जारी किया गया है, 2 मिनट 17 सेकेंड का ये ट्रेलर 1995 के पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक माहौल की झलक पेश करता है। शुरुआत में अर्जुन रामपाल का किरदार वॉयसओवर के जरिए बताता है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों ने कथित रूप से अपने निजी फायदे के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया।
इसके बाद सुविंदर विक्की एक पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं, जो दिलजीत दोसांझ द्वारा निभाए गए किरदार जसवंत सिंह को पुलिस के खिलाफ आवाज उठाने से मना करते हुए चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना उनकी जान पर भारी पड़ सकता है।
ट्रेलर आगे बढ़ते हुए कथित पुलिस अत्याचारों की तस्वीर पेश करता है, लेकिन जसवंत सिंह न्याय की अपनी लड़ाई से पीछे हटने से इनकार कर देते हैं। मानवाधिकारों की रक्षा और सच को सामने लाने के लिए वह व्यवस्था को चुनौती देते हैं। ट्रेलर में यह भी दिखाया गया है कि कैसे वह हजारों कथित लापता लोगों के मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाने की कोशिश करते हैं और सालों तक न्याय की लड़ाई लड़ते हैं।
एक सीन में जसवंत सिंह कहते हैं, “हम न पुलिस के खिलाफ हैं और न सरकार के, लेकिन उन स्वार्थी लोगों के खिलाफ जरूर हैं, जिन्होंने अपनी तरक्की के लिए इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं।” ट्रेलर के अंत में जसवंत सिंह के अपहरण और उनके लापता हो जाने की घटना दिखाई गई है, जो उस व्यक्ति की दर्दनाक कहानी को सामने लाती है जिसने दूसरों को न्याय दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया था।
जब निर्देशक ने मान ली थी हार
जब फिल्म को रिलीज की मंजूरी मिलने में दिक्कतें आ रहीं थीं, तो उस समय स्क्रीन के साथ बातचीत में फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने बताया था कि ये फिल्म ‘सतलुज’ नाम से रिलीज होगी और उनकी टीम ने सेंसर बोर्ड की सभी शर्तें मान ली हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया से वह बेहद निराश हैं और उन्हें लगता है कि जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी के साथ न्याय नहीं हो पाया। “30 साल बाद भी ऐसा लग रहा है, जैसे जसवंत सिंह खालड़ा का फिर से अपहरण हो रहा हो।”
फिल्म ‘पंजाब 95’ की रिलीज में क्यों हुई देरी
फिल्म की रिलीज में हुई लंबी देरी की सबसे बड़ी वजह सेंसर बोर्ड के साथ चला विवाद था। साल 2022 में फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए जमा किया गया था, लेकिन बोर्ड ने मंजूरी देने से पहले इसमें कई बदलाव और कट लगाने की मांग की।
सितंबर 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में होना था, लेकिन भारतीय अधिकारियों के ऑर्डर के बाद इसकी स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई।
पिछले साल स्क्रीन को दिए एक इंटरव्यू में निर्देशक हनी त्रेहान ने बताया था कि ‘शुरुआत में उन्होंने फिल्म में 21 कट लगाने की मांग मान ली थी, ताकि रिलीज में और देरी न हो। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड ने शुरुआत से ही फिल्म का नाम बदलने के लिए कहा था। फिल्म का पहला नाम ‘घल्लूघारा’ था। इसके अलावा, बोर्ड ने फिल्म से ‘सच्ची घटनाओं से प्रेरित’ वाली लाइन हटाने के लिए भी कहा।’
बदलाव के बाद भी फिल्म को नहीं मिली मंजूरी
फिल्म के निर्देशक के मुताबिक, ‘उन्होंने सभी मांगे गए बदलाव किए, फिल्म का नया प्रिंट तैयार कर दोबारा जमा किया, लेकिन इसके बाद भी बोर्ड ने नए कट्स की मांग कर दी। हर बार बदलाव करने और नई कॉपी जमा करने के बावजूद लंबे समय तक उन्हें कोई अंतिम जवाब नहीं मिला।’
निर्देशक हनी त्रेहान के मुताबिक, ‘2024 में भी हर बार फिल्म जमा करने पर सेंसर बोर्ड नए कट्स की मांग करता रहा। 2025 में फिल्म को भारत के बाहर रिलीज करने की योजना भी बनी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी।’ उन्होंने बताया कि बोर्ड ने जसवंत सिंह खालड़ा का नाम, फिल्म का टाइटल, तिरंगे के दृश्य, गुरबानी की आवाजें और कई अन्य चीजें हटाने या बदलने को कहा था। इस पर उन्होंने सवाल उठाया, “अगर इतना सब बदल दिया जाए, तो फिल्म में बचेगा ही क्या?”
अब फाइनली फिल्म ‘पंजाब 95’ का नाम बदलकर इसे ‘सतलुज’ नाम से रिलीज कर दिया गया है। दर्शक इस फिल्म को जी 5 पर देख सकते हैं।
