दिलीप कुमार की फ़िल्म पर सेंसर बोर्ड ने लगाया था अड़ंगा, नेहरू से शिकायत पर चली गई थी सूचना-प्रसारण मंत्री की कुर्सी

दिवंगत एक्टर दिलीप कुमार की फिल्म ‘गंगा जमना’ पर सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी थी। इसको लेकर दिलीप कुमार ने पंडित नेहरू से मुलाकात की थी। जिसके बाद सूचना-प्रसारण मंत्री की कुर्सी चली गई थी।

Dilip Kumar
दिवंगत एक्टर दिलीप कुमार (Photo- Indian Express)

बॉलीवुड के दिवंगत एक्टर दिलीप कुमार ने अपने करियर में कई हिट फिल्मों में काम किया है। एक बार दिलीप कुमार की फिल्म को सेंसर बोर्ड ने रोक दिया था और वह शिकायत लेकर जवाहर लाल नेहरू तक पहुंच गए थे। पंडित नेहरू से मीटिंग के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री डॉ. बालाकृष्णन विश्वनाथ केसकर की कुर्सी तक चली गई थी। राजकमल से प्रकाशित चर्चित लेखक और वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई की किताब ‘भारत के प्रधानमंत्री: देश, दशा, दिशा’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र किया गया गया है।

किदवई लिखते हैं, साल 1961 की शुरुआत में फिल्म ‘गंगा जमना’ तैयार हो चुकी थी। इस फिल्म को दिलीप कुमार ने ही बनाया था और कहानी भी उन्होंने लिखी थी। लेकिन सेंसर बोर्ड ने फिल्म में हिंसा व अश्लीलता का जिक्र करते हुए 250 जगह काट-छांट करने के निर्देश दे दिए थे। कहा जाता है कि केसकर के इशारे पर ही ये कार्रवाई की गई थी। सेंसर बोर्ड की तानाशाही से परेशान आकर दिलीप कुमार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से मुलाकात करने की कोशिश की।

इंदिरा गांधी की मदद के बाद ये मुलाकात हो पाई। पंडित नेहरू ने 15 मिनट का समय दिया था, लेकिन ये मुलाकात एक घंटे से ज्यादा चली। पंडित नेहरू ने पूरी बात सुनी और फिल्म को रिलीज करने का निर्देश दे दिया। यहां तक कि पंडित नेहरू ने केसकर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी हटा दिया। दिलीप कुमार की जीवनी लिखने वाले रयूबेन ने बताया था कि सेंसर बोर्ड भगवान या तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहा था। वह बात को सुनने तक को राजी नहीं थे।

एक बार तो ऐसा भी हुआ था कि फिल्म को रिलीज करवाने के लिए संघर्ष कर रहे दिलीप कुमार को वित्तमंत्री मोरारजी देसाई से मुलाकात का समय तो मिल गया था, लेकिन केसकर उनसे मिलने का समय नहीं दे रहे थे। यहां तक कि इसमें नौकरशाह भी ट्रेजेडी किंग के पीछे पड़ गए और उनके मुंबई स्थित घर पर भी छापेमारी की गई थी। दिलीप कुमार ने फिल्म का विवरण तक भी तैयार किया था, लेकिन सेंसर बोर्ड के सदस्यों ने उसे देखना तक उचित नहीं समझा था।

प्रचार के लिए आगे आए दिलीप कुमार: 1962 के लोकसभा चुनाव में नेहरू की सरकार में रक्षा मंत्री कृष्ण मेनन को सोशलिस्ट पार्टी के नेता आचार्य जेबी कृपलानी ने चुनौती दे दी थी। मेनन रक्षा मंत्री थे और भारत चीन से युद्ध हार गया था। ऐसे में मेनन के खिलाफ लहर थी और नेहरू को अपने उम्मीदवार के हारने का डर था। दिलीप कुमार की जीवनी ‘वजूद और परछाई’ के मुताबिक, नेहरू ने दिलीप कुमार से चुनाव प्रचार करने के लिए कहा। प्रचार भी ऐसा हुआ कि कृपलानी को हार का सामना करना पड़ा।

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