स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ काफी चर्चाओं में बनी हुई है। इसकी कहानी, किरदार सुर्खियों में है, जो असली घटनाओं से प्रेरित बताए जा रहे हैं। ‘हमजा’ के अलावा एक और किरदार है, जो लोगों के बीच काफी चर्चा में बना हुआ है और वह उजै़र बलोच का रोल है। फिल्म में उजै़र को अंडरवर्ल्ड से जुड़े एक खतरनाक शख्स के रूप में दिखाया गया है, जिसे दानिश पंडोर ने पर्दे पर निभाया है।

अब इस फिल्म का एक सीन सबसे ज्यादा चर्चा में है, जिसमें वह अपने प्रतिद्वंद्वी अरशद पप्पू का बेरहमी से सिर काट देता है। इतना ही नहीं, फिल्म में उस मशहूर आरोप का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया था कि गैंग के लोगों ने कटे हुए सिर से फुटबॉल खेली थी। ऐसे में लोग अब यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि स्क्रीन पर दिखाई गई उसकी कहानी कितनी सच है।

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कौन था उजै़र बलोच

असल लाइफ में उज़ैर बलोच एक खूंखार गैंगस्टर था, जिसने रहमान की मौत के बाद उसके गैंग की कमान संभाली थी। वह गैंगस्टर अरशद पप्पू की बेरहमी से की गई हत्या का भी जिम्मेदार था, जिसका क्षत-विक्षत शव लियारी में मिला था। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह भी कहा जाता है कि स्थानीय लोगों ने उज़ैर और उसके साथियों को अरशद की हत्या के बाद उसके शव को इधर-उधर फेंकते हुए देखा था, यहां तक कि उज़ैर को उसके कटे हुए सिर से फुटबॉल खेलते हुए भी देखा गया था।

उज़ैर, रहमान डकैत का कजिन था। साल 2003 में उज़ैर के पिता फ़ैज़ मुहम्मद को अरशद पप्पू ने फिरौती के लिए किडनैप कर लिया था और बाद में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद उज़ैर जुर्म की दुनिया में आ गया, क्योंकि उसके चचेरे भाई रहमान डकैत ने उसे अपने गैंग में शामिल होने का न्योता दिया था। उन दिनों लियारी के गैंग्स पर रहमान का दबदबा था और अरशद पप्पू से उसकी भी दुश्मनी थी, क्योंकि अरशद लियारी पर अपना दबदबा बनाने की कोशिश कर रहा था।

फिर उज़ैर को चौधरी असलम खान ने गिरफ्तार किया था, जिसका किरदार फिल्म में संजय दत्त ने निभाया है। हालांकि, बाद में रहमान के राजनीतिक संपर्कों की वजह से उसे रिहाई मिल गई, लेकिन इसमें करीब दो साल लग गए क्योंकि वह कराची सेंट्रल जेल में बंद था। ‘डॉन’ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में उज़ैर रहमान के गैंग में शामिल नहीं होना चाहता था, लेकिन एक साझा दुश्मन होने की वजह से उसे मना लिया गया।

रहमान डकैत 2009 में एक एनकाउंटर में मारा गया था। इसके बाद उज़ैर ने गैंग की कमान संभालने का फैसला किया, क्योंकि उस समय वही गैंग का असल लीडर था। उसने रहमान की पॉलिटिकल पार्टी, ‘पीपल्स अमन कमिटी’ (PAC) की कमान भी संभाल ली, जिसका लियारी के चुनावों पर जबरदस्त दबदबा था। फिल्म की ही तरह उज़ैर और रहमान के पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के नेताओं से गहरे ताल्लुक थे और रहमान की मौत के बाद भी PPP ने 2012 तक उज़ैर को संरक्षण देना जारी रखा।

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