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हमारी याद आएगीः देवानंद ने करवाया था पांच मिनट में लता-जयदेव का समझौता

लता मंगेशकर नवकेतन फिल्म्स की फिल्मों की प्रमुख आवाज रहीं। नवकेतन की स्थापना देव आनंद ने 1949 में की थी। मगर अचानक लता मंगेशकर ने नवकेतन के लिए गाना बंद कर दिया।

लता मंगेशकर के साथ देवानंद

देवानंद- (26 सितंबर 1923-3 दिसंबर, 2011)
फिल्म सितारों की अपनी छवि होती है। युवा पीढ़ी इसी पर मुग्ध रहती है। मगर उम्र के असर के साथ ही वह छवि ईथर की तरह उड़ने लगती है। प्रशंसक अपने चहेते सितारों को बूढ़े और कमजोर होते देखते हैं। यह अशोक कुमार के साथ हुआ। राज कपूर के साथ हुआ। मगर किसी ने देव आनंद को वक्त के आगे असहाय नहीं देखा। यहां तक कि देव की इच्छा के कारण अमेरिका में निधन के बाद उनकी तसवीरें नहीं छपीं। देव, राज और दिलीप कुमार में सिर्फ देव ही ऐसे अभिनेता थे, जिनकी रोमांटिक छवि जीवनपर्यंत रही।
लता मंगेशकर नवकेतन फिल्म्स की फिल्मों की प्रमुख आवाज रहीं। नवकेतन की स्थापना देव आनंद ने 1949 में की थी। मगर अचानक लता मंगेशकर ने नवकेतन के लिए गाना बंद कर दिया। लगभग पांच साल तक लता ने नवकेतन की किसी फिल्म के लिए नहीं गाया। वजह देव आनंद नहीं, जयदेव थे, जो नवकेतन के संगीत विभाग में मासिक तनख्वाह पर काम कर रहे थे। जयदेव ने लता को लेकर कुछ कह दिया था, जिसके बाद लता मंगेशकर ने नवकेतन की फिल्मों के लिए गाना बंद कर दिया। जयदेव तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके संगीतकार रहे हैं। नैरोबी में पैदा हुए जयदेव पंजाब में पले बढ़े। 1951 में वह अली अकबर खान के सहायक बने। 1952 में देव आनंद ने जब अपनी फिल्म ‘आंधियां’ का संगीत अली अकबर खान को सौंपा तब जयदेव उनके सहायक थे। देव ने उन्हें 1961 में नवकेतन की फिल्म ‘हम दोनों’ से संगीतकार बना दिया था। ‘हम दोनों’ में देव आनंद की दोहरी भूमिका थी और देव चाहते थे कि इसके गाने लता गाएं।

देव जानते थे कि लता नवकेतन की फिल्मों के लिए नहीं गातीं। बावजूद इसके वह जिद पर अड़े थे कि ‘हम दोनों’ के गाने तो वह लता से ही गवाएंगे। देव ने अपने सहकर्मी राशिद खान को लता को मनाने के लिए भेजा। मगर लता मंगेशकर ने राशिद से स्पष्ट कह दिया कि वह नवकेतन की फिल्मों के गाने नहीं गाती हैं। देव ने तब दूसरा तरीका निकाला। उन्होंने जयदेव से कहा कि वह लता मंगेशकर के घर जाएं, उनसे माफी मांगें और किसी भी तरह से उन्हें मना लें। जयदेव ने कहा कि लता किसी भी सूरत में उनकी बात नहीं सुनेंगी और हो सकता है कि बहस भी हो जाए। आखिर देव आनंद ने किसी तरह लता मंगेशकर को बुलाया और ‘हम दोनों’ के गाने गाने की फरमाइश की। लता ने कहा कि चूंकि वह जयदेव के संगीत निर्देशन में गाना नहीं चाहती हैं और यह भी नहीं चाहती हैं कि सिर्फ उनके कारण देव आनंद अपना संगीतकार बदलें और बतौर संगीतकार जयदेव के हाथ से उनकी पहली ही फिल्म निकल जाए। लिहाजा इस मुद्दे पर बात न हो तो बेहतर। देव ने कहा कि क्यों नहीं लता जयदेव से मिलकर मामले को सुलझा लेती हैं। साथ ही जयदेव को आवाज दी जो पहले से ही बाहर खड़े थे। जयदेव अंदर आए। उन्होंने लता को सफाई दी। लता ने उनकी सफाई स्वीकार की। इस तरह लता और जयदेव के बीच जो भी गलतफहमी थी, वह देव आनंद ने पांच मिनट में खत्म करवा दी।

हालांकि यह काम देव 1965 में तब नहीं कर पाए थे, जब वहीदा रहमान ने उनकी फिल्म ‘गाइड’ में काम करने से इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि उसका निर्देशन राज खोसला कर रहे थे। राज खोसला ने भी कभी ‘सोलवां साल’ बनने के दौरान वहीदा रहमान पर अनुचित टिप्पणी की थी, जिसे वहीदा की मां ने सुन लिया था। तब देव वहीदा को राज खोसला के निर्देशन में काम करने के लिए मना नहीं सके थे तो इसलिए क्योंकि वहीदा ने अपनी मरती हुई मां को वचन दिया था कि वह भविष्य में कभी राज खोसला के साथ काम नहीं करेंगी। लिहाजा देव को राज खोसला की जगह विजय आनंद को ‘गाइड’ का निर्देशक बनाना पड़ा था। बहरहाल, लता ‘हम दोनों’ के गाने गाने के लिए तैयार हो गईं। इसके लिए ‘प्रभु तेरो नाम…’ के फिल्मांकन का सेट देव आनंद को तोड़ना पड़ा था क्योंकि लता मंगेशकर का कहना था कि वह पहले इसी फिल्म का दूसरा भजन ‘अल्लाह तेरो नाम…’ की रिकॉर्डिंग करेंगी। देव ने बिना देर किए सेट तोड़ा और ‘अल्लाह तेरो नाम…’ भजन का पहले फिल्मांकन किया। ये दोनों ही भजन फिल्म की विशेषता बन गए थे।

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