जिन लोगों ने ‘धुरंधर 2’ देख ली है उन्हें ये बात पता होगी कि इसमें कई जगहों पर खुल्लम खुल्ला गाली दी गई है और कुछ सीन में आधी गाली को म्यूट किया गया है। अब इस बात पर अभिनेता-निर्देशक दीपक तिजोरी ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीआई) के रवैये की आलोचना की। उन्होंने सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्मों और ओटीटी फिल्मों के बीच के अंतर को भी अजीब बताया।
दीपक तिजोरी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए तिजोरी ने चयनात्मक सेंसरशिप को लेकर अपनी उलझन जाहिर की। उन्होंने लिखा, “मुझे मानना पड़ेगा… शायद मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं। शायद मेरे पास उतनी समझ नहीं है जितनी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) या उसके सदस्यों के पास है। क्योंकि मैं सच में यह नहीं समझ पा रहा- आधी गालियों को म्यूट क्यों किया जाता है और बाकी को रहने क्यों दिया जाता है? कहीं कुछ शब्द रखे जाते हैं और कहीं पूरी तरह म्यूट कर दिए जाते हैं?”
तिजोरी ने यह भी सवाल उठाया कि एडल्ट फिल्म में ऐसी सेंसरशिप का क्या मतलब है। इसके बारे में उन्होंने लिखा, “खासतौर पर तब, जब फिल्म को पहले ही 18+ सर्टिफिकेट मिल चुका है, जिसका साफ मतलब है कि यह सिर्फ वयस्कों के लिए है। तो आखिर हम किसे बचा रहे हैं? और किससे… आधे शब्द से?”
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थिएटर और OTT रिलीज के बीच पक्षपात क्यों?
उन्होंने आगे थिएटर और OTT रिलीज के बीच एक बड़े अंतर की ओर भी इशारा किया। उन्होंने लिखा, “और फिर आता है वो हिस्सा जो मुझे सच में कन्फ्यूज करता है-वही फिल्म, एक-दो महीने के अंदर OTT पर रिलीज होती है… पूरी तरह बिना म्यूट के… बिना किसी बदलाव के… बिल्कुल वैसी जैसी उसे बनाया गया था। और वहीं बच्चे उसे देखते हैं… घर पर… परिवार के साथ… जहां सब कुछ साफ सुनाई देता है।”
“तो मैं बस यह समझने की कोशिश कर रहा हूं कि थिएटर में वयस्कों के लिए ‘आधा म्यूट’ करना कितना समझदारी भरा है, जब वही चीज़ कुछ ही समय बाद घर पर पूरी आवाज में चलती है? शायद इसमें कोई लॉजिक है जो मैं नहीं देख पा रहा… या शायद हम गलत चीजों पर ज्यादा सोच रहे हैं।”
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फैंस की प्रतिक्रिया
फैंस ने भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “CBFC और लॉजिक एक ही वाक्य में नहीं आ सकते।” दूसरे यूजर ने लिखा,“बहुत सही कहा सर… कुछ शब्दों को म्यूट करना वाकई गलत है, जब हर कोई उनका मतलब समझ ही जाता है।” एक और कमेंट में लिखा था, “CBFC का मतलब है कन्फ्यूज्ड बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन।”
