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डियर माया मूवी रिव्यू: मजबूत कहानी के साथ मनीषा कोईराला ने किया है शानदार कमबैक

Dear Maya Review: अतीत में हुई घटना की वजह से माया ने कभी किसी आदमी के प्यार को महसूस नहीं किया होता है। इस बात का पता जब उसकी पड़ोसी को चलता है तो उसकी तो इरा एना को माया के अतीत से किसी अनाम आशिक के नाम पर लव लेटर लिखने के लिए मना लेती है।

मनीषा कोइराला एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जो 90 के दशक में काफी मशहूर हुआ करता थीं। उस समय हर बड़े एक्टर के साथ वो काम कर चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने शादी की जो ज्यादा दिनों तक नहीं चली फिर कैंसर से जंग की और जीत हासिल की। एक बार फिर से वो लीड एक्ट्रेस के तौर पर डियर माया के जरिए स्क्रीन पर लौटने के लिए तैयार हैं। इस फिल्म के जरिए दो एक्ट्रेस बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली हैं। यह एक ऐसी महिला की कहानी है जो अपने अनदेखे प्यार को ढूंढने के लिए घर छोड़ देती है। इस फिल्म को सुनैना भटनागर ने डायरेक्ट किया है। फिल्म की कहानी 40 साल की माया (मनीषा कोइराला) नाम के किरदार की है जो शिमला में रहती है। वो कभी अपने घर से बाहर नहीं निकलती है। उसके साथ घर में चिड़िया और दो कुत्ते रहते हैं। कभी बाहर ना निकलने की वजह से उसकी तरफ 16 साल की पड़ोसी एना (मदीहा इमाम) और उसकी शरारती बेस्ट फ्रेंड इरा (श्रेया चौधरी) का ध्यान जाता है।

अतीत में हुई घटना की वजह से माया ने कभी किसी आदमी के प्यार को महसूस नहीं किया होता है। इस बात का पता जब उसकी पड़ोसी को चलता है तो उसकी तो इरा एना को माया के अतीत से किसी अनाम आशिक के नाम पर लव लेटर लिखने के लिए मना लेती है। पहले एना मना करती है। हालांकि बाद में मान जाती है और माया के लिए खूबसूरत लव लैटर लिखती है। उसे प्रोत्याहन तब मिलता है जब माया उनका जवाब देना शुरू करती है और अपनी लाइफस्टाइल से बाहर आने को कोशिश करती है। हालांकि इसी बीच इरा एक गलती कर बैठती है और पत्र पर दिल्ली का पता लिख देती है। इसकी वजह से माया को अपना सबकुछ बेचकर जाना पड़ता है ताकि वो दिल्ली में अपने प्यार के साथ रह सके। इस बात से दुखी एना अपने पैरेंट्स को सबकुछ बता देती है। जिसके बाद वो उसे बोर्डिंग स्कूल भेज देते हैं और वो इरा से अपनी दोस्ती भी तोड़ देती है। 6 सालों बाद दोनों माया को ढूंढने के लिए एक हो जाते हैं। जो कि पता नहीं जिंदा है भी या नहीं।

डियर माया एक ऐसी कहानी है जो आज के समय में बॉलीवुड में देखने को नहीं मिलती। माया के अलावा ये उन दो लड़कियों की कहानी है जिनके एक प्रैंक की वजह से 40 साल की महिला अपना सबकुछ बेचकर चली जाती है। यह एक बेकार आइडिया नहीं है। हालांकि पहले दोस्ती को तोड़ देना और बाद में एकसाथ हो जाना बॉलीवुड की कई फिल्मों में दोहराया जा चुका फॉर्मूला है।

फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एना माया को ढूंढने के लिए रेडियो स्टेशन पर बात करती है, जगह-जगह उसकी फोटो लगाती है लेकिन एक बार भी पुलिस स्टेशन नहीं जाती है। यह एक ऐसा सीन है जो गले नहीं उतरता है। फिर उसे कोई बताता है कि पुलिस की मदद लेनी चाहिए तब जाकर वो वहां जाती है। डियर माया एक अच्छी कहानी है लेकिन थोड़ी धीमी है। यह हर किसी को पसंद नहीं आ सकती है। अलग हटकर कहानी देखने का मन हो या फिर आप मनीषा कोइराला के फैन है तो फिल्म देखने जरूर जा सकते हैं।

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