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दंगल: अपनी इस बेटी की शादी में शरीक होंगे आमिर खान

इस फिल्म में धूम-3 के स्टार गीता और बबीता फोगट के पिता महावीर सिंह फोगट के किरदार में नजर आएंगे। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह हरियाणा मे पितृसत्ता से लड़ते हुए महावीर अपनी बेटियों को वर्ल्ड क्लास चैंपियन बनाते हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: November 4, 2016 11:46 AM
गीता फोगट की शादी में शामिल होंगे आमिर खान।

आमिर खान की फिल्म दंगल को रिलीज होने में अभी एक महीना बाकी है। वहीं इसकी मुख्स वजह गीता फोगट की शादी होने वाली है। लेकिन 27 साल की गोल्ड मेडलिस्ट की खुशी का इन दिनों यही एक कारण नहीं है। उनकी खुशी की असली वजह है सुपरस्टार आमिर खान का शादी में दंगल के निर्देशक नीतेश तिवारी के साथ शामिल होना। इस फिल्म में धूम-3 के स्टार गीता और बबीता फोगट के पिता महावीर सिंह फोगट के किरदार में नजर आएंगे। इसमें दिखाया गया है कि किस तरह हरियाणा मे पितृसत्ता से लड़ते हुए महावीर अपनी बेटियों को वर्ल्ड क्लास चैंपियन बनाते हैं। गीता और पवन कुमार की शादी 20 नवंबर को हरियाणा के चरखी दादरी में होगी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार फोगट ने कहा कि मैंने बुधवार को आमिर खान से बात की थी। वो नीतेश तिवारी के साथ शादी के समारोह में शरीक होंगे। तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। संगीत और मेहंदी 19 नवंबर को है।

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रेसलर ने यह भी कहा कि मेरी आमिर के साथ कुछ मौकों पर मुलाकात हुई है और एक्टर ने उन्हें काफी इज्जत दी है। आमिर जी और उनकी पत्नी से अपने हाथ से डाल कर खाना भी खिलाया है। बता दें कि भारत में पहलवानी के राज्य के नाम से मशहूर हरियाणा ने कभी महिला कुश्ती को बढ़ावा नहीं दिया। महावीर ने भारत के चंदगी राम अखाड़े में ट्रेनिंग ली थी। ये वही चंदगी राम हैं जिनकी बेटियां भारत की पहली महिला पहलवान थीं। उन्हें भारत में महिला कुश्ती का जनक कहा जाता है।

महावीर ने उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए अपनी बेटियों को ट्रेनिंग दी और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मास्टर चंदगी राम की बेटियों सोनिका कालीरमन और दीपिका कालीरमन ने देश का प्रतिनिधित्व किया। उनकी बड़ी बेटी सोनिका ने तो भारत केसरी का अवॉर्ड भी अपने नाम किया था। जब चंदगीराम ने अपनी बेटियों को रेसलिंग सिखानी शुरु की थी, उस वक्त उनका सभी लोगों ने भारी विरोध किया था। यहां तक कि उनके अपने सगे-संबंधी तक उनके इस फैसले के खिलाफ थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाला पहला अखाड़ा बनाया। इसके अलावा वो ऐसे कोच बनाने में भी जुटे जो कि महिला रेसलिंग को बढ़ावा देते हों। जब पहली बार उनकी बेटियां मैच के लिए गईं तब ग्रामीणों ने ना केवल उन्हें भगाया बल्कि उनपर पत्थर भी मारे। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और इस समाज से टक्कर लेते रहे। आखिरकार सोनिका भारत केसरी का टाइटल अपने नाम करने वाली पहली महिला रेसलर बनने में कामयाब रहीं।

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