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18 किलो वजन घटाकर बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं दलेर मेहंदी, देखें वीडियो

90 के दशक में बड़े हुए लोगों के पसंदीदा सिंगर की लिस्ट में दलेर मेहंदी का नाम जरूर रहता है। उनके आज भी हिट लिस्ट में शुमार रहते हैं।

पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी ने 18 किलो वजन घटाया है।

90 के दशक में बड़े हुए लोगों के पसंदीदा सिंगर की लिस्ट में दलेर मेहंदी का नाम जरूर रहता है। उनके आज भी हिट लिस्ट में शुमार रहते हैं। उनके कपड़ों का स्टाइल हो या डांस के स्टेप सभी लोगों के दिमाग में छाए रहते थे। लेकिन अब आपके फेवरेट सिंगर दलेर मेहंदी का लुक पूरी तरह बदल गया है। पहले थोड़े मोटे नजर आने वाले दलेर मेहंदी अब बिल्कुल फिट और स्लिम ट्रिम हो गए हैं।

जी हां दलेर मेहंदी ने जिम में कड़ी मेहनत कर फिट बॉडी पा ली है। हाल ही में दलेर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर की। इस वीडियो में दलेर मेहंदी ने बताया कि उन्होंने 18 किलो वजन कम किया है। उन्होंने कहा, मुझे आपके साथ ये शेयर करते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अपना वजन 85 किलो से घटाकर 67 किलो कर लिया है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने वजन घटाया है अब सही तरीके से वजन बढ़ाने के लिए दोबारा जिम शुरू कर रहे हैं।

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दलेर मेहंदी ने कहा कि जैसे-जैसे इंप्रूवमेंट होगी वह अपने फैन्स के साथ शेयर करते रहेंगे। उन्होंने अपने कोच भारत से भी मिलवाया। उन्होंने कहा कि इस कड़ी मेहनत के लिए उन्हें अपने फैन्स के सपोर्ट और आशीर्वाद की जरूरत है।

दलेर मेहंदी ने भारत में पॉप और फोल्क संगीत को नई दिशा दी है। 2006 में आई फिल्म रंग दे बसंती के गानों के लिए भी उन्हें याद किया जाता है। इसके अलावा 2010 में एक्शन रीप्ले के जोर का झटका और मिर्जिया के टाइटल सॉन्ग को भी उन्होंने अपनी आवाज दी है। मिर्जिया के गाने के लिए उन्हें काफी सराहना मिल रही है। दलेर ने बताया कि क्यों वो बॉलीवुड के लिए ज्यादा गाने नहीं गाते हैं। जब मेहंदी से पूछा गया कि उन्होंने राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ कई बार काम किया है। इतने सालों से उनके साथ रिश्ता कैसे बरकरार है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे उनसे रूहानी प्यार है। जब भी मैं उनसे मिलता हूं ऐसा लगता है कि मैं उन्हें काफी समय से जानता हूं। मैंने कई निर्देशकों को देखा है जिनके पास खुद का कोई अंत नहीं होता है। लेकिन राकेश अलग हैं। वो बेहद सिंपल और एकाग्र हैं। मिर्जिया का गाना गाने से पहले मैं इसे लेकर काफी असमंजस की स्थिति में था। इसकी दो लाइनें गाने के बाद स्टूडियों में मौजूद सभी लोगों को यह बेहद पसंद आया। गुलजार साहब ने इसे बहुत शानदार तरीके से लिखा है।

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