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सत्ता है और दो रईस पात्र हैं…पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ‘कफ़न’ का जिक्र कर मारा ताना तो आने लगे ऐसे कमेंट्स

देश में Covid- 19 महामारी की भयंकर स्थिति पर पुण्य प्रसून बाजपेयी ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी कफ़न का ज़िक्र कर कहा है कि...

covid 19, covid 19 india, punya prasun bajpaiदेश में कोविड -19 की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है (Photo-Indian Express/Tashi Tobgyal)

कोरोना महामारी के चलते देश में हाहाकार मचा हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 3 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं। हर दिन संक्रमण का एक नया रिकॉर्ड बन रहा है और लोग अस्पतालों, ऑक्सीजन, दवाइयों की कमी से दम तोड़ रहे हैं। कोरोना से निपटने की केंद्र सरकार की नीति की चौतरफा आलोचना हो रही है और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोग अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी केंद्र सरकार पर देश में मचे हाहाकार को लेकर निशाना साधा है।

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने ट्विटर पर एक के बाद एक कई ट्वीट्स कर केंद्र सरकार पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी कफ़न का जिक्र कर नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर तंज कसा है। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘कफ़न भी है.. घीसू और माधव भी है… तब प्रेमचंद थे! कहानी थी! दो गरीब पात्र थे..अब सत्ता है..सच है..दो रईस पात्र हैं…।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी ट्वीट किया है। अरविंद केजरीवाल लगातार केंद्र सरकार से मांग करते रहे हैं कि दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाई जाए। केंद्र सरकार ने ऐसा किया भी है लेकिन फिर भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाई है। कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार के एक कानून द्वारा दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल की शक्तियों में बढ़ोतरी कर दी गई है, इस पर बाजपेयी ने लिखा, ‘दिल्ली के एलजी (उपराज्यपाल) कहां हैं..? सब अधिकार एलजी के पास तो जिम्मेदारी किसकी?’

 

 

बाजपेयी ने लॉकडाउन होने पर प्रवासी मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए सरकारी प्रयासों के नाकाम होने पर लिखा, ‘बंधु..अब तो प्रवासी मजदूरों के लिए मुफ्त राशन तक नहीं.. लॉकडाउन लगाएंगे तो राशन देना होगा..जो अब संभव नहीं।’

 

पुण्य प्रसून बाजपेयी के इन ट्वीट्स पर यूज़र्स भी अपनी राय दे रहे हैं। चंद्रशेखर आज़ाद नाम से एक यूजर लिखते हैं, ‘कफ़न में मृत शरीर के अंतिम वस्त्र यानि कफ़न में होने वाले खर्च को भी उस कहानी का पात्र शराब और भोजना में उड़ा देता है, ठीक वैसे ही ये दो रईस फकीर देश भर के कफन का खर्च भी चपत कर गए।’

 

गुरबक्स सूद नाम से एक यूजर ने लिखा, ‘वही परिस्थिति है, अंतर केवल पात्रों के चरित्र का है। स्थितियां विकट हैं, अधिनायकवाद का बोलबाला है। देश में सत्ता का केंद्र अधिनायकों के हाथ है। लोग असहाय हैं और चिंताएं मुंह बाए खड़ी हैं।’

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