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…तो लड़कियों से अपने लिए इन दो शब्दों के इस्तेमाल पर चिढ़ते थे कॉमेडियन ओम प्रकाश

यह किस्सा जाने-माने कॉमेडियन ओम प्रकाश के करियर के शुरुआती दिनों के दौरान का है। चूंकि वह उम्र में...

ओम प्रकाश हिंदी फिल्मों में पहले दौर के टॉप कॉमेडियन रहे हैं। 1950 से 1980 तक उन्होंने एक से एक सपोर्टिंग रोल किए। हंसी ठिठोली कर अपने पंच से सबको गुदगुदाया। लेकिन कुछ बातें ऐसी थीं जिन पर वे पल भर में झुंझला जाते। एक दौर था जब उन्हें अपने लिए दो शब्दों का इस्तेमाल होना नागवार गुजरता था। वे इस पर सोचते थे कि क्या वह दूध वाले, जो उन्हें उन नामों से बुलाया जाता है।

किस्सा ओम प्रकाश के करियर के शुरुआत का है। चूंकि वह उम्र में बड़े थे, लिहाजा इंडस्ट्री की एक्ट्रेसेस उन्हें भइया बुलाती थीं। कहते-कहते बाकी नई एक्ट्रेसेस ने भी उन्हें यही नाम दे दिया। जब भी उन्हें भइया पुकारा जाता, तो वह चिढ़ जाते। गायिका और एक्ट्रेस तबस्सुम को दिए एक इंटरव्यू में भी उन्होंने इस वाकये के बारे में बताया था।

उन्होंने कहा था कि “अब मुझे यह लफ्ज खलने लगा है। मैं नया-नया मुंबई आया था। पार्टीशन के बाद। काम शुरू हुआ। जितनी हिरोइनें थीं, वे मुझे ओम भइया कहती थीं। नरगिस जी-सुरैया। उस जमाने की जितनी मशहूर थीं, सब आएं, ओम भइया-ओम भइया करें। मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं एक्टर नहीं दूध बेचने वाला भइया हूं।”

इतना ही नहीं, उन्होंने इस बाबत आगे कहा था कि “खैर, वह भी दौर गया। फिर एक और नया दौर आया। उसमें जो लड़कियां आईं, वे ओम अंकल-ओम अंकल करने लगती थीं। लेकिन उसमें एक फायदा होता था। जो आती थी, लिपट जाती थी।”

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