रील गाथा: आज हिंदी सिनेमा के ‘महानायक’ कहलाने वाले अमिताभ बच्चन की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी छिपी है। एक समय ऐसा भी था जब उन्हें लगातार फिल्मों से रिजेक्शन मिल रहा था, काम नहीं मिल रहा था और मुंबई में रहने तक की दिक्कत हो गई थी। इसी कठिन दौर में मशहूर कॉमेडियन और अभिनेता महमूद अली उनके लिए सहारा बनकर सामने आए थे। महमूद ने न सिर्फ अमिताभ को अपने घर में जगह दी, बल्कि उनके करियर को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई।
लगातार रिजेक्शन से जूझ रहे थे अमिताभ
1969 में फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अमिताभ बच्चन को शुरुआती दिनों में बहुत संघर्ष करना पड़ा था। लंबा कद, भारी आवाज और अलग व्यक्तित्व होने की वजह से कई फिल्ममेकर उन्हें लेने से हिचकिचाते थे। उस दौर में कई फिल्मों के ऑडिशन देने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल पा रहा था। आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी और मुंबई जैसे शहर में टिके रहना आसान नहीं था।
महमूद ने दिया घर में सहारा
इसी दौरान महमूद ने अमिताभ बच्चन के हुनर को पहचाना। उन्होंने अमिताभ को अपने घर में रहने के लिए जगह दी। उस समय अमिताभ कई दिनों तक महमूद के घर में ही रहे। महमूद उन्हें अपने छोटे भाई की तरह मानते थे। वह अक्सर उन्हें समझाते थे कि संघर्ष से घबराने की जरूरत नहीं है और एक दिन उनकी मेहनत जरूर रंग लाएगी। महमूद का यह भरोसा अमिताभ के लिए बहुत बड़ा सहारा था।
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‘बॉम्बे टू गोवा’ से मिली पहचान
महमूद ने सिर्फ रहने की जगह ही नहीं दी, बल्कि अमिताभ को फिल्म में काम करने का मौका भी दिया। उन्होंने अपने प्रोडक्शन की फिल्म ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन को लीड रोल दिलवाया।
1972 में रिलीज हुई इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ अरुणा ईरानी नजर आई थीं। फिल्म एक रोड कॉमेडी थी और दर्शकों को काफी पसंद आई। इस फिल्म के जरिए अमिताभ को इंडस्ट्री में पहचान मिलने लगी।
‘जंजीर’ से बदल गई किस्मत
हालांकि अमिताभ बच्चन की असली सफलता 1973 में आई फिल्म ‘जंजीर’ से मिली। इस फिल्म में उन्होंने ‘एंग्री यंग मैन’ का किरदार निभाया, जिसने हिंदी सिनेमा में एक नया ट्रेंड शुरू कर दिया। फिल्म की सफलता के बाद अमिताभ रातों-रात सुपरस्टार बन गए।
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आज भी याद करते हैं महमूद का एहसान
अमिताभ बच्चन कई इंटरव्यू में यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि संघर्ष के दिनों में महमूद ने उनकी बहुत मदद की थी। अगर उस समय महमूद का सहारा नहीं मिलता, तो शायद उनका फिल्मी सफर इतना आसान नहीं होता।
इसी वजह से महमूद और अमिताभ बच्चन की यह कहानी बॉलीवुड की सबसे भावुक और प्रेरणादायक दोस्ती की मिसाल मानी जाती है, जहां एक बड़े कलाकार ने एक संघर्षरत अभिनेता पर भरोसा किया और वही अभिनेता आगे चलकर हिंदी सिनेमा का ‘महानायक’ बन गया।
